चैत्र नवरात्रि : आज चैत्र नवरात्रि का पहला दिन है. हर वर्ष चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि पर कलश स्थापना की जाती है. साथ ही नौ दिनों तक मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा उपासना की जाती है. नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा का विधान है. मां शैलपुत्री हिमालयराज की पुत्री हैं. देवी शैलपुत्री वृषभ पर सवार होती हैं. इनके दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल का पुष्प होता है. मान्यता है कि मां शैलपुत्री की पूजा करने से व्यक्ति को सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है. शास्त्रों के अनुसार मां शैलपुत्री चंद्रमा को दर्शाती हैं. कहा जाता है कि माता रानी के शैलपुत्री स्वरूप की उपासना से चंद्रमा के बुरे प्रभाव निष्क्रिय हो जाते हैं. घटस्थापना के दौरान बहुत सारी चीजों की आवश्यकता होती है. मां की पूजा पूरे विधि-विधान की जानी चाहिए. ऐसे में आज हम आपको बताएंगे की आज घटस्थापना के लिए क्या-क्या सामग्री जरुरी है. इसके साथ ही पूजा विधि.

घटस्थापना के लिए शुभ मुहूर्त – 22 मार्च को सुबह 06 बजकर 23 मिनट से सुबह 07 बजकर 39 मिनट के मध्य तक घट स्थापना करना उचित रहने वाला है. राहुकाल को अशुभ मुहूर्त माना जाता है. इसलिए इस बात का ख्याल रखें की आप उससे पहले ही घटस्थापना कर लें. चैत्र नवरात्रि के पहले दिन राहुकाल दोपहर 12 बजकर 11 मिनट से दोपहर 01 बजकर 41 मिनट तक है. राहुकाल के समय में आप मां दुर्गा की पूजा और कलश स्थापना भूलकर भी न करें.
घटस्थापना के लिए आवश्यक सामग्री – 1. चौड़े मुँह वाला मिट्टी का एक बर्तन, 2. पवित्र स्थान की मिट्टी, 3. सप्तधान्य (7 प्रकार के अनाज), 4. कलश, 5. जल (संभव हो तो गंगाजल), 6. कलावा/मौली, 7. सुपारी, 8. आम या अशोक के पत्ते (पल्लव), 9. अक्षत (कच्चा साबुत चावल), 10. छिलके/जटा वाला नारियल, 11. लाल कपड़ा, 12. पुष्प और पुष्पमाला, 13. मिठाई, दूर्वा, सिंदूर इत्यादि.
घटस्थापना विधि – 1. पहले मिट्टी को चौड़े मुँह वाले बर्तन में रखें और उसमें सप्तधान्य बोएँ, 2. अब उसके ऊपर कलश में जल भरें और उसके ऊपरी भाग (गर्दन) में कलावा बाँधें, 3. आम या अशोक के पल्लव को कलश के ऊपर रखें, 4. अब नारियल को लाल कपड़े में लपेटकर कलश के ऊपर और पल्लव के बीच में रखें, 5. नारियल में कलावा भी लपेटा होना चाहिए, 6. घटस्थापना पूर्ण होने के बाद देवी का आह्वान करते हैं.आप चाहें तो अपनी इच्छानुसार और भी विधिवत पूजा कर सकते हैं.
मां शैलपुत्री की आरती
जय अम्बे गौरी मैया जय श्यामा गौरी .
तुमको निशिदिन ध्यावत हरि ब्रह्मा शिवरी ॥
मांग सिंदूर बिराजत टीको मृगमद को .
उज्ज्वल से दोउ नैना चंद्रबदन नीको ॥
कनक समान कलेवर रक्ताम्बर राजै.
रक्तपुष्प गल माला कंठन पर साजै ॥
केहरि वाहन राजत खड्ग खप्परधारी .
सुर-नर मुनिजन सेवत तिनके दुःखहारी ॥
कानन कुण्डल शोभित नासाग्रे मोती .
कोटिक चंद्र दिवाकर राजत समज्योति ॥
शुम्भ निशुम्भ बिडारे महिषासुर घाती .
धूम्र विलोचन नैना निशिदिन मदमाती ॥
चौंसठ योगिनि मंगल गावैं नृत्य करत भैरू.
बाजत ताल मृदंगा अरू बाजत डमरू ॥
भुजा चार अति शोभित खड्ग खप्परधारी.
मनवांछित फल पावत सेवत नर नारी ॥
कंचन थाल विराजत अगर कपूर बाती .
श्री मालकेतु में राजत कोटि रतन ज्योति ॥
श्री अम्बेजी की आरती जो कोई नर गावै .
कहत शिवानंद स्वामी सुख-सम्पत्ति पावै ॥
