ED–CBI जांच की मांग, वायरल चैट्स से बढ़ा विवाद
छत्तीसगढ़ के पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग से जुड़े कथित “चंदा प्रकरण” में नया मोड़ आ गया है.सोशल मीडिया पर वायरल कुछ कथित व्हाट्सऐप चैट्स के सामने आने के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया है.और अब ED व CBI जांच की मांग भी उठने लगी है.
क्या है पूरा मामला?
वायरल चर्चाओं में दावा किया जा रहा है कि वर्ष 2011 में भर्ती हुए कुछ अभियंताओं—जिन्हें वरिष्ठता सूची में पीछे बताया जा रहा है—ने एक व्हाट्सऐप ग्रुप बनाकर न्यायालयीन प्रक्रिया के लिए विभिन्न जिलों से चंदा एकत्र किया.
इन दावों में बिलासपुर ग्रामीण यांत्रिकी सेवा में पदस्थ यशवंत राज मंडलकर की भूमिका प्रमुख बताई जा रही है.आरोप है कि कथित रूप से एकत्र की गई राशि उनके बैंक खाते में जमा की गई.
इसके अलावा गरियाबंद, दुर्ग, कोरबा और बलौदाबाजार जिलों से जुड़े कुछ अभियंताओं के नाम भी आर्थिक सहयोग देने के संदर्भ में चर्चा में हैं। हालांकि इन सभी दावों की अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
उठ रहे हैं बड़े सवाल ?
क्या कथित चंदा संग्रह की वैधानिकता की जांच होगी?
क्या संबंधित बैंक खातों और लेन-देन की फॉरेंसिक ऑडिट कराई जाएगी?
क्या विभागीय या पुलिस स्तर पर प्राथमिक जांच शुरू की जाएगी? यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो क्या मामला ED या CBI को सौंपा जाएगा?
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि न्यायालय में याचिका दायर करना अवैध नहीं है.लेकिन यदि चंदा संग्रह में नियमों का उल्लंघन, विभागीय आचरण संहिता का भंग या आपराधिक साजिश के तत्व सामने आते हैं, तो मामला गंभीर हो सकता है.
नियुक्ति प्रक्रिया पर भी उठे प्रश्न
इस विवाद ने 2011 की भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं.यदि उस समय किसी प्रकार की अनियमितता हुई थी तो
क्या तत्कालीन अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी?
क्या 14 वर्षों से सेवा दे रहे कर्मचारियों को ही अंतिम दंड भुगतना होगा?
67 परिवारों का भविष्य अधर में
संभावित कार्रवाई या बर्खास्तगी की चर्चा के बीच67अभियंताओं और उनके परिवारों मेंअसमंजस की स्थिति है. कई अभियंता अब अधिकतम आयु सीमा पार कर चुके हैं. जिससे अन्य सरकारी नौकरियों के अवसर भी सीमित हो गए हैं.कुछ परिवारों ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि यदि उनके साथ अन्याय हुआ है.तो वे CBI जांच की मांग करेंगे, ताकि सच्चाई सामने आए और कथित षड्यंत्रकर्ताओं पर सख्त कार्रवाई हो.उन्होंने संबंधित खातों की जांच ED और CBI से कराने की भी मांग की है.
प्रशासन की चुप्पी, पारदर्शी जांच की मांग.फिलहाल विभाग या संबंधित अधिकारियों की ओर से विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है.पूरे प्रकरण में निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग तेज हो रही है. ताकि तथ्यों के आधार पर जिम्मेदारी तय हो सके और किसी भी निर्दोष व्यक्ति के साथ अन्याय न हो.
जांच एजेंसियों की भूमिका विभागीय कार्रवाई और सरकार का रुख आने वाले दिनों में इस मामले की दिशा तय करेगा.
