सत्येंद्र प्रकाश सूर्यवंशी

श्री पितांबरा पीठ सुभाष चौक सरकंडा बिलासपुर छत्तीसगढ़ स्थित त्रिदेव मंदिर में चैत्र नवरात्रि के पांचवे दिन ब्रह्माशक्ति बगलामुखी देवी का स्कंदमाता के रूप में पूजन श्रृंगार किया गया.
मंदिर के पीठाधीश्वर आचार्य दिनेश महाराज ने बताया कि पौराणिक कथा के अनुसार तारकासुर नाम का एक राक्षस था जिसका आतंक बहुत बढ़ गया था लेकिन तारकासुर का अंत कोई नहीं कर सकता था क्योंकि भगवान शिव के पुत्र कार्तिकेय के हाथों ही उसका अंत संभव था ऐसे में मां पार्वती ने अपने पुत्र स्कंद यानी कार्तिकेय को युद्ध के लिए प्रशिक्षित करने के लिए स्कंदमाता का रूप धारण किया स्कंदमाता से युद्ध का प्रशिक्षण लेने के बाद कार्तिकेय ने तारकासुर का अंत किया स्कंदमाता की उपासना संतान प्राप्ति हेतु अवश्य की जानी चाहिए.
पितांबरा पीठ के प्रांगण में देवी भागवत कथा में स्वामी विवेकानंद भारती महाराज ने कहा कि सुख प्राप्ति में देवी भागवत की कथा सुगम साधन है भगवान कृष्ण के गुफा में चले जाने से उनके सेवक वापस लौट आए थे जिससे वासुदेव देवकी जी को बड़ा दुख हुआ था. नारद जी की कृपा से देवी भागवत कथा के श्रवण से वासुदेव जी का दुख सुख में बदल गया था साथ ही भगवान कृष्ण को तथा वासुदेव देवकी जी को कंस के कारागार से मुक्त कराने के लिए गर्ग जी ने वासुदेव जी से सेवा कराया तथा विंध्याचल पर्वत जाकर भगवती की उपासना की थी दुर्गा सप्तशती के पाठ और नवाचार मंत्र के जाप देवी भक्त वासुदेव जी को मुक्त करने के लिए तथा भगवान कृष्ण की सुरक्षा के लिए पहले से ही वृंदावन पधार गई थी. जिला पंचायत सभापति अंकित गौरहा ने पितांबरा पीठ पहुंचकर माता बगलामुखी का दर्शन किया आचार्य दिनेश पांडेय जी से आशीर्वाद प्राप्त किया.
इस अवसर पर काशी से पधारे हुए स्वामी सच्चिदानंद सरस्वती महाराज सहित पीठाधीश्वर दिनेश महाराज, संजय पांडेय एवं नगर के गणमान्य नागरिक सहित भक्तजन उपस्थित रहें.
