अवैध प्लाट में दुर्ग के दलाल सक्रिय
जनप्रतिनिधि और सरपंच की है मिलीभगत
गजेन्द्र, भिलाई : शहर में खाली पड़ी जमीन पर अवैध कब्जे और प्लाटिंग की शिकायतें लगातार मिल रही है. इसके बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हो रही है. इससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहा है. अवैध प्लाटिंग करने वालों को किसका संरक्षण मिल रहा है? लगातार शिकायत के बाद भी अवैध कब्जे पर कोई कार्रवाई नहीं होने से कहीं न कहीं पैसों का लेन-देन कर संरक्षण देने की अशंका हैं.

जिले में अवैध प्लाटिंग के मामले बढ़े है. हालात ये है कि दिनों-दिन शहर के आउटर से लेकर गांव तक बिना अनुमति व ले-आउट एप्रूवल के कृषि भूमि पर 100 से ज्यादा जगहों पर अवैध प्लाटिंग किया जा रहा है. दुर्ग और इसके आसपास के क्षेत्रों में अवैध प्लाटिंग का खेल जोरों से चल रहा है.
करंजा भिलाई में अवैध प्लाटिंग
करंजा भिलाई में सड़क से लगे खेतों में अवैध प्लाटिंग का काम धड़ल्ले से चल रहा है. यह काम जनप्रतिनिधि और सरपंच के मिलीभगत के कारण चल रहा है. अवैधानिक कारोबार से शासन को करोड़ों रुपए के राशि राजस्व को क्षति हो रही है. प्राप्त जानकारी के अनुसार दुर्ग से धमधा मार्ग पर करंजा भिलाई नामक गांव स्थित है, मुख्य मार्ग से लगे इस गांव में सड़क की दोनों तरफ की जमीनें तेजी से बिक रही है.

इस जमीनों को कॉलोनाइजर और दलाल मिलकर छोटे-छोटे टुकड़ों में बेचकर मोटी रकम वसूल रहे हैं, जबकि इन जमीनों को इस तरह बेचना गैरकानूनी है. इसमें पटवारी, सरपंच और राजस्व अधिकारियों की मिलीभगत है. ग्रामीण बताते हैं कि जमीन बेचने का क्रम इसी तरह जारी रहा तो आने वाले 4 सालों में गांव की खेती योग्य जमीन भी बिक जाएगी.
5 डिसमील की छूट से बढ़े मामले
सरकार ने 5 डिसमिल से छोटे प्लाट की रजिस्ट्री पर बंदिश हटा ली है. इसके बाद से अवैध प्लाटिंग के मामलों में जबरदस्त तेजी आई है. इसके साथ ही छोटे प्लाटों की खरीदी-बिक्री भी बढ़ी है. पिछले कई महीनों से सामान्य की तुलना में 3 से 4 गुना रजिस्ट्री हो रही है.
