‘ऐ मेरे वतन के लोगों’ के इतिहास से रूबरू हुए लोग
दुर्ग/रिसाली- माँ हिंगलाज सेवा समिति एवं छत्तीसगढ़ आदिवासी विकास परिषद शाखा दुर्ग के संयुक्त तत्वावधान में रिसाली सेक्टर स्थित संविधान चौक में स्वतंत्रता दिवस का आयोजन हर्षोल्लास और देशभक्ति के महौल में मनाया गया. कार्यक्रम में ध्वजारोहण के बाद राष्ट्रगान हुआ और उपस्थित जनसमूह के बीच मिठाइयां बांटकर स्वतंत्रता दिवस की बधाई दी गई.

छत्तीसगढ़ आदिवासी विकास परिषद के प्रदेशाध्यक्ष और कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के. आर. शाह ने कहा कि कालजयी देशभक्ति गीत “ऐ मेरे वतन के लोगों” के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डाला. यह गीत किसी फिल्म के लिए नहीं बल्कि 1962 के भारत-चीन युद्ध में शहीद हुए वीरों की स्मृति में सरकार के आग्रह पर रचा गया था. कवि प्रदीप द्वारा लिखे गए इस गीत को 27 जनवरी 1963 को दिल्ली के नेशनल स्टेडियम में सुर सम्राज्ञी लता मंगेशकर ने पहली बार लाइव गाया था, जिसे सुनकर तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की आंखें भी नम हो गई थीं.

चंद्रकला तारम (प्रदेश उपाध्यक्ष) ने कविता पाठ के जरिए आजादी के आंदोलन में सर्वस्व न्योछावर करने वाले पुरखों और शहीदों को नमन किया.
ज्योति ध्रुव (अध्यक्ष) ने स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं देते हुए समाज में आपसी सौहार्द और एकजुटता का संदेश दिया.
चंद्रभान सिंह ठाकुर (जिला अध्यक्ष) ने जिम्मेदार नागरिक की भूमिका रेखांकित करते हुए समाज के अंतिम व्यक्ति तक रोटी, कपड़ा, मकान, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा पहुंचाने का आह्वान किया.
अवी मरकाम ने वर्तमान परिदृश्य में देश के युवाओं के सामने खड़ी प्रमुख चुनौतियों और उनके समाधान पर अपने विचार रखे.
रामजी ठाकुर एवं कमलेश हिरवानी ने सामाजिक एकजुटता को राष्ट्र की असली ताकत बताया और कठिन संघर्षों से मिली आजादी के सम्मान व देश का मान बढ़ाने का संकल्प दिलाया.
कार्यक्रम का सफल मंच संचालन अध्यक्ष दिनेश्वरी भुआर्य ने किया. समारोह में अश्लेष मरावी, डालिया ढाले, नेहरु परिहार, पतिराम ठाकुर, अशोक ध्रुव, डी.एस. नेताम, घनश्याम साहू, दिलीप दामले, प्रतिमा दामले, शिक्षा दामले, मानकुवर, थानेश्वर प्रसाद ठाकुर, गजेंद्र वर्मा, राज नारायण, रेखा मंडावी, पेमीन ठाकुर, पार्वती ठाकुर, अर्चना बारले, अनीता साहू, और मंजूलता नेताम सहित बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे.



