रायपुर : फाल्गुन शुक्ल पक्ष की एकादशी यानी रंगभरी एकादशी 3 मार्च को पड़ रही है. चूंकि फाल्गुन का महीना रंगों का पर्व माना जाता है, इसलिए इस एकादशी का एक नाम रंगभरी एकादशी भी है. इसे झुलनी एकादशी, आमलकी यानी आंवला एकादशी और डोल ग्यारस भी कहा जाता है.

इस दिन भगवान विष्णु के अलावा शिव-पार्वती की भी खास पूजा का विधान है. इस दिन काशी में बाबा भोलेनाथ का गुलाल से भव्य श्रृंगार किया जाता है, मान्यता के अनुसार इसी दिन भगवान काशी विश्वनाथ माता गौरा को गौना कराकर पहली बार काशी आए थे. तब उनका स्वागत रंग-गुलाल से हुआ था. इस वजह से रंगभरी एकादशी के दिन काशी में रंगों का उत्सव मनाया जाता है और बाबा विश्वनाथ को दूल्हे की तरह सजाया जाता है. साथ ही बाबा विश्वनाथ का माता पार्वती के साथ गौना कराया जाता है. रंगभरी एकादशी के दिन बाबा विश्वनाथ नगर भ्रमण पर निकलते हैं और चारों तरफ लाल, हरे, पीले गुलाल उड़ाया जाता है. शिव के गण उनके साथ जमकर होली खेलते हैं. मान्यता है कि इस दिन शिवलिंग पर लाल गुलाल अर्पित करने से धन-समृद्धि और परिवार में खुशहाली आती है.
वहीं मंदिरों में जुगल जोड़ी सरकार राधा रानी और श्रीकृष्ण के संग होली खेलने की परंपरा निभाई जाती है. साथ ही आंवला की भी पूजा की जाती है. ऐसी मान्यता है कि भगवान विष्णु ने आंवले को आदि वृक्ष कहा है. फाल्गुन एकादशी पर विष्णु और आंवले की पूजा करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है. परिवार में सुख समृद्धि का वास होता है.
यह भी मान्यता है कि माता लक्ष्मी के आंसू से आंवले का वृक्ष बना है. एकादशी पर लक्ष्मीजी की भी पूजा करनी चाहिए. आंवले के वृक्ष में तीन देव ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास माना जाता है. ब्रह्माजी आंवले के पेड़ के ऊपरी हिस्से में, शिवजी बीच में और भगवान विष्णु आंवले के पेड़ की जड़ में रहते हैं.
आंवला, केसर या हल्दी का दान करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है. भगवान विष्णु को पीला रंग पसंद है इसलिए पीले रंग के कपड़े पहनने से व्रत का पूरा फल मिलता है. इस एकादशी पर केला, केसर या हल्दी का दान करना उत्तम माना जाता है. साथ ही आंवले का दान भी करना चाहिए.
एकादशी पर गंगाजी में स्नान करना चाहिए. यदि गंगाजी न जा सकें तो साधारण जल में गंगा जल की कुछ बूंदे और आंवला डालकर स्नान करने का भी महत्व है. इससे पापों से मुक्ति मिलती है. आमलकी एकादशी पर आंवले का उबटन भी लगाना चाहिए.
इस उपाय से अशुभ प्रभाव रहता है दूर
रंगभरी एकादशी पर भगवान शिव की विधिवत पूजा अर्चना करें और 21 बेलपत्र पर सफेद चंदन लगाकर अर्पित करें. इसके साथ ही गुलाल अबीर भी अर्पित करें और फिर शिव चालीसा का पाठ करें. ऐसा करने से ग्रह-नक्षत्र का अशुभ प्रभाव दूर होता है और जीवन में स्थिरता बनी रहती है.
इस उपाय से सौभाग्य में होती है वृद्धि
एकादशी का व्रत करने का कई गुणा फल प्राप्त होता है. इस दिन आंवले के वृक्ष की पूजा करें और नौ परिक्रमा करके गुलाल अर्पित करें. इसके साथ आंवले के वृक्ष के नीचे ही विष्णु सहस्रनाम स्तोत्र का पाठ करें और आंवला दान करें. ऐसा करने से सौभाग्य में वृद्धि होती है और जीवन में तरक्की के योग बनते हैं.
व्रत रखने का समय
रंगभरी एकादशी 2 मार्च 2023 को सुबह 6 बजकर 39 मिनट से होगी और एकादशी तिथि का समापन 3 मार्च 2023 को सुबह 9 बजकर 12 मिनट पर होगा. हिंदू धर्म में व्रत उदयातिथि को ध्यान में रखते हुए रखा जाता है. ऐसे में रंगभरी एकादशी व्रत 3 मार्च 2023 को रखा जाएगा.
शास्त्रों के अनुसार जो तिथि सूर्योदय के साथ शुरू होती है, उसका प्रभाव पूरे दिन रहता है. फिर चाहे उस दिन कोई दूसरी तिथि क्यों न लग जाए. जैसे कि 3 मार्च 2023 को रंगभरी एकादशी 9.12 बजे खत्म हो जाएगी, लेकिन इसका प्रभाव पूरे दिन रहेगा.
