उज्जैन : विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में सामान्य दर्शनार्थियों की जमकर फजीहत हो रही है. आम भक्त भगवान को जल भी नहीं चढ़ा पा रहे हैं. मंदिर समिति ने दोपहर 1 से 4 बजे तक समान्य दर्शन के दौरान जल अर्पण कराने पर प्रतिबंध लगा रखा है. अगर कोई भक्त जल लेकर मंदिर पहुंच भी जाता है, तो कर्मचारी उससे जल का लोटा छीन लेते हैं. इससे दर्शनार्थियों में रोष है. उनका कहना है कि अब भगवान को जल चढ़ाने के लिए अलग से 1500 रुपये की रसीद खरीदें, मंदिर समिति को भक्तों को जल चढ़ाने की अनुमति देना चाहिए.

भक्तों से छीन लिया जल व लोटा
दर्शनार्थी बसंत कुमार खत्री ने बताया कि वह परिवार के साथ भगवान महाकाल के दर्शन करने आया था. भगवान महाकाल को जल अर्पित करने के लिए वे गंगाजल व लोटा साथ लेकर आए थे. दर्शन की कतार में चलते हुए जब हम नंदी हाल में पहुंचे, तो वहां मौजूद कर्मचारियों ने हमसे जल व लोटा छीन लिया और कहा कि आम भक्त जल नहीं चढ़ा सकते हैं. कतार में लगे अन्य श्रद्धालुओं के साथ भी कर्मचारियों का यही व्यवहार था. मंदिर में अर्थवादी व्यवस्था इस कदर हावी है कि सामान्य दर्शनार्थी बिना शुल्क भगवान को जल भी नहीं चढ़ा सकते हैं.
पुजारियों में भी रोष
इस मामले में मंदिर के पुजारी व पूर्व समिति सदस्य पं.राजेश पुजारी ने भी रोष जताया है. उन्होंने कहा कि सामान्य दर्शन के समय जल अर्पण पर रोक लगाना उचित नहीं है. इस व्यस्था से आम भक्त कभी भगवान को जल ही नहीं चढ़ा पाएगा. धन्नासेठ तो 1500 रुपये देकर भगवान को जब चाहे जल चढ़ा सकते हैं. लेकिन उस गरीब भक्त का क्या, जो 1500 रुपये शुल्क नहीं चुका सकता है. धर्मस्थान पर भक्तों के साथ हो रहा यह अन्याय बंद होना चाहिए.
प्रशासक बोले सालों से चल रही व्यवस्था
मंदिर प्रशासक संदीप कुमार सोनी का कहना है कि मंदिर में 1500 रुपये में जल चढ़ाने की व्यवस्था बीते 15 सालों से चल रही है, मैंने इसे लागू नहीं किया है. दिन में अगर सामान्य दर्शनार्थियों को जल चढ़ाने का अवसर दिया जाएगा, तो दर्शन की गति धीरे हो जाएगी और बाहर भीड़ बढ़ेगी. सारे निर्णय प्रबंध समिति में होते हैं, इस विषय को भी वहीं रखा जाएगा.
