खत्म होगा प्लाट पर प्लाट बैठाने का खेल, नहर, नाली, एनीकट निर्माण में मिलेगी मदद
छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय देश का पहला विश्वविद्यालय है जिसके पास एक ऐसा अनमैन्ड एरियल व्हीकल (मानव रहित विमान) है जो आकाश से जल, जंगल और जमीन की रियल टाइम डिजिटल मैपिंग करने में सक्षम है. इस यूएवी की मदद से छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय राज्य के व्यवस्थित विकास में एक बड़ी भूमिका निभाने जा रहा है. आने वाले समय में सरकार के सभी विभागों के पास न केवल सभी इलाकों की हाई-डेन्सिटी इमेज होगी बल्कि हर वास्तविकता के धरातल पर हो रहा प्रत्येक परिवर्तन और विकास रिकार्ड किया जा सकेगा.


सरकार वर्षों की मेहनत और करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद भी जिन नक्शों को सटीक ढंग से नहीं बनवा पाती, वह कार्य अब यह एसयूवी करेगा. सरकार सीएसवीटीयू को इसके लिए शुल्क का भुगतान भी करेगी. इस तरह सीएसवीटीयू इस विमान की लागत को कुछ ही वर्षों में निकाल लेगा. इसके साथ ही विवि के पास उपलब्ध विशेषज्ञता का लाभ सरकार सहित सभी पक्षों को मिलेगी. सीएसवीटीयू के पास उपलब्ध अल्ट्रा हाई-रेजोल्यूशन यूएवी मैपिंग सिस्टम 5000 मीटर की ऊंचाई से जमीन की ऐसी तस्वीर लेने में सक्षम है जिसमें मकान, दीवारें, पेड़-पौधे और नालों तक को साफ देखा जा सकता है. सैटेलाइट तस्वीरों के मुकाबले इसकी तस्वीरें कई गुना बेहतर हैं. यह यूएवी प्रति सेकण्ड तीन से पांच एचडी क्वालिटी के त्रिआयामी चित्र खींचने में सक्षम है. लगभग ढाई करोड़ रुपए की लागत से तैयार इस यूएवी को भारत सरकार के सिविल एविएशन विभाग की अनुमति प्राप्त है जिसके तहत इसका उपयोग प्रदेश के किसी भी क्षेत्र में बिना रोकटोक के किया जा सकता है.
अब तक की उपलब्धियां
इस यूएवी का उपयोग सभी भौगोलिक परिस्थितियों की रियल टाइम मैपिंग के लिए किया जा रहा है. जंगल, पहाड़, शहर, खेत, खदान का इससे वास्तिवक नक्शा तैयार किया जा रहा है. इससे भूमि का वास्तविक सीमांकन किया जा सकता है जो राजस्व विभाग के लिए एक वरदान है. जमीन की ढाल, भूजल की उपलब्धता, “नरवा” योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए इस यूएवी द्वारा उपलब्ध कराए गए नक्शे बड़े काम के साबित हो सकते हैं. केन्द्र की काड़ा योजना के तहत बिलासपुर जिले के मस्तूरी में छत्तीसगढ़ की पहली भूमिगत पाइप सिंचाई सुविधा का सर्वे इसी मानव रहित विमान से किया गया. इसी के साथ ही पाटन ब्लॉक में बरवा रेस्टोरेशन योजना का डिजाइन बनाया गया. यूएवी ने इस रेस्टोरेशन योजना के अंतर्गत खाका तैयार करने का कार्य महज एक घंटे में कर दिया. अगर पारंपरिक नाप-जोख विशेषज्ञों को लगाया जाता तो इस कार्य को करने में छह महीने तक का समय लग सकता था. धमतरी और बालोद जिले में भी जल जीवन मिशन के तहत गांवों में पेयजल वितरण का कार्य भी किया जा रहा है. विश्वविद्यालय कन्सलटेंसी के तहत कन्सलटेंसी से निरंतर विश्वविद्यालय को आय हो रही है.
