DRM और SP दुर्ग के खिलाफ भी कार्यवाही की अनुशंसा

महिला आयोग ने तीन मामलों में भरण-पोषण का आदेश दिया
तीनो (आदिवासी) आवेदिकाओं की अलग-अलग एफ.आई.आर. दर्ज कर आयोग को रिपोर्ट प्रेषित करने को कहा गया.
रायपुर- छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डाॅ. किरणमयी नायक, ने बुधवार को छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग के कार्यालय रायपुर में महिला उत्पीड़न से संबंधित प्रकरणों पर सुनवाई की. आयोग की अध्यक्ष डाॅ. किरणमयी नायक की अध्यक्षता में प्रदेश स्तर पर 348 वी. एवं रायपुर जिले में 167 वी. जनसुनवाई की गई.
सुनवाई के दौरान एक ही प्रकार के तीन प्रकरण मे नारायणपुर जिले की तीन आवेदिकागणों के द्वारा शिकायत दर्ज कराया गया है कि दुर्ग रेल्वे स्टेशन मे बजरंग दल के तीन कार्यकर्ताओं के द्वारा आवेदिकागणों को मारपीट, गाली-गलौच और निजी अंगो के साथ छेड़छाड़ करते हुए, जातिसूचक अपशब्द कहे. आवेदिकागण का कहना है कि इस मामले मे पुलिस द्वारा एफ.आई.आर. दर्ज नही किया जा रहा था. उसके बाद आवेदिकागण अपनी शिकायत लेकर महिला आयोग पहुंचे. लगातार तीन सुनवाई हो चुकी है परंतु सूचना मिलने के बाद भी अनावेदकगण आयोग में अनुपस्थित रहे. एस.पी दुर्ग के द्वारा अनावेदकगणों को उपस्थित कराने मे लगातार लापरवाही बरता जा रहा है तथा जी.आर.पी थाने को डी.आर.एम. के अधीन बताया गया, जबकि डी.आर.एम वाले जी.आर.पी थाने को राज्य पुलिस के अधीन बता रहे है. दुर्ग रेल्वे की सी.सी.टी.वी. मांगने पर केवल एक ही गेट की फुटेज आयोग को पेन ड्राईव मे भेजा गया इससे यह पता चलता है कि डी.आर.एम. भी सबूत छुपाने मे अनावेदकगणों को मदद कर रहे है. इस पूरे मामले मे आयोग द्वारा कुछ बिंदु पर डी.जी.पी. को विशिष्ट रूप से पत्र भेजा जाएगा. जिसमें 15 दिवस के अंदर इन सभी आवेदिकाओं की अलग-अलग एफ.आई.आर दर्ज कराने तथा उसकी रिपोर्ट आयोग को 15 दिवस के भीतर प्रेषित करने को कहा जायेगा. यदि डी.जी.पी. द्वारा एफ.आई.आर दर्ज कर 15 दिन में रिपोर्ट प्रस्तुत ना करने पर आयोग तीनो प्रकरणों मे आवेदिकाओं को पुलिस प्रशासन से मुआवजा दिलाने के लिए राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग को पत्र भेजा जाएगा.
एक अन्य प्रकरण में आवेदिका 67 वर्षीय वृध्द महिला है और बीमार रहती है अपने पुत्री के साथ विगत् 2 साल से निवास कर रही है. आवेदिका का पति अनावेदक 70 वर्षीय वृध्द है और बैंक के रिटायर्ड कर्मचारी है उन्हे 36 हजार रू. मासिक पेंशन मिलता है. वर्तमान में वह अपने पुत्र के साथ निवास कर रहे है. आवेदिका को 2 साल से अपनी बेटी के घर छोड रखा है. बेटी अपनी मां(आवेदिका) का भरण-पोषण कर रही है. आवेदिका के पांव का ऑपरेशन तीसरी बार हुआ है और आवेदिका पूरी तरह से असहाय स्थिति में अपनी बेटी पर आश्रित है. आयोग की समझाईश पर अनावेदक(पति) आवेदिका को प्रति माह 15 हजार रू. भरण-पोषण देने के लिए तैयार हुआ. हर माह भरण-पोषण राशि नियमित रूप से आवेदिकाक े खाते में माह की 10 तारिख तक जमा किया जाने की सहमति अनावेदक ने दी, जिससे आवेदिका अपना इलाज और भरण-पोषण कर सकेगी.
