तमिलनाडु के तिरुनेलवेली जिले से एक हैरतअंगेज मामला सामने आया है. यहां अंबासमुद्रम के तीन लोगों ने पुलिस पर आरोप लगाया कि उन्हें पहले हिरासत में लिया गया और टॉर्चर किया गया. युवकों ने असिटेंट सुप्रीडेंट ऑफ पुलिस बलवीर सिंह आईपीएस पर उनके दांत तोड़ने का गंभीर आरोप लगाया. घटना का वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें पीड़ित बलवीर सिंह से किए गए टाॅर्चर के बारे में बता रहा है. जिसके बाद पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को आईपीएस अधिकारी बलवीर सिंह के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए प्रेरित किया. 29 मार्च को मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने तमिलनाडु विधानसभा को सूचित किया कि अधिकारी को निलंबित कर दिया गया है.

वीडियो में चेल्लप्पा ने बताया, थाने में बलवीर सिंह सफेद दस्ताने पहने हुए थे. बलवीर ने मुझे अंदर बुलाया जिसके बाद दूसरे पुलिस अधिकारियों ने उसका हाथ पकड़ लिया और फिर बलवीर ने उसके दांत प्लास की मदद से तोड़ दिया. उनके भाइयों और दूसरे गुट के लोगों का भी वही हश्र हुआ. उसके भाई को भी इसी तरह टाॅर्चर किया गया. चेल्लप्पा ने कहा कि घटना को करीब दस दिन हो गए हैं, लेकिन मेरा भाई अब भी बिना किसी सहारे के चल नहीं पा रहा है.
पुलिस पर धमकी देने का भी आरोप
चेल्लप्पा ने पुलिस पर अदालत में पेश करने से पहले धमकी देने का आरोप लगाया है. उसने बताया पुलिस ने उससे कहा कि अदालत में हमें यह नहीं बताना है कि पुलिस स्टेशन में पीटा गया था. साथ ही अगर हमसे हमारी चोटों के बारे में पूछा जाए तो हमें अदालत को यह बताने के लिए कहा गया कि हम नारियल तोड़ते समय पेड़ से गिर गए थे या तो अपनी बाइक से गिर गए थे.
बलवीर सिंह पर चेल्लप्पा, उनके भाई और उनके साथ हिरासत में लिए गए अन्य लोग आरोप लगाने वाले अकेले लोग नहीं हैं. टीएनएम ने वेधा नारायणन नाम के एक शख्स ने भी यह आरोप लगाया कि वीके पुरम पुलिस थाने में प्रताड़ित किया गया था जहां वह पारिवारिक विवाद को लेकर गए थे. हिरासत में प्रताड़ना के कई आरोप सामने आने के बाद तमिलनाडु सरकार ने बलवीर सिंह आईपीएस को उनके पद से हटा दिया. एक अधिकारी ने टीएनएम को बताया कि रेवेन्यू डिविजनल लेवल की जांच के आदेश दिए गए हैं और पीड़ितों को समन जारी किया गया है.
बलवीर सिंह हरियाणा के 2019 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं. यह मामला तब सामने आया जब लोगों ने अपने अनुभव के बारे में वीडियो पर बात की, जो सोशल मीडिया पर वायरल होने लगा. ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट सुधा रामलिंगम ने कहा कि यह एक गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन है. पुलिस अधिकारी को अपने साथी पुलिसकर्मियों के लिए एक आदर्श बनना होगा. इसके लिए बिना किसी देरी के आपराधिक मुकदमा चलाया जाना चाहिए. राज्य सरकार को पीड़ितों को जरूरी मेडिकल सर्विस देनी चाहिए.
