विधानसभा सत्र में विधायक ने किए मंत्री का ध्यान आकर्षित
क्या अब अधिकारियों पर होगी कार्रवाई?
दुर्ग- छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र 14 जुलाई से शुरू हो गया है जो 18 जुलाई तक चलेगी. इस बार के सत्र में सत्ता और विपक्ष दोनों के तीखे तेवर देखने को मिल रहा है. विपक्ष के सदस्यों द्वारा सत्ता पक्ष के मंत्रियों को जमकर घेर रहे है. मंत्रियों के जवाब से असंतुष्ट विपक्षी दल के सदस्यों द्वारा सदन में नारे भी लग रहे है. सत्र में सवालों की जमकर बौछार हो रही है.

छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र में खल्लारी विधानसभा क्षेत्र के कांग्रेस विधायक द्वारिकाधीश यादव ने दुर्ग जिले की तहसील दुर्ग अंतर्गत राजस्व निरीक्षण मंडल जुनवानी, पटवारी हल्का क्रमांक 43 के संबंध में ध्यानाकर्षण लगाए हैं. विधायक द्वारिकाधीश यादव ने जुनवानी, पटवारी हल्का क्रमांक 43 में स्थित खसरा नंबर 661 रकबा में 4000 वर्गफुट शासकीय घास भूमि में भ्रष्टाचार और प्रशासनिक मिलीभगत को लेकर राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री का ध्यान आकर्षित किए है. उन्होंने कहा कि इस मामले में शिकायत के बावजूद, संबंधित अधिकारियों विशेषकर अतिरिक्त तहसीलदार हुलेश्वर नाथ खुटे पर अभी तक कोई प्रभावी अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की गई है. ऐसा लगाता कि इस प्रकरण में शामिल अधिकारियों-कर्मचारियों को संरक्षण देने का प्रयास किया जा रहा है. शासन शीघ्र उचित कार्रवाई नहीं की तो कई क्षेत्रों में जनांदोलन की स्थिति उत्पन्न हो सकती है. इस मुद्दे को लेकर छत्तीसगढ़ आजतक वेब पोर्टल के माध्यम से प्रमुखता से लगातार उठाया है.
विधायक श्री यादव ने छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र में मंत्री का ध्यानाकर्षण में लगाते हुए कहा छत्तीसगढ़ राज्य के दुर्ग जिले की तहसील दुर्ग अंतर्गत राजस्व निरीक्षण मंडल जुनवानी, पटवारी हल्का क्रमांक 43 में स्थित खसरा नंबर 661 रकबा 4000 वर्गफुट शासकीय घाम भूमि जिसकी अनुमानित बाज़ार कीमत लगभग 2 करोड़ रुपय है. नियमों को दरकिनार कर निजी व्यक्ति – सीताराम पिता गिरधारी, निवासी सुपेला भिलाई के नाम पर दर्ज कर दिया गया है. यह आदेश अतिरिक्त तहसीलदार द्वारा केवल पटवारी राजस्व निरीक्षक के प्रतिवेदन के आधार पर पारित किया गया, न ही यह प्रकरण अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) के परीक्षण हेतु प्रस्तुत किया गया, न ही कलेक्टर की स्वीकृति प्राप्त की गई. यह सीधा- सीधा छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता 1954 की धारा 89 का उल्लंघन है. वास्तविकता यह है कि नियमानुसार यदि बंदोबस्त त्रुटि पाई जाती है, तो रिकॉर्ड दुरुस्ती केवल भू-स्वामी के रकबे में संशोधन करते हुए समीपवर्ती शासकीय भूमि में सुधार किया जा सकता है.
परंतु उक्त प्रकरण में इस प्रक्रिया को दरकिनार कर बहुमूल्य शासकीय भूमि को निजी व्यक्ति को सौंप दिया गया, जो स्पष्टतः भ्रष्टाचार और प्रशासनिक मिलीभगत को दर्शाता है. शिकायत के बावजूद, संबंधित अधिकारियों – विशेषकर अतिरिक्त तहसीलदार – पर अभी तक कोई प्रभावी अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की गई है. इस प्रकरण में शामिल अधिकारियों-कर्मचारियों को संरक्षण देने का प्रयास किया जा रहा है. इससे ऐसा प्रतीत होता है कि जांच करने वाले उच्चाधिकारी भी इस अवैध कृत्य में प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष रूप से संलिप्त हैं. यह केवल एक प्रकरण नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ राज्य में शासकीय भूमि की हेराफेरी और अनियमित विक्रय की बढ़ती घटनाओं की एक बानगी है. इससे जनता में प्रशासन के प्रति गहरा असंतोष उत्पन्न हो रहा है. अनेक स्थानों से शासकीय भूमि पर अवैध कब्जे और अतिक्रमण की बढ़ती घटनाओं के चलते आमजन में आक्रोश की स्थिति है और यदि शासन ने शीघ्र उचित कार्रवाई नहीं की तो कई क्षेत्रों में जनांदोलन की स्थिति उत्पन्न हो सकती है.
जांच की खानापूर्ति
अनुविभागीय अधिकारी राजस्व दुर्ग हरवंश सिंह मिरी और अतिरिक्त तहसीलदार हुलेश्वरनाथ खुटे दुर्ग कहीं इन दोनों के मिलीभगत से कलेक्टर को कहीं गुमराह करने की कोशिश तो नहीं किया जा रहा हैं? इस मामले को शिकायतकर्ता ने विष्णुदेव साय के सुशासन त्यौहार और दुर्ग संभागायुक्त सत्यनाराण राठौर से भी शिकायत किया गया किंतु इस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई. पुर्नविलोकन का विकल्प देकर अधिनस्थ अधिकारियों को अनुविभागीय अधिकारी राजस्व दुर्ग के द्वारा अतिरिक्त तहसीलदार, नायब तहसीलदार को संरक्षण देकर बचाने की कोशिश तो नहीं किया जा रहा? राजस्व निरीक्षक मंडल जुनवानी में निजी खाते में दर्ज करने के मामले में अतिरिक्त तहसीलदार हुलेश्वरनाथ खुटे के खिलाफ जांच के आदेश दिए थे.
