भिलाई- अख्खड़ मिजाजी के लिए जाने-जाने वाले नंदकुमार बघेल का पूरा जीवन किसानों की बेहतरी के लिए समर्पित रहा है. यद्यपि उनके चर्चा उनके विवादास्पद बयानों के लिए ही अधिक हुआ, पर मूलत: वे एक स्वतंत्र चिंतक थे जो अपनी बातों को पूरी संजीदगी और निर्भीकता से सामने रखते थे. जब उनके पुत्र भूपेश ने राज्य के मुख्यमंत्री की बागडोर संभाली तब उन्होंने मुख्यमंत्री निवास पहुंचकर उसे बधाई दी और कृषि की उन्नति और किसानों की बेहतरी को अपनी प्राथमिकता में सर्वोच्च स्थान देने का मशविरा दिया.
नेता नंद कुमार बघेल ने लंबी बीमारी के बाद 8 जनवरी की सुबह 6 बजे रायपुर के एक निजी अस्पताल में अपनी अंतिम सांसें लीं. उनका जन्म दुर्ग जिले के कुरुदडीह गांव में एक समृद्ध कृषक परिवार में हुआ था. उन्होंने आजीवन खेती-किसानी ही की. इसके अतिरिक्त राजनैतिक और सामाजिक क्षेत्र में भी उनकी सक्रियता निरंतर बनी रही. उन्होंने विपरीत परिस्थितियो में भी कभी झुकना स्वीकार नहीं किया और अपने अभियान में लगे रहे. जातिवाद और धर्म की राजनीति को लेकर कई बार विवादों से घिरने वाले नंद कुमार बघेल अपने पुत्र भूपेश बघेल के मंत्री और मुख्यमंत्री रहने के दौरान दो बार जेल भी गये.
नंद कुमार बघेल और उनके ज्येष्ठ पुत्र भूपेश बघेल के बीच वैचारिक मतभेद रहे किंतु दोनों ने पिता-पुत्र के सबंध और एक-दूसरे के प्रति समर्पण की भावना में कमी नहीं आने दी. दो पुत्र और दो पुत्रियों के पिता नंद कुमार बघेल की दोनों पुत्रियां उच्च तकनीकी शिक्षा प्राप्त कर उच्च पदों पर सेवारत है. भूपेश एक सफल राजनेता हैं और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रह चुके हैं. कॉलेज शिक्षा के दौरान आंदोलन और राजनीति मे कूदने वाले भूपेश को उन्होंने राजनीति से दूर रहने की सलाह दी थी. उन्होंने कहा था कि राजनीति में जाने का उद्देश्य स्पष्ट होना चाहिए. यदि वह विधायक या मुख्यमंत्री बन सकता है तभी दृढ़संकल्प के साथ राजनीति में कदम रखे. भूपेश ने अपने पिता की बातों को गंभीरता से लिया और माता-पिता के जीवनकाल में ही मुख्यमंत्री बने. छोटे पुत्र हितेश बघेल एक प्रगतिशील किसान है.
भूपेश के मुख्यमंत्री बनने पर श्री बघेल सपत्नीक मुख्यमंत्री आवास गये और अपने पुत्र को कृषि और किसान को उन्नत और सम्पन्न बनाने की दिशा में विशेष रुप से कार्य करने के लिए प्रेरित किया. 89 वर्ष की लंबी उम्र जीने वाले नंद कुमार बघेल की सहधर्मिणी बिंदेश्वरी बघेल का निधन 7 जुलाई 2019 को हो गया था. पत्नी की मृत्यु के बाद यद्यपि अकेलेपन का अहसास तो अवश्य था लेकिन उन्होंने अपनी सक्रियता मे कोई कमी नहीं आने दी और मृत्यु के कुछ माह पूर्व तक अपनी सामाजिक और राजनैतिक सक्रियता को बरकरार रखा.
आजीवन अनुसूचित जाति, जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग समुदायों को राजनीति में आगे लाने के लिए संघर्ष करने वाले नंद कुमार बघेल पंचतत्व में विलीन हो चुके हैं लेकिन उनका संघर्ष और उनके विचार निरंतर समाज और राजनीति मे याद किये जाएंगे इसमें कोई संदेह नहीं. छत्तीसगढ़ आजतक परिवार की ओर से स्व. नंद कुमार बघेल को विनम्र श्रद्धांजलि…
