दक्षिण अफ्रिका के अल्ट्रा मैराथन में उमेश ने रचा इतिहास

छत्तीसगढ़ का पहला अल्ट्रा मैराथन फिनिशर्स बना
राजनांदगांव- दक्षिण अफ्रीका में आयोजित विश्व प्रसिद्ध और चुनौती पूर्ण कॉमरेड्स अल्ट्रा मैराथन 2025 को सफलता से पूरा कर शहर के उमेश काकिरवार ने इतिहास रच दिया. चुनौतियों भरी 90 किमी की दौड़ उमेश ने 11 घंटे 42 मिनट 37 सेकंड में पूरा कर दिखाया. उमेश अल्ट्रा मैराथन फिनिश करने वाले छत्तीसगढ़ के पहले फिनिशर्स बन गए है. उन्होंने सफलता आसिल कर राजनांदगांव जिले का गौरव बढ़ाया. रोज सुबह दौड़ने का कठिन अभ्यास और मेहनत के दम पर उन्होंने सफलता पाई है.
उमेश काकिरवार राजनांदगांव रनर्स क्लब के सदस्य है. दक्षिण अफ्रिका में आयोजित 90 किलोमीटर की मैराथन चुनौती पूर्ण दौड़, दुनिया की प्रतिष्ठित और कठिन अल्ट्रा मैराथन में गिनी जाती है. उमेश ने यह दूरी 11 घंटे 42 मिनट 37 सेकंड में पूरी कर छत्तीसगढ़ राज्य के पहले व्यक्ति होने का गौरव प्राप्त किया. दौड़ की शुरुआत सुबह 5:45 बजे हुई और उमेश ने शाम को 5:27 बजे फिनिश लाइन पार की. इस दौड़ में केवल शारीरिक क्षमता नहीं, मानसिक दृढ़ता, अनुशासन और आत्मबल की भी परीक्षा होती है. उमेश की यह उपलब्धि ना केवल व्यक्तिगत प्रेरणा है, पूरे छत्तीसगढ़ के धावकों के लिए एक नई दिशा और उम्मीद की किरण है. इस उपलब्धि का श्रेय अपनी बेटी और पत्नी, राजनांदगांव रनर्स क्लब को जिन्होंने उमेश को सपोर्ट किया.
मैराथन जीतने वाले उमेश को कांस्य पदक से नवाजा
उमेश ने बताया दौड़ में हर प्रमुख पड़ाव को पार कर दृढ़ता, संतुलन और जज़्बे की मिसाल कायम की. उन्होंने बोथास हील की कठिन चढ़ाई की, शेयरवूड से फिनिश तक आखिरी संघर्षपूर्ण चरण पार किया. अल्टीमेट ह्यूमन 90 किमी की मैराथन पिएटर्मारिट्जबर्ग से डरबन तक रही. 12 घंटे से कम समय में फिनिश कर कांस्य पदक जीता. अब तक की सबसे लंबी दूरी स्टार्ट कर फिनिश लाइन तक पहुंचे जो उनका सपना था. शोशोलोजा गीत और जूतों की आवाज सुन रोंगटे खड़े हो गए जब वह देशभर के धावकों के बीच अल्टीमेट ह्यूमन रेस दौड़ रहे थे.
मैराथन को पूरा करने पहले बनाई रणनीति साझा की
उमेश ने बताया कि इस 90 किमी की दौड़ में एक अनोखी रणनीति अपनाई. मैंने 90 किमी को 90 बार दौड़ कर अभ्यास किया. हर 1 किमी को लक्ष्य बना कर समय पर पूरा करने की कोशिश की. कभी सफल तो कभी असफल हुए. दूरी को डिवाइड किया और फिर अगले कुछ किमी अपने लक्ष्य वाले किलोमीटर में दौड़ने अभ्यास किया. मुझे अपनी सफलता की उम्मीद नहीं थी. उमेश ने स्वस्थ, अनुशासन व फिट रहने युवाओं को दौड़ का अभ्यास करने की बात कही. इस सफलता पर राजनांदगांव रनर्स क्लब, खेल प्रेमियों, धावकों ने उन्हें बधाई दी.
सतारा और लद्दाख की मैराथन में साबित की क्षमता
इससे पहले उमेश ने सतारा महाराष्ट्र की घाटियों में बिना थमे 8 घंटे 30 मिनट में 65 किमी दौड़ पूरी कर द कॉस अल्ट्रा रनर्स का खिताब जीता था. स्पर्धा में हिस्सा लेने वाले छत्तीसगढ़ से अकेले थे. देशभर से कई कैटेगरी में 500 धावकों ने हिस्सा लिया था. उमेश ने अंडर 35 से 45 कैटेगरी में 11 स्थान प्राप्त किया था. 17600 फीट उंचाई पर बनी विश्व की सबसे कठिन एवं उंची सड़क पर लद्दाख मैराथन को माइनस 4 डिग्री तापमान में 72 किमी की दौड़ को उमेश ने 13 घंटे 19 मिनट में पूरा करने वाले प्रदेश के इकलौते रनर बने थे. इसमें 280 में 154 ने तय समय में दौड़ पूरी की थी.