इन क्षेत्रों में होगा प्रयोग
राजस्व विभाग – भूमि सर्वेक्षण एवं भूमि उपयोग, संपत्तिकर आकलन, किसी भी शहर या कस्बे के आधार नक्शे का निर्माण इसके सहयोग से किया जा सकता है. यह संपत्ति की सीमा का मापन और सीमांकन सटीक ढंग से करने में सक्षम है. इसकी मदद से मौजूदा भूमि रिकार्ड को अपडेट किया जा सकता है. इसकी तस्वीरें अवैध कब्जों के बारे में भी ठोस जानकारी दे सकती है.
वन विभाग – यह एसयूवी वनों तथ वन क्षेत्रों से जुड़ी विभिन्न डाटा का संग्रह कर सकता है. इसमें पौधों की वृद्धि और मानचित्रण, छोटे और बड़े नर्सरी में औसत पेड़ों की आकाशीय गणना, वृक्ष घनत्व एवं मानचित्रण, मौजूदा वनक्षेत्र की मैपिंग और सीमांकन जैसे कार्यों को जीपीएस-मैप के साथ सटीक रूप से तैयार किया जा सकता है.
लोक निर्माण विभाग – लोकनिर्माण एवं शहरी विकास विभाग के लिए यह विकास गतिविधियों पर अपनी पैनी नजर रख सकता है. मास्टर प्लान के क्रियान्वयन एवं डिजाइनिंग में सहयोग कर सकता है. भूमि उपयोग एवं लैंड-कवर की एचडी इमेजिंग करने में भी यह सक्षम है. इसकी मदद से 3डी लैंडटेरेन मॉडल का निर्माण आसानी सेकिया जा सकता है. सड़क निर्माण के लिए संरेखण, कटिंग-फिलिंग की गणना एवं निर्माण कार्यों की निगरानी के लिए इस तकनीक का उपयोग किया जा सकता है.
जल संसाधन विभाग – सरकार की फ्लैगशिप योजना नरवा-गरुवा-घुरवा-बाड़ी में से नरवा योजना की सफलता भूमि संरचना के सटीक आकलन पर टिका है. वर्षा क्षेत्र, कुल जल-संग्रहण, डूबान क्षेत्र की जियो-स्पेशल मैपिंग की सहायता से नए बांधों, एनिकटों, पुल-कल्वर्ट निर्माण के लिए स्थल का चयन सुगमता से किया जा सकता है. नहरों के संरेखण का काम आसान हो सकता है. यह फसल अनुसार जल की उपलब्धा का भी पता लगता है. नदी, घाटी, बांध, जलाशय, उच्च बांध, मध्यम बांध, लघु बांध, लघु सिंचाई योजना की सटीक इंजीनियरी गणना के लिए ये नक्शे बेहद मददगार हैं.
कृषि विभाग – छत्तीसगढ़ एक कृषि प्रधान राज्य है. कृषि विभाग में इसकी मदद से कृषि योग्य भूमि का निर्धारण किया जा सकता है. बाढ़, सूखा, महामारी, फसलों को हुए नुकसान का आकलन इस प्रणाली द्वारा सटीक ढंग से बहुत कम समय में किया जा सकता है. भूमि की स्थिति और गुणवत्ता के आधार पर फसल चक्र परिवर्तन की योजना सफलतापूर्वक बनाई जा सकती है.
पीएचई विभाग – लोक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के लिए भी यह तकनीकी बड़े काम की साबित हो सकती है. पाइप लाइन लेआऊट, सीवरेज और ड्रेनेज सिस्टम मान-चित्रण, संरेखण के लिये यह उपयोगी है. ग्रामीण जल निकासी क्षेत्र उपचार की योजना और प्रबंधन को इससे आसान बनाया जा सकता है. तालाबों की मैपिंग और क्षेत्र की गणना इस तकनीक से सटीक ढंग से की जा सकती है.
खनिज विभाग – खनन विभाग के लिए भी यह महत्वपूर्ण डाटा का संग्रह कर सकता है. इसमें खदानों का क्षेत्र ज्ञात करना, स्टॉक पाइल भंडारण का अवलोकन, 3डी मैपिंग, खनन क्षेत्र में एक निश्चित अवधि में वाल्यूमेट्रिक विश्लेषण करना, मुरम और लौह अयस्क खदानों का मानचित्रण तथा डिजिटल कन्टृर पद्धति से मात्रा का अवलोकन करना संभव है.
