आजाद भारत को अंतरिक्ष की सैर कराने वाले प्रथम भारतीय अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा का जन्म (13 जनवरी 1949) को पंजाब के पटियाला में हुआ था. वे भारत के पहले और विश्व के 138वें अंतरिक्ष यात्री थे जिन्हें अंतरिक्ष यात्रा करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ. शर्मा को यह अवसर 2 अप्रैल, 1984 में मिला था. वो घंटों आकाश में ताकते रहते थे. तब तक आसमान में देखते रह जाते थे जब तक कि हवाई जवाब आंखों से ओझल नहीं हो जाता था. राकेश शर्मा ने अंतरिक्ष में 7 दिन, 21 घंटे और 40 मिनट बिताए थे. वो अपने साथ खासतौर पर भारतीय व्यंजन लेकर गए थे, जिसमें सूजी का हलवा था, आलू छोले थे और साथ में था वेज पुलाव. वो अंतरिक्ष में दस मिनट योग भी करते थे. जिसके बाद अपने रिसर्च से ज़ुड़े काम में जुटते थे. राकेश शर्मा महज 21 साल की उम्र में भारतीय वायु सेना में शामिल हुए थे और सुपरसोनिक जेट लड़ाकू विमान उड़ाया करते थे.

आज से 39 साल पहले उन्होंने साल 1984 को सोवियत संघ के अंतरिक्ष यान सोयुज टी-11 से उड़ान भरी थी. वहां पहुंचने के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने जब उनसे कॉल पर पूछा था कि अंतरिक्ष से भारत कैसा दिखता है तो उन्होंने कहा था-सारे जहां से अच्छा हिंदुस्तान हमारा.
सन् 1971 में जब पाकिस्तान से जंग हुई तो उन्होंने 21 बार उड़ानें भरी थी. राकेश शर्मा को अंतरिक्ष में जाने के लिए 50 पायलटों में से टेस्ट के बाद चुना गया था. यह उनकी लाइफ के लिए गौरवशाली पल था. राकेश शर्मा विंग कमांडर के पद से रिटायर्ड हुए. उन्होंने एक बार एक इंटरव्यू में कहा था कि जब वो अंतरिक्ष से लौटे तो सामान्य जीवन उनके लिए मुश्किल हो गया. जहां भी जाते ऑटोग्राफ के लिए भीड़ लग जाती थी. खासतौर पर महिलाओं की भीड़ ज्यादा होती थी. इसी दौरान किसी ने उनसे यह रोचक सवाल पूछ दिया-क्या उन्होंने अंतरिक्ष में भगवान को देखा? तो उनका जवाब था-नहीं.