एक अन्य प्रकरण में आवेदिका ने बताया कि अनावेदक उससे गाली-गलौच करता है. दोनो पक्षों के मध्य पूर्व में न्यायालय में सुलह हो चुकी है लेकिन अनावेदक द्वारा आवेदिका को फोन पर गाली-गलौच की जाती है. आयोग की समझाईश पर अनावेदक ने आवेदिका से माफी मांगी तथा भविष्य में किसी भी तरह का दुव्र्यवहार ना कियो जाने का आश्वासन दिया आयोग ने कहा कि यदि अनावेदक दुबारा गाली- गलौच या मारपीट कर आवेदिका को परेशान करता है तो आवेदिका अनावेदक के विरूध्द एफ.आई.आर. दर्ज करा सकेगी. इस निर्देश के साथ प्रकरण नस्तीबध्द किया गया.
बिना तलाक दिए अन्य महिला से दूसरा विवाह का मामला सुलझाया
अन्य प्रकरण में आवेदिका ने बताया कि अनावेदक (पति) ने उसे बिना तलाक दिए अन्य महिला से दूसरा विवाह कर लिया है. अनावेदक ने बताया कि उसे आवेदिका ने 3-4 साल पहले से छोड़ रखा है. आवेदिका ने बताया की न्यायालय मे उभय पक्ष के मध्य भरण-पोषण का मामला लंबित है. इस स्तर पर प्रकरण नस्तीबध्द किया गया.
एक अन्य प्रकरण में आवेदिका ने बताया कि अनावेदक गाली-गलौच कर मारपीट करता है. पूर्व में भी दोनो के मध्य थाने में शिकायत दर्ज हो चुकी है और अनावेदक जेल भी जा चुका है. आवेदिका के दो बच्चे भी है बच्चों के भरण-पोषण का खर्च भी अनावेदक द्वारा नहीं दिया जाता है. आयोग की समझाईश पर अनावेदक दोनो बच्चों के भरण-पोषण हेतु प्रति माह 5 हजार रू. भरण-पोषण देने तैयार हुआ. अनावेदक को समझाईश दी गई कि वह आवेदिका से मारपीट नहीं करेगा और आवेदिका दोनो बच्चों को लेकर दादा-दादी से मिलाने के लिए ले जा सकेगी. समझाईश के बाद प्रकरण नस्तीबध्द किया गया.
एक प्रकरण में आवेदिका ने शिकायत दर्ज करवायी की अनावेदक शराब का सेवन करके मारपीट करता है. पूर्व में समझौते के साथ उभय पक्ष साथ रह रहे थे, फिर सितंबर 2025 से दोना बच्चों के साथ आवेदिका मायके में निवासरत् है. क्योंकि अनावेदक शराब पीकर मारता है. आयोग की समझाईश पर अनावेदक ने स्वीकारा की वह शराब बंद कर अपना आचरण सुधारेगा व मारपीट नहीं करेगा और दोनो बच्चों के साथ रहना चाहता है. अनावेदक एस.ई.सी.एल में शहडोल में गार्ड के पद पर कार्य करता है. और उसे 40 हजार रू. वेतन मिलता है आयोग की समझाईश पर बच्चों के भरण-पोषण हेतु अनावेदक 15 हजार रू. देने के लिए तैयार हुआ आयोग के समक्ष अनावेदक ने 15 हजार रू. नगद आवेदिका को दिये. अनावेदक आयोग मे ही बीच-बीच में बच्चों से मिल सकेगा व प्रति माह 10 तारीख तक 15 हजार रू. आवेदिका को देगा. प्रकरण की निगरानी आयोग द्वारा किया जायेगा इस निर्देश के साथ प्रकरण नस्तीबध्द किया गया.
