पटवारियों की ट्रांसफर पर कलेक्टर की कार्यशैली पर उठते सवाल
दुर्ग- जिले में पटवारियों के तबादले कलेक्टर की ओर से किए जा रहे कार्यों पर सवाल उठ रहे है. कलेक्टर ने राजस्व विभाग में 16.02.2024 को बड़े पैमाने पर लम्बे समय से लगातार एक ही स्थान में जमे रहे पटवारियों का तबादला किया गया था. अब उनमें से ही कुछ पटवारियों का उन्हीं जगहों पर पुन: फिर से उसी पटवारियों का पदस्थापना कर दिया गया है. आखिर उसी जगह पर फिर से 5 महीने पहले हुए ट्रांसफर पटवारियों को पुन: उसी जगह पर ट्रांसफर क्यों करना पड़ा.
अगर उन्हें हटाकर कुछ दिनों बाद फिर से उसी जगह पर पदस्थ किया जाता है तो इससे भ्रष्टाचारियों को संरक्षण मिलता है. आखिर तबादला किस आधार पर किया गया और किन के इशारों पर किया गया इससे भ्रष्टाचारियों को पनाह मिलने की संभावना है. इससे राजस्व विभाग के अफसरों की कार्यशैली पर सवालिया निशान उठ रहे है. जिले में कई पटवारी ऐसे है जो भ्रष्टाचार में लिप्त होकर किसान,जमीन मालिकों और आम नागरिकों से भ्रष्टाचार कर भारी भरकम रकम वसुलते है.
राजस्व विभाग के भू-अभिलेख कार्यालय कलेक्टर द्वारा 30 जुलाई को पटवारियों का स्थानांतरण सूची जारी किया गया. जिसमें विमल कुमार गजपाल को पंदर से ऊतई, सूर्यकांत निषाद महकाकला से पुलगांव, शिवकुमार सोनी को खेदामारा से अम्लेश्वर, अरूण सिंह राजपूत को अम्लेश्वर से पंदर, मनोज नायक को ऊतई से खेदामारा, टेकराम साहू को पुलगांव से महकाकला ट्रांसफर किया किया गया.
मिली जानकारी के मुताबिक पूर्ववर्ती सरकार में विमल गजपाल दो साल पोटियाकला में पदस्थ थे फिर लगभग डेढ़ वर्ष उतई में थे उसके बाद पंदर भेजा गया अब फिर उतई में ट्रांसफर किया गया. सूर्यकांत निषाद तीन साल पुलगांव में पदस्थ रहा उसके बाद लगभग डेढ़ वर्ष बोरसी में रहा फिर पुलगांव में ट्रांसफर हुआ है. वैसे ही शिवकुमार सोनी लगभग डेढ़ वर्ष अम्लेश्वर में रहें फिर खेदामारा तबादला किया गया फिर 5 महीने बाद अब फिर अम्लेश्वर तबादला कर दिया गया. आखिर ऐसी क्या मजबूरी पड़ गई की इन पटवारियों को उसी जगह पर ट्रांसफर किया जा रहा है.आखिर उन्हें हटाकर कुछ दिनों बाद फिर से उसी जगह पर पदस्थापना करना था तो पूर्व में बड़े पैमाने पर ट्रांसफर क्यों किया गया. कलेक्टर का ध्यान परिवर्तित भूमि शाखा / डायवर्सन में भी अनेक आरआई तीन वर्ष से अधिक समय होने के पश्चात एक ही जगह पर जमे हुए है. इस ओर शासन प्रशासन और जिले के जनप्रतिनिधियों को भी इस ओर ध्यान देने की जरुरत है.