बिजली विभाग – विद्युत प्रदायगी विभाग के लिए यह तकनीक पावर ट्रांसमिशन लाइनों की 3डी मैपिंग से लेकर टावरों के लिए उचित स्थल का चयन, सब-स्टेशन निर्माण हेतु स्थान का निर्धारण करने में महति योगदान दे सकता है.
यूएवी का कार्यक्षेत्र एक नजर में–
– मास्टर प्लान डिजाइनिंग व क्रियान्वयन
– सभी प्रकार की जमीन की सटीक मैपिंग
– सड़क निर्माण में ऑप्टिमम एलाइनमेंट के लिए
– बांध स्थल की पहचान, डूबान क्षेत्र चिन्हांकन
– वर्षा जल प्रबंधन, जल निकासी उपचार (नरवा योजना)
– जल आवश्यकता, एनीकट निमार्ण मैप
– कृषि योग्य भूमि का निर्धारण
– सीवरेज व ड्रेनेज सिस्टम का सटीक मानचित्र
– ग्रामीण सड़क योजनाओं की जंाच व गुणत्ता परख
– बाढ़, सूखा, महामारी, फसलों के नुकसान का आंकलन
इस यूएवी में क्या है खास
अल्ट्रा हाई-रेजोल्यूशन यूएवी मैपिंग सिस्टम सामान्य ड्रोन्स से काफी अलग हैं. इसकी बैटरी 90 मिनट का बैकअप देती है. प्रति घंटे यह 60-70 किलोमीटर की यात्रा कर सकता है. यह 5000 मीटर तक की ऊंचाई से एकदम साफ तस्वीरें खींच सकता है. डिफरेंशल ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (डीजीपीएस) से लैस इसका कैमरा किसी भी स्थान के सटीक को-आर्डिनेट्स के साथ तस्वीरें ले सकता है. सीएसवीटीयू काफी समय से प्रयास कर रहा था कि सरकार उसकी विशेषज्ञता का लाभ अपने काम काज में भी ले. इससे न केवल यूनिवर्सिटी के पास उपलब्ध विशेषज्ञता का सद-उपयोग होगा बल्कि राज्य को सटीक डेटा मिलेगा. इसका उपयोग सरकार के लगभग सभी महत्वपूर्ण विभागों में किया जा सकता है.
ये हैं सटीक मैपिंग के फायदे
जल, जंगल, जमीन का सटीक नक्शा उपलब्ध होने पर सही जगहों पर स्ट्रक्चर डिजाइन किये जा सकते हैं. छोटे नदी-नालों का आंकलन कर सतह जल के साथ ही भूगर्भ जल की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकती है. सड़क, तालाब, डबरी आदि के लिए उपयुक्त स्थलों को चिन्हांकित किया जा सकता है. राजस्व नक्शे के साथ भूमि का नक्शा और खसरा वास्तविक रकबे के साथ चिन्हित किये जा सकते हैं. शहरी क्षेत्रों में कालोनियों का निर्माण एक सतत् चलने वाली प्रक्रिया है. इसलिए पारम्परिक नक्शे इनका सही चित्रण नहीं कर पाते. योजनाएं पुराने नक्शे के आधार पर बनती हैं जबकि जमीनी हालात बदल चुके होते हैं. यूएवी की मदद से नक्शा तत्काल अपडेट किया जा सकता है. वन क्षेत्रों में पेड़ों की अवैध कटाई, वनों की वास्तविक सीमा, वन्यप्राणियों के लिए उपलब्ध पानी के स्रोत आदि पर नजर रखी जा सकती है. इससे जंगल की जमीन पर हो रहे अवैध कब्जे की भी खबर जुटाई जा सकती है.
यहां भी हो सकता है चमत्कार
हरियाणा में 2017-18 में डायरिया फैला तो यूएवी की मदद से शहर का सर्वे कराया गया. यूएवी ने तत्काल बिना ढक्कन वाली पानी टंकियां, मोहल्ले और अन्य स्थानों पर जहां भी गंदे पानी का जमाव है, उनका नक्शा खींचकर दे दिया. प्रशासन के लिए तत्काल कदम उठाना संभव हो पाया. यह चमत्कार यहां भी हो सकता है.
