हेमंत कश्यप– जगदलपुर शहर के पंचपथ चौक के पास रहने वाले ब्राह्मण स्वर्णकार परिवार के घर गणतंत्र दिवस के दिन 1950 में लगाया गया एक बल्ब 73 वर्षों से लगातार रोशनी दे रहा है. इस आवास के 53 वर्षीय मालिक अनिल दास प्रति शाम को दीया बत्ती के समय इस बल्ब को जला देव स्तुति करते हैं.
ब्राम्हण स्वर्णकार परिवार के लिंगराज दास ने वर्ष 1950 में आठ कमरों वाला पक्का आवास बनवाया और सभी जगह मेड इन इंग्लैंड बल्ब लगवाया था. स्व.लिंगराज दास के ससत्तर वर्षीय पुत्र दयानिधि दास बताते हैं कि बिजली फिटिंग के बाद उनके पिता ने दस रूपये में एडिसन कंपनी का चालीस वाट का दस बल्ब खरीदा था. उन दिनों भारत में बल्ब नहीं बनता था. 26 जनवरी 1950 को गृह प्रवेश किया गया था. खरीदे गए उन 10 बल्बों में से एक बल्ब आज भी जल रहा है. बल्ब काफी पुराना है इसलिए इसे हर शाम दीया बत्ती के समय ही जलाया जाता है. उन्होंने यह भी बताया कि बल्ब चोरी न हो जाए इसलिए उसके ऊपर ताले वाली जाली लगी है. चाबी खो जाने के कारण बल्ब की सफाई नहीं हो पा रही है.

क्या कहते हैं अधिकारी– घर की वायरिंग सही हो. विद्धुत सप्लाई स्थिर हो. मजबूत फिलामेंट वाला गुणवत्ता युक्त बल्ब हो, तो कोई भी बल्ब लंबे समय तक प्रकाश दे सकता है. पुष्पा वर्मा, सहायक अभियंता(डिस्ट्रीब्यूशन), जगदलपुर.
अनिल ही जलाते हैं बल्ब- ब्राम्हण स्वर्णकार परिवार के पुरोधा स्वर्गीय लिंगराज दास ने वर्ष 1950 में बल्ब खरीदे और जलाते रहे. उनके बाद पुत्र दयानिधि दास (76) वर्ष 2001 तक यह बल्ब नियमित जलाते रहे. उम्र दराज होने के कारण अब उनके पुत्र अनिल दास (53) ही प्रतिदिन इस पुराने बल्ब को दिया बत्ती के समय प्रतिदिन जलाते हैं.
