गोरखपुर : गोरखपुर के विकासखंड बड़हलगंज में एक शादी इन दिनों लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है. यहां 40 साल के कुंवारे दुल्हे बालेंद्र उर्फ बलई यादव की शादी 10 बच्चों की विधवा मां सोनी शर्मा (42) से करवा दी गई है. दूल्हा नकइल ( देवरिया) और दुल्हन ददरी (बड़हलगंज) की रहने वाली है. काफी दिनों से दोनों के बीच प्रेम प्रसंग चल रहा था. दोनों पिछले एक साल से फरार भी थे. बीते दिनों दुल्हन के गांव ददरी आने पर बच्चों द्वारा इसकी भनक गांव के लोगों को लगी, जिसके बाद गांव के गुरुकुल पीजी कालेज ददरी के प्रबंधक जयप्रकाश शाही और प्रधान की अध्यक्षता में पंचायत बुलाकर गांव के लोगों ने शुक्रवार को दोनों की शादी यहां के शिव मंदिर में करा दी.

बालेंद्र उर्फ बलई यादव कुंवारे थे, जबकि सोनी देवी के पति की मौत 6 साल पहले हुई थी. दोनों की शादी का वीडियो बनाकर किसी ने सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया है. तब से इस वीडियो की खूब चर्चा हो रही है. ग्रामीणों का कहना है कि दोनों के बीच काफी दिनों से प्रेम संबंध चल रहा था. दोनों बीते एक साल से फरार थे. दोनों को बुलाकर पूछताछ की गई और फिर पंचायत हुई. शुक्रवार को ददरी गांव के शिव मंदिर में बालेंद्र उर्फ बलई यादव से सोनी देवी की मांग में सिंदूर भरवा दिया गया और दोनों ने एक-दूसरे को वरमाला पहनाई.
पांच साल से दोनों थे साथ
गांव के गुरुकुल पीजी कालेज के प्रबंधक जयप्रकाश शाही और प्रधान प्रतिनिधि सतीश शाही ने कहा कि दोनों के बीच पांच साल से प्रेम संबंध चल रहा था. एक साल से फरार थे. दोनों के बीच 5 साल से रिश्ता था. दोनों ने शादी करने का फैसला लिया और मंदिर में ग्रामीणों की मौजूदगी में शादी कर ली. इस रिश्ते से दोनों खुश है. उन्होंने कहा कि सोनी शर्मा के बच्चों को भी इस रिश्ते से कोई दिक्कत नहीं है. उन लोगों को भी इसके बारे में वर्षों से पता था. शादी कराने के बाद दुल्हन सोनी को बालेंद्र उर्फ बलई के साथ ग्रामीणों ने विदा कर दिया.
दोनों को मिला नौकरी और आवास
गुरुकुल पीजी कॉलेज के प्रबंधक जय प्रकाश शाही ने विवाहित जोड़े को मौके पर ही कॉलेज में नौकरी के लिए नियुक्ति पत्र दिया. साथ ही दोनों को गुरुकुल संस्थान समूह के आवासीय परिसर में शिफ्ट करने की घोषणा भी दी. दोनों खुशी-खुशी चले गए. गुरुकुल पीजी कालेज के प्रबंधक जयप्रकाश शाही और प्रधान प्रतिनिधि सतीश शाही ने कहा कि सब ने मिलकर एक नेक काम किया है. महिला बेघर थी. उसे घर मिल गया और अनाथ बच्चों को पिता का साया मिल गया.
