आश्विन मास की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा कहते हैं और यह इस बार 28 अक्टूबर को पड़ रही है. शरद पूर्णिमा की रात को चंद्रमा की रोशनी में खीर बनाकर रखने की परंपरा है. मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की रात को चंद्रमा की किरणों से अमृत वर्षा होती है, इसलिए खीर बनाकर कुछ घंटों के लिए चंद्रमा की शीतल रोशनी में रखनी चाहिए और फिर उसका सेवन करना चाहिए.
मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की रात को ही भगवान कृष्ण ने महारास किया था. भगवान श्रीकृष्ण ने बंसी बजाकर गोपियों को अपने पास बुलाया और ईश्वरीय अमृत का पान कराया था. अतः शरद पूर्णिमा की रात्रि का विशेष महत्व है. इस रात को चन्द्रमा अपनी 16 कलाओं के साथ पृथ्वी पर शीतलता, पोषक शक्ति एवं शांतिरूपी अमृतवर्षा करता है.
शरद पूर्णिमा पर क्यों बनाई जाती है खीर
शरद पूर्णिमा की रात कई मायने में महत्वपूर्ण है. जहां इसे शरद ऋतु की शुरुआत माना जाता है, वहीं माना जाता है कि इस रात को चंद्रमा संपूर्ण 16 कलाओं से परिपूर्ण होता है और अपनी चांदनी में अमृत बरसाता है. पूर्णिमा की रात हमेशा ही बहुत सुंदर होती है लेकिन शरद पूर्णिमा की रात को सबसे सुंदर रात कहा जाता है. पुराणों में तो यहां तक कहा गया है कि इसकी सुंदरता को निहारने के लिए स्वयं देवता भी धरती पर आते हैं. धार्मिक आस्था है कि शरद पूर्णिमा की रात में आसमान से अमृत की वर्षा होती है. चांदनी के साथ झरते हुए हुए इस अमृत रस को समेटने के लिए ही आज की रात खीर बनाकर चंद्रमा की चांदनी में रखा जाता है. इसी वजह से लोग इस पूरी रात्रि को खीर बनाकर चांदनी में रख देते हैं, ताकि उसे प्रसाद के रूप में सुबह स्नान करके खाने के बाद निरोग हो पाएं.
मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की खीर सेवन करने से पुनर्याेवन शक्ति प्राप्त होती है. शरद पूर्णिमा पर रात में 10-12 बजे के बीच चंद्रमा का प्रभाव अधिक रहता है. इस समय चंद्र दर्शन जरूर करना चाहिए. कहते हैं इस समय जिस पर चंद्रमा की किरणें पड़ती हैं उसकी नेत्र संबंधित समस्या, दमा रोग जैसी बीमारियां खत्म हो जाती है. कोजागरी पूर्णिमा पर खीर खाना इस बात का प्रतीक है कि अब शीत ऋतु का आगमन हो चुका है. ऐसे में गर्म पदार्थ का सेवन करने से स्वास्थ लाभ मिलेगा. मौसम में ठंडक घुलने के बाद गर्म चीजों का सेवन करने से शरीर में ऊर्जा बनी रहती है.
