प्रोटोकॉल उल्लंघन पर भड़कीं महापौर, अफसर केबिन में बैठे रहे, बाहर उड़ी बंधक बनाने की चर्चा
दुर्ग- दुर्ग नगर निगम में शुक्रवार को उस समय एक बड़ा हाई वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला, जब शहर की प्रथम नागरिक यानी महापौर अलका बाघमार सरकारी कार्यक्रमों में अपनी उपेक्षा और प्रोटोकॉल के उल्लंघन से नाराज हो गईं। नाराजगी इस कदर बढ़ी कि महापौर ने आरईएस (RES) और मंडी बोर्ड के तीन बड़े अफसरों को अपने दफ्तर में करीब 3 घंटे तक बैठाए रखा। इस बीच बाहर यह अफवाह उड़ गई कि अफसरों को बंधक बना लिया गया है, जिसके बाद पुलिस बल को मौके पर पहुंचना पड़ा।
उपेक्षा और NOC न मिलने से थीं नाराज
दरअसल, नगर निगम की सीमा के भीतर आरईएस, पीडब्ल्यूडी, मंडी बोर्ड और सिंचाई विभाग द्वारा विभिन्न निर्माण कार्य कराए जा रहे हैं। महापौर का आरोप है कि इन कार्यों के भूमिपूजन और उद्घाटन कार्यक्रमों में उन्हें लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। बुलावा मिलने पर जब आरईएस के ईई जितेंद्र कुमार मेश्राम, एसडीओ सीके सोने और मंडी बोर्ड के एसडीओ प्रवीण पांडेय उनके पास पहुंचे, तो महापौर ने सीधे सवाल दागे— “निगम के स्वीकृत कार्यों की एनओसी (NOC) क्यों नहीं दी जाती? मुझे किसी भी कार्यक्रम की पूर्व सूचना क्यों नहीं दी जाती? आप किसके इशारे पर प्रोटोकॉल का उल्लंघन कर रहे हैं?”
अफसर केबिन में बैठे रहे, बाहर उड़ी ‘बंधक’ बनाने की चर्चा
जब अफसरों से कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला, तो महापौर ने सख्त लहजे में कह दिया कि जब तक जवाब नहीं मिलता, आप यहीं बैठें। इसके बाद अधिकारी खुद अंदर केबिन में चर्चा करने चले गए। इसी दौरान बाहर यह चर्चा फैल गई कि अफसरों को बंधक बना लिया गया है।
पुलिस बल के साथ पहुंचे आला अधिकारी
बंधक बनाए जाने की सूचना मिलते ही एएसपी सुखनंदन राठौर, सीएसपी हर्षित मैहर, टीआई नवीन सिंह राजपूत और राजकुमार लहरे भारी पुलिस बल के साथ तुरंत नगर निगम दफ्तर पहुंचे और अफसरों को बाहर ले गए। हालांकि, इस मामले पर महापौर का कहना है कि उन्होंने किसी को बंधक नहीं बनाया था, बल्कि सिर्फ यह पूछने के लिए बुलाया था कि जनप्रतिनिधियों को सरकारी कार्यक्रमों की सूचना क्यों नहीं दी जा रही है। इस दौरान मीडिया भी वहां मौजूद रही।
क्या कहता है नियम (प्रोटोकॉल)?
सामान्य प्रशासन विभाग के नियमों के अनुसार, किसी भी सार्वजनिक या सरकारी कार्यक्रम में मुख्यमंत्री, मंत्री, सांसद और विधायक के ठीक बाद महापौर का नाम आता है। नियमों में किसी पार्टी पदाधिकारी के प्रोटोकॉल का जिक्र नहीं होता है। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि हर सरकारी कार्यक्रम के शिलापट्ट या आमंत्रण में मेयर से पहले जिलाध्यक्ष या अन्य नेताओं का नाम किसकी सहमति से लिखा जा रहा है?
