कार्य करते हुए बांट लेते है, सुख-दुख- गुणेश्वरी साहू
राजनांदगांव – ग्रामों को सशक्त बनाने की दिशा में शासन की रूरल इंडस्ट्रियल पार्क रीपा योजना गेम चेंजर साबित हो रही है. सामूहिक सहभागिता के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में उद्यमियों ने कदम बढ़ाये है. युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिल रहा है. डोंगरगढ़ विकासखंड के ग्राम सहसपुर रीपा गौठान में ग्रामीणों में खुशी और उल्लास का माहौल है. रीपा अंतर्गत यहां बेहतरीन अधोसंरचना विकसित की गई है. रीपा वर्क शेड में दोना-पत्तल निर्माण का कार्य किया जा रहा है. यहां बने दोना-पत्तल की डिमांड को देखते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में शादी, जन्मदिन, उत्सव एवं विभिन्न अवसरों पर तथा स्थानीय स्तर पर दुकानों में विक्रय किया जा रहा है.

वहीं सी-मार्ट के माध्यम से भी दोना-पत्तल बिक्री की जाएगी. यहां के प्रोडक्ट की मार्केटिंग के लिए लगातार प्रयास किया जा रहा है. यहां दोना-पत्तल के साथ फ्लाई एस ब्रिक्स, अगरबत्ती निर्माण, कार्य किया जा रहा है तथा फेब्रिकेशन यूनिट, कारपेंटर यूनिट, सिलाई यूनिट, मसाला यूनिट कार्य शीघ्र ही प्रारंभ होगा. कलेक्टर डोमन सिंह के मार्गदर्शन तथा जिला पंचायत सीईओ अमित कुमार के निर्देशन में तेजी से रीपा की अधोसंरचना के लिए कार्य किया गया. पद्मश्री जगतनंदिनी महिला स्वसहायता समूह की महिलाएं यहां दोना-पत्तल का निर्माण कर रही हैं. समूह की गुणेश्वरी साहू ने कहा कि हमारे गांव में रीपा स्थापित होने से बहुत अच्छा महसूस हो रहा है. पहली बार घर से बाहर आकर कार्य करने का मौका मिला है. दोना-पत्तल का निर्माण कार्य करते हुए समूह के सभी सदस्य आपस में सुख-दुख भी बांट लेते है. बातचीत करते हुए काम भी हो जाता है. उन्होंने बताया कि प्राप्त राशि से वे अपने लिए पक्के का घर बनायेंगी. विमला बाई ने कहा कि दोना-पत्तल मशीन चलाना सीख गए हंै. इसके लिए हमें प्रशिक्षण दिया गया है. मधुरा ने कहा कि यहां कार्य करने से बाहर कार्य के लिए नहीं जाना पढ़ता और घर का काम भी आसानी से हो जाता है. चंद्रिका साहू ने बताया कि उन्होंने अपनी बेटी की शादी के लिए यहां से प्राप्त आय की राशि को जोडऩा शुरू कर दिया है.
वर्क शेड में महिलाएं अगरबत्ती निर्माण यूनिट में अगरबत्ती का निर्माण कर रही है. कुंती बाई ने बताया कि जय माँ तुलसी स्वसहायता समूह अंतर्गत हमारे गांव में रीपा अंतर्गत अगरबत्ती यूनिट की स्थापना की गई है. जिससे हम सब खुश हैं. उन्होंने इसके लिए छत्तीसगढ़ शासन को धन्यवाद कहा. राजेश्वरी ने बताया कि यहां कार्य करते हुए बहुत अच्छा लग रहा है. अगरबत्ती निर्माण करने के लिए प्रशिक्षण दिया गया है. अपने घर के पास ही रोजगार मिलने से बहुत ही अच्छा लग रहा है. कांची कंवर ने खुशी जाहिर करते हुए बताया कि यहां विभिन्न गतिविधियों से जुड़कर कार्य करना अच्छा लग रहा है. रीपा अंतर्गत गौठान में समूह की महिलाओं ने बताया कि गोधन न्याय योजना के तहत अब तक 4047.27 क्विंटल गोबर की खरीदी हुई है तथा किसानों एवं पशु पालकों को 9 लाख रूपए का फायदा हुआ और 7744.11 क्विंटल वर्मी कम्पोस्ट का उत्पादन किया गया है. वर्मी कम्पोस्ट की बिक्री से 7 लाख 24 हजार रूपए लाभांश राशि प्राप्त हुई है. गांव के सरपंच श्री युवराज सूर्यवंशी ने बताया कि रीपा की स्थापना के बाद गांव में काफी परिवर्तन आया है. पहले मजदूर कार्य के लिए बाहर जाते थे, लेकिन यहां आजीविका मिलने की वजह से स्थानीय स्तर पर ही लोगों को काम मिल रहा है. उन्होंने शासन तथा जिला प्रशासन को रीपा की स्थापना के लिए बहुत धन्यवाद दिया.
