पर्यावरण दिवस के अवसर पर पर्यावरण के संदर्भ में चन्द्रकला तारम ने कहा कि प्राकृतिक वृक्ष जिनके हिस्से पर व्यक्ति का इतिहास आज भी सत्य का अभिनंदन करती है. उनकी परम शक्ति हमारी परम चेतना को जागृत करती है. ऐसी प्राकृतिक संपदा जिसका आज उपयोग नहीं उपभोग हो रहा है. प्राकृतिक संपदा को महाविनाश की ओर यानि जड़ से उखाड़ फेकने की ओर अग्रसित हो रहें हैं. यदि वर्तमान की सीढ़ी को स्वस्थ और सधे शरीर पर खड़ी रखनी है तो प्राकृतिक संपदा को बचाना होगा, सत्य का साक्षात्कार करना होगा.

डा. ममता ठाकुर ने कहा कि पर्यावरण को सुरक्षित रखना हम सबका दायित्व है, सर्वे के मुताबिक हमने पाया कि आदिवासी मातृशक्तियों ने जो रिसाली मुक्ति धाम में कई पेड़ पौधें लगाए हैं, उनका अनुभव कोविड (कोरोना काल) के समय में और हुआ जहाँ डर और भय था वहाँ हम निडर निर्भिक थे.
अध्यक्ष अश्लेष मरावी ने कहा कि रिसाली मुक्ति धाम में हमने कइयों पौधारोपण किए उनका नाम भी तनाव से मुक्ति रखा पर कोविड के समय से कुछ आना कम हो गया है उन्होंने आगे कहा कि वर्तमान को सुरक्षित रखने, भविष्य को संरक्षित रखने पर्यावरण को सुरक्षित रखना होगा. चंद्रभान सिंह ठाकुर ने कहा कि हम मानव प्रकृति के उपासक है. माननीय मन प्रकृति के साथ साहचर्य एवं संबंध स्थापित करने में सदैव सुख की अनुभूति मिलती है यानि पर्यावरण सुरक्षित तो देश सुरक्षित..
