रिक्टर पैमाने पर 7.8 की तीव्रता वाले भूकंप से दोनों देश दहल उठे. यहीं नहीं, इसके कुछ ही घंटों भीतर 7.6 और 6.0 तीव्रता के दो और भूकंप भी आए. इस आपदा में 4000 से ज्यादा मौत हो गईं, जबकि 10 हजार से ज्यादा लोग जख्मी हो गए. तुर्किये में 2,316 और सीरिया में 1999 से अधिक लोग मारे गए हैं.

तुर्की की आपदा एजेंसी के मुताबिक ये भूकंप स्थानीय समयानुसार दोपहर 1 बजकर 24 मिनट में आया. इस भूकंप का केंद्र खरामनमारस प्रांत का एलबिस्टन जिला ही था. वहीं,तुर्की में भूकंप से मरने वालों का आंकड़ा 912 तक पहुंच गया है. इसमें सीरिया के आंकड़े जोड़ दें तो ये बढ़कर 1300 तक पहुंच गया है. वहीं, 5,384 लोगों के घायल होने की खबर है. भारत, नाटो और यूरोपियन यूनियन समेत 45 देशों ने मुसीबत की इस घड़ी में मदद का हाथ बढ़ाया है. तुर्की सरकार ने लेवल चार अलार्म की घोषणा की है. साथ ही अंतरराष्ट्रीय मदद की गुहार लगाई है.

प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार राहत सामग्री के साथ NDRF और मेडिकल टीमों के खोज और बचाव दलों को तुरंत तुर्की सरकार के समन्वय में भेजा जाएगा. विशेष रूप से प्रशिक्षित डॉग स्क्वॉड और आवश्यक उपकरणों के साथ 100 कर्मियों वाली NDRF की 2 टीमें भूकंप प्रभावित क्षेत्र में जाने के लिए तैयार हैं. टीमें भूकंप प्रभावित क्षेत्रों में रेसक्यू और सर्च ऑपरेशन चलाएगी. पीएमओ के मुताबिक आवश्यक दवाओं के साथ प्रशिक्षित डॉक्टरों और पैरामेडिक्स के साथ मेडिकल टीमें भी तैयार की जा रही हैं. राहत सामग्री तुर्की सरकार और अंकारा में भारतीय दूतावास व इस्तांबुल में महावाणिज्य दूतावास के समन्वय से भेजी जाएंगी.
पीएम नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर तुर्की भूकंप पर अपना दुख जताया. वहीं, बेंगलुरु में चल रहे इंडिया एनर्जी वीक 2023 को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा था, इस समय तुर्की में आए भूकंप पर हम सभी की दृष्टि बनी हुई है. कई लोगों की मृत्यु और काफी नुकसान की खबरें हैं. तुर्की के आसपास के देशों में भी नुकसान की आशंका है. भारत भूकंप पीड़ितों की हर संभव मदद के लिए तत्पर है. इसी के तहत एनडीआरफ की टीम और विेशेष प्रशिक्षित डॉग स्क्वॉड को तुर्किये के लिए रवाना किया गया.
