दुर्ग- अभाव को अपनी मेहनत से दूर कर अंतरराष्ट्रीय योग खिलाड़ी बनने वाले धीरेन्द्र की कहानी किसी प्रेरणा से कम नहीं है. धीरेंद्र ग्राम मर्रा पाटन के निवासी हैं. उनका पिता एक किसान है. 23 वर्षीय धीरेन्द्र रोज सुबह पेपर बांटकर अपनी आजीविका की जरूरतों को पूरा करता है. देश व विदेश में अपने आसनों का प्रदर्शन कर धीरेन्द्र ने कई कांस्य व रजत पदक भी जीता है. योग गुरु तुला राम वर्मा और लालाराम वर्मा से शिक्षा प्राप्त कर धीरेन्द्र लोगों को निःशुल्क योग सीखा रहे हैं. वे बद्ध पद्मासन,ओंकार आसन, मत्स्येंद्रासन, कुक्कुटासन, गर्भासन, शीर्षासन, वकासन, मयुरासन और वृषकासन जैसे कठिन आसनों को इतनी सरलता से करते हैं कि देखने वाले हैरान रह जाते हैं. उन्होंने ग्यारह वर्ष की उम्र में ही सभी आसनों की ट्रेनिंग पूरी कर आसपास के लोगों को योग सिखाना आरंभ भी कर दिया. वे बताते हैं कि शरीर को निरोग रखने का सबसे कारगर उपाय योग ही है. अभी तक उन्होंने दो हजार से भी अधिक लोगों को प्रशिक्षण दे चुके हैं. वर्तमान में वे एम.ए. योग प्राकृतिक चिकित्सा में अध्ययनरत हैं. आसपास के ग्रामीणों व स्कूलों के विद्यार्थियों को लगातार प्रशिक्षण देने के कारण उनको लोग अंतरराष्ट्रीय योग चैम्पियन के नाम से भी पुकारते हैं. दो सौ से अधिक योग शिविरों में कठिन आसनों का योग प्रदर्शन कर चुके हैं. फ़रवरी 2023 में श्री रावतपुरा सरकार विश्वविद्यालय में केंद्रीय खेल मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर की उपस्थिति में योग प्रर्दशन भी कर चुके हैं. छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के द्वारा उन्हें अब तक चार बार सम्मानित कर किया जा चुका है.

सम्मान :-
कांस्य पदक तृतीय राष्ट्रीय योगा स्पोर्ट्स चैंपियनशिप इन्दौर मध्य प्रदेश दिसंबर 2017,
कांस्य पदक प्रथम साउथ एशियन योगा स्पोर्ट्स चैंपियनशिप काठमाण्डू ( नेपाल) मई 2017
रजत पदक चतुर्थ – अंतर्राष्ट्रीय योगा स्पोर्ट्स चैंपियनशिप बुल्गारिया (यूरोप) जून 2019.
