राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ पर विद्युत कर्मियों ने अमर शहीदों को नमन कर गाया गीत

राजनांदगांव- छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड, राजनांदगाव क्षेत्र के शहर स्थित क्षेत्रीय प्रशासनिक भवन में राष्ट्रीय गीत वंदे मात्रम की 150 वीं वर्षगांठ के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का उद्बोधन सुना गया. इस अवसर पर राजनांदगांव क्षेत्र के कार्यपालक निदेशक शिरीष सेलट ने विद्युत कंपनी के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को राष्ट्रीय गीत वंदे मात्रम के उद्भव पर प्रकाश डालते हुए बताया कि वंदे मात्रम भारत का राष्ट्रीय गीत है, जिसने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. इसकी रचना 07 नवम्बर सन् 1875 को बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने संस्कृत और बंगाली भाषाओं के मिश्रण से की थी. उन्होंने इसे चिनसुरा में अपने आधिकारिक निवास के पास लिखा था. पहला सार्वजनिक गायन सन् 1896 वंदे मातरम को पहली बार एक राजनीतिक अवसर पर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सन् 1896 के कलकत्ता अधिवेशन में गाया गया था. इसे स्वयं रवींद्रनाथ टैगोर ने संगीतबद्ध कर गाया था.
कार्यपालक निदेशक शिरीष सेलट ने बताया कि स्वतंत्रता आंदोलन में भूमिका यह गीत जल्द ही स्वतंत्रता सेनानियों के लिए एक प्रेरणा स्रोत और एक रैली बन गया. 1905 में बंगाल विभाजन के विरोध में हुए स्वदेशी आंदोलन के दौरान यह गीत व्यापक रूप से लोकप्रिय हुआ और एक शक्तिशाली देशभक्ति नारे के रूप में इस्तेमाल किया गया. ब्रिटिश सरकार ने इस गीत को प्रतिबंधित कर दिया था, जिससे इसका उपयोग स्वयं में एक क्रांतिकारी कदम बन गया था. राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ पर पॉवर कंपनी के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने अमर शहीदों को नमन करते हुए वंदे मातरम का सामूहिक गान किया.
इस अवसर पर अधीक्षण अभियंता शंकेश्वर कंवर, के.सी. खोटे, कार्यपालन अभियंता एन. के. साहू, ए.डी. टंडन, आलोक दुबे, पब्लिसिटी ऑफिसर डी. एस. मंडावी, सहायक अभियंता जी. एन. देवांगन, हेमराज साहू, उषा साहू, शेषकुमारी साहू, नीरज देवांगन, एस.के. बक्शी, भावेश वाल्दे, अमरलाल चौहान, बी. एस. टेकाम, पी.आर.साहू सहित प्रशासनिक भवन स्थित समस्त कार्यालयों के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित हुए.
