छत्तीसगढ़ में तो मनरेगा दो साल में दम तोड़ चुकी है

मनरेगा में पिछले दो साल में कितने मजदूरों को काम दिया सरकार सूची जारी करे
रायपुर- मनरेगा में रोजगार देने में छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार फिसड्डी साबित हुई है. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि किस नैतिकता से मुख्यमंत्री मनरेगा कानून को बदलने की पैरोकारी कर रहे है. केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा कानन से महात्मा गांधी का नाम हटाकर तथा मनरेगा को कानून से बदल कर योजना बनाकर केंद्र सरकार ने मनरेगा को समाप्त करने की साजिश रचा है. छत्तीसगढ़ में तो भाजपा की सरकार बनने के बाद मनरेगा में काम तो लगभग बंद किया जा चुका है. मुख्यमंत्री मनरेगा बंद होने के कारण प्रदेश के मजदूर पलयान कर दूसरे प्रदेश चले गये है.
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि मनरेगा के नये स्वरूप वीबी जी राम जी में मोदी सरकार ने केंद्रांश को घटाकर केंद्रांश और राज्यांश का औसत 60-40 कर दिया है. पहले यह योजना 100 प्रतिशत केंद्र पोषित योजना थी. जब केंद्र सरकार 100 प्रतिशत राशि देती थी तब तो राज्य सरकारें इस योजना को लागू करने में कोताही बरतती थी, अब जब राज्य को 40 प्रतिशत राशि वहन करना होगा तब तो राज्य सरकारें इसको लागू करने में और कोताही बरतेंगी.
श्री बैज ने कहा कि भाजपा की सरकारों की दुर्भावना के चलते ही गरीब परिवारों के रोजगार के अधिकार की यह महत्वपूर्ण योजना छत्तीसगढ़ में दम तोड़ चुका है. पिछले दो साल से जब से भाजपा की सरकार आई है पूरे प्रदेश में मनरेगा अघोषित तौर पर बंद कर दिया गया है. मनरेगा रोजगार की कानूनी गारंटी है कोई भी सरकार मनरेगा के काम को बंद नहीं कर सकती है, लेकिन छत्तीसगढ़ में 70 प्रतिशत से अधिक गांव में मनरेगा के काम बंद कर दिए गए. मजदूरों के सामने रोजी-रोटी की समस्या खड़ी हो गई है, लोग पलायन के लिए मजबूर है. पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के दौरान छत्तीसगढ़ में लगभग 18 करोड़ कार्य दिवस हर साल सृजित किए जाते थे, भाजपा की सरकार आने के बाद से इस महत्वपूर्ण योजना पर ग्रहण लग गया है. सरकार से यह मांग है कि बताएं कि प्रदेश में कितने स्थान पर मनरेगा का काम चल रहा है? विगत दो साल में प्रदेश में मनरेगा के तहत दिए गए रोजगार की सूची जारी करे.
उन्होंने कहा कि कांग्रेस की यूपीए सरकार ने महात्मा गांधी नेशनल रोजगार गारंटी (मनरेगा) के रूप में रोजगार को कानूनी गारंटी दिया था लेकिन केंद्र की मोदी सरकार और भाजपा की साय सरकार का नाम बदलकर बंद करने की साजिश कर रही है. मोदी सरकार मनरेगा को बंद करना चाहती है. मोदी सरकार के 11 सालों में मनरेगा को पर्याप्त बजट नहीं दिया. हर साल मनरेगा के बजट में 30 से 35 प्रतिशत की कटौती की गयी है. पिछले 11 वर्षों में मनरेगा की मजदूरी में न्यूनतम वृद्धि है, जिसके कारण मजदूर वर्ग की आय स्थिर हो गयी है तथा महंगाई लगातार बढ़ती जा रही है.
