छत्तीसगढ़ में गौण खनिज का राजस्व हमेशा विवादों में रहा है, रेत, गिट्टी और मुरम से जितनी रायल्टी मिलती थी, उससे ज्यादा की अवैध माइनिंग हो जाती थी. इसलिए 2018-19 में शासन से नीलामी का अधिकार छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम को सौंप दिया. रायल्टी का एक बड़ा मामला तब उजागर हुआ जब छ. ग. राज्य सहकारी विपणन संघ के लिए बनाए गये गोदामों का मामला सामने आया. रायपुर और दुर्ग जिले के 3 स्थानों पर बनाये गये 50-50 हजार मी. टन क्षमता के वेयरहाऊस गोदामों में इस्तेमाल हुए गौण खनिज की रॉयल्टी नहीं पटाई गई थी. विपणन संघ द्वारा एन.सी.डी.सी. के ग्रामीण भण्डार योजना के अतंर्गत लोन लेकर रायपुर एवं दुर्ग के औद्योगिक क्षेत्र के भूमि पर प्रत्येक स्थान पर 50 हजार मी टन क्षमता के गोदाम बनाये गये हैं. इन गोदमों के निर्माण में हुई अनियमिताओं के संबंध में विधायकों ने कई बार विधानसभा में मामला उठाया था. जिसे राज्य शासन ने पूरे प्रकरण की जांच कराने हेतु राज्य आर्थिक अपराध अन्वेशषण ब्यूरो को सौंप दिया था. किन्तु जांच आज भी जस की तस पड़ी है.

दरअसल छ.ग. राज्य सहकारी विपणन संघ ने 2002-2003 में वित्त पोषित संस्था एन.सी.डी.सी से ऋण पर रायपुर जिले के औद्योगिक क्षेत्र सिलतरा दुर्ग जिले के औद्योगिक क्षेत्र हथखोज एवं बोरई (रसमड़ा) में 50-50 हजार मी. टन. क्षमता के गोदम निर्माण कराया था. इनमें प्रत्येक गोदाम की लागत 6.34 करोड़ रुपए थी. संघ द्वारा निविदा में 2 गोदामों का निर्माण एजेंसी व्ही.आर एण्ड कंपनी गाजियाबाद ने किया था. इस कंपनी ने बोरई तथा सिलतरा गोदाम के निर्माण में लगे रेत, गिट्टी, मुरम इत्यादि की रॉयल्टी की राशि नही पटाई गई थी. इस बात का खुलासा 2017 में इस प्रकार हुआ कि विपणन संघ के कार्यपालन अभियंता के रिटायर्ड हो जाने बाद फाइनल बिल को पारित करने के लिए शासन के माध्यम से लोक निर्माण विभाग के कार्यपालन यंत्री के पास भेजा गया, जिसमें उनके द्वारा बिल की जाँच कर निर्मित गोदाम में लगे खनिज की रॉयल्टी फाइनल बिल से कटौती कर निर्माण एजेंसी (व्ही.आर. एंड कंपनी) भुगतान करवा दी गई थी.
दुर्ग जिले के बोरई गोदाम में निर्मित खनिज की रायल्टी की कटौती कर विभागीय इंजीनियरों ने इसे शासन में जमा ही नहीं कराई, रायल्टी की यह राशि लगभग 14 लाख की है. यह बात खुलकर सामने आती उसके पहले से ही विभागीय इंजीनियरों ने इसका फाइनल पेमेंट कर दिया था.
विभागीय इंजीनियरों पर निर्माण एजेंसी से मिली भगत का आरोप
50 हजार मी. टन क्षमता निर्मित सभी गोदाम के रनिंग तथा फाइनल बिल भी शत प्रतिशत जांच एवं अनुशंसा सहायक यंत्री एन.एम. देवांगन द्वारा की गई थी बोराई गोदाम की फाइनल बिल की अनुशंसा कर देयक कार्यपालन अभियंता एवं वरिष्ठ अधिकारियों के माध्यम से 2006 में पारित कर निर्माण एजेंसी को भुगतान किया गया तथा व्ही. आर. कंपनी की बोरई गोदाम की सुरक्षा निधि अमानत राशि का भुगतान बाकी था. इस जमा राशि से भी रायल्टी की राशि की कटौती की जा सकती थी, किन्तु निर्माण एजेंसी से मिली भगत कर इसकी सम्पूर्ण राशि का भुगतान वर्ष 2017 में सहायक यंत्री एवं प्रभारी यांत्रिकी की अनुशंसा अनुसार कर दी गई, इस प्रकार बोरई गोदाम से शासन को रायल्टी की राशि से लगभग 14 लाख का नुकसान हुआ है. जो बिल, विभागीय मापपुस्तिका इत्यादि दस्तावेजों से जांच कर इनसे वसूली योग्य है.
यहां उल्लेखनीय है, कि श्री देवांगन द्वारा की गई गंभीर अनियमिताएं को देखते हुए उन पर अनुशासिक कार्रवाई नहीं करते हुए उसे आगामी पदोन्नति देने की तैयारी की जा रही है जो कि शासन के नियमों के विपरीत है. उक्त गलतियों को दंड दिया जाना चाहिए न कि पदोन्नति.
