टूट सकता है नवसारी का रिकार्ड
लगातार जीते 8 विधानसभा चुनाव
कांग्रेस की आंधी में भी रही धाक
छत्तीसगढ़ आजतक- लोकसभा चुनाव 2024 के तीसरे चरण में सात लोकसभा सीटों पर मतदान होना है, इनमें सरगुजा, रायगढ़, बिलासपुर और जांजगीर, कोरबा, रायपुर व दुर्ग की लोकसभा सीटें शामिल हैं, इनमें से सबसे खास है राजधानी रायपुर की लोकसभा सीट, इस सीट पर भाजपा के कद्दावर नेता बृजमोहन अग्रवाल खड़े हैं. आठ बार के विधायक बृजमोहन पहली बार लोकसभा प्रत्याशी बनाए गए हैं. माना जा रहा है कि इस चुनाव में जीत के अंतर के मामले में रायपुर गुजरात के नवसारी लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र के रिकार्ड को ध्वस्त कर सकता है.

अपने पहले चुनाव से लेकर अब लड़े गए आठ विधानसभा चुनावों में बृजमोहन ने अपनी लोकप्रियता की धाक जमाई है. वे तब भी अपनी सीट को अच्छे खासे अंतर से जीतने में कामयाब रहे जब रायपुर शहर क्षेत्र की चार में तीन विधानसभा सीटें भाजपा हार गई थी, माना जाता है कि बृजमोहन पार्टी स्तर से ऊपर के नेता हैं जिनके पास सभी दलों के लोग और कार्यकर्ता अबाध रूप से आना जाना करते हैं. उतनी ही गर्मजोशी से मिलते हैं, जनता और मीडिया के बीच भी उनके संबंध अन्य किसी भी समकालीन नेता से कहीं बेहतर है.
अब तक का राजनीतिक सफर
1990 के विधानसभा चुनाव में बृजमोहन अग्रवाल पहली बार रायपुर शहर से विधायक निर्वाचित हुए. इसके बाद 1993, 1998, 2003, 2008, 2913, 2018 के विधानसभा चुनाव में बृजमोहन ने लगातार जीत का परचम लहराया, 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की आंधी में रायपुर शहर की 4 में से 3 सीट बीजेपी हार गई, लेकिन बृजमोहन अग्रवाल न केवल रायपुर दक्षिण सीट को बचाने में सफल रहे बल्कि सर्वाधिक 67919 मतों से जीत दर्ज की.
टूटेगा नवसारी लोकसभा का रिकार्ड!
किसी भी लोकसभा चुनाव में सर्वाधिक मतों से जीतने का रिकार्ड गुजरात के नवसारी लोकसभा सीट से भाजपा प्रत्याशी सीआर पाटिल के नाम दर्ज है,पाटिल ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी को 6 लाख 89 हजार 690 मतों से पराजित किया था. बृजमोहन समर्थकों का मानना है कि वे इस रिकार्ड को तोड़ सकते हैं, इसके लिए उन्होंने जी-जान से कोशिशें भी शुरू कर दी है. रायपुर लोकसभा सीट पर पिछले चुनाव में भाजपा के ही सुनील सोनी ने जीत दर्ज की थी. उन्होंने 3.48 लाख की लीड ली थी. उन्होंने ऐसा तब किया था जब छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की तूती बोल रही थी. बृजमोहन की कद और लोकप्रियता के आधार पर समर्थक दावा कर रहे हैं कि बृजमोहन इस लीड को सवा तीन लाख से ज्यादा बढ़ा सकते हैं.
यह है रायपुर लोकसभा का गणित
1989 में पहली बार रायपुर लोकसभा की सीट पर भाजपा के रमेश बैस ने जीत दर्ज की, रायपुर लोकसभा क्षेत्र में विधानसभा की 9 सीटें हैं, इनमें रायपुर (पश्चिम, उत्तर, दक्षिण, ग्रामीण) के अलावा आरंग, धरसींवा, अभनपुर और भाटापारा बलौदाबाजार विधानसभा सीटें शामिल हैं. 2023 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने इनमें से आठ सीटें जीत ली हैं, विधानसभा चुनाव के नतीजों के अनुसार रायपुर लोकसभा सीट पर फिलहाल भाजपा की बढ़त 2.59 लाख मतों की है. माना जाता है कि इसमें कम से कम 10 फीसदी का इजाफा मोदी की गारंटी के चलते हो सकता है.
इस लोकसभा चुनाव के चार फैक्टर
लोकसभा के इस चुनाव में मुख्यतः चार फैक्टर काम कर रहे हैं. इनमें पहला है मोदी की गारंटी, दूसरा ही महिला सशक्तिकरण-वंदन, तीसरा है राममंदिर का निर्माण. चौथा और सबसे महत्वपूर्ण है बृजमोहन अग्रवाल की व्यक्तिगत छवि, लोगों से उनके रिश्ते और लोकप्रियता का लगातार बढ़ता ग्राफ.यदि मोदी की गारंटी और महिला सशक्तिकरण के मुद्दे काम कर गए तो नवसारी को मात देने लायक लीड आसानी से मिल जाएगी.
रायपुर ऐसे बना भाजपा का गढ़
प्रदेश और देश की राजनीति में रायपुर की धमक हमेशा रही है, विद्याचरण शुक्ल, पुरुषोत्तम लाल कौशिक और रमेश बैस जैसे नेताओं ने इसे इस मुकाम तक पहुंचाया. 1952 से लेकर 1971 तक रायपुर लोकसभा सीट कांग्रेस के कब्जे में ही रही. आपातकाल में यह स्थिति पलट गई. हालांकि 1981 से 1989 के बीच कांग्रेस ने वापसी की पर यह उनका गढ़ नहीं रह गया. 1989-1991 और उसके बाद 1996 से रमेश बैस ने लगातार रायपुर का प्रतिनिधित्व किया. रमेश बैस के बाद भाजपा के सुनील सोनी ने यहां जीत कायम रखी और अब वरिष्ठ नेता बृजमोहन यहां से उम्मीदवार हैं.
जनता बढ़ाएगी नेता का कद
रायपुरवासियों की मानें तो जनता स्वयं अपने नेता का कद बढ़ाने को तत्पर है. उनका मानना है कि राज्य स्तर पर बृजमोहन जितना कर सकते हैं, करते रहे हैं, कर रहे हैं और आगे भी करते रहेंगे. पर एक बार यदि वे दिल्ली पहुंच गए तो यह पूरे छत्तीसगढ़ के लिए अच्छा रहेगा. उनके जैसा नेता वहां भी अपनी वैसी ही पकड़ बनाने में सफल होगा जैसी कि छत्तीसगढ़ में उनकी है. लोग उन्हें छत्तीसगढ़ का अटलजी भी कहते हैं जिनका सम्मान सभी दलों में बराबर रहा है.
