जीरो के आगे जब तक कोई संख्या ना लगे, तब तक उसका कोई वैल्यूएशन नहीं होता- मुनि वीरभद्र

राजनांदगांव – विनय कुशल मुनि के सुशिष्य एवं 171 दिन तक उपवास का रिकॉर्ड बनाने वाले जैन मुनि वीरभद्र (विराग) ने कहा कि जीरो के आगे जब तक कोई संख्या नहीं लगती तब तक उसका कोई वैल्यूएशन नहीं होता. उन्होंने कहा कि इसी तरह सम्मान पाना है तो अपने भीतर गुणों का इतना विकास करो कि लोग स्वयं ही आपका सम्मान करने लगे.
मुनि श्री वीरभद्र (विराग) ने जैन बगीचे के नए हाल में अपने चातुर्मासिक प्रवचन में कहा कि तीर्थंकर की देशना कभी निष्फल नहीं होती. माता-पिता अपने बच्चों को मोबाइल देकर कहीं गलत तो नहीं कर रहे हैं, वे अपने बच्चों को गलत दिशा की ओर तो नहीं भेज रहे हैं! जीवन में एक बार कलंक लग गया तो फिर जीने का कोई औचित्य नहीं है. हमें इस पर ध्यान देना चाहिए कि हम किस तरह अपने बच्चों को दुर्गति से बचाकर सद्गति की ओर ले जायें. हम अपने उल्टे सीधे कर्मों द्वारा बहुत उत्पात मचाते हैं किंतु जब कर्मों का फल मिलेगा, तब क्या होगा? इससे बचने का एक ही रास्ता है, हमें परमात्मा का आश्रय लेना होगा. हमें उनके आदेशों और नियमों का पालन करना चाहिए.
मुनि श्री वीरभद्र (विराग) ने कहा कि आराधना करनी है तो अकेले करें, किसी के साथ नहीं. इससे आपको सफलता अवश्य मिलेगी. उन्होंने कहा कि मोक्ष भी अकेले को ही मिलता है, इसलिए आराधना भी अकेले करें. दवा की जरूरत हो तो दवा लाइए दुकान नहीं. मुनि श्री ने कहा कि हमें शब्दों का उपयोग बहुत ही सोच समझकर करना चाहिए. एक गलत शब्द अर्थ बदल कर रख देता है. उन्होंने कहा कि अर्थ का अनर्थ होने ना दें. एक बार शब्द मुंह रूपी तरकश से छूट जाते हैं तो फिर वापस नहीं आ सकते, इसलिए नाप-तौलकर और शब्दों का अच्छी तरह चयन कर ही बोलें.
