एनसीडीआरसी एवं आरबीआई का अधिकारी बनकर दिया था ठगी की वारदात को अंजाम
दिल्ली-एनसीआर में लगातार05 दिनों तक पतासाजी कर पुलिस ने आरोपी को पकड़ा
कबीरधाम- जिले के साइबर पुलिस थाने ने एलआईसी की बंद पड़ी पॉलिसी की राशि वापस दिलाने का झांसा देकर 69,37,518 रुपये की ऑनलाइन ठगी करने वाले एक शातिर आरोपी को दिल्ली से गिरफ्तार की है. आरोपी खुद को राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग और भारतीय रिजर्व बैंक का अधिकारी बताकर पीड़ित को लगभग एक साल तक झांसे में रखता था.
पुलिस अधीक्षक जितेन्द्र कुमार यादव के निर्देशन और वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में गठित विशेष टीम ने आधुनिक तकनीकी विश्लेषण और बैंकिंग ट्रांजेक्शन के आधार पर दिल्ली-एनसीआर के सघन क्षेत्र में 5 दिनों तक लगातार पतासाजी कर आरोपी को दबोचा.
जानकारी के अनुसार, 7 अक्टूबर 2026 को एक पीड़ित द्वारा साइबर पुलिस थाना में लिखित शिकायत दर्ज कराई गई कि अज्ञात व्यक्तियों द्वारा स्वयं को राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग (NCDRC) एवं भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) का अधिकारी बताकर उसकी बंद पड़ी एलआईसी पॉलिसी में जमा राशि वापस दिलाने का झांसा दिया गया. आरोपियों द्वारा पॉलिसी की राशि रिकवर कराने, विभिन्न संस्थाओं से एनओसी प्राप्त करने एवं न्यायालयीन प्रक्रिया के नाम पर अलग-अलग किस्तों में माह नवम्बर 2025 से अक्टूबर 2026 के मध्य कुल 69,37,518/- रुपये (अक्षरी उनहत्तर लाख सैंतीस हजार पांच सौ अठारह रुपये) की ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी की गई. उक्त शिकायत पर साइबर पुलिस थाना कबीरधाम में अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया.
साइबर पुलिस टीम द्वारा आधुनिक साइबर तकनीक का उपयोग करते हुए बैंक खातों के लेन-देन का सूक्ष्म तकनीकी एवं बैंकिंग साक्ष्यों के आधार पर आरोपी मोहम्मद जैद खान, निवासी जामिया नगर, दिल्ली की संलिप्तता सामने आई. आरोपी की लोकेशन दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में प्राप्त होने पर साइबर पुलिस टीम दिल्ली रवाना हुई. वहां स्थानीय पुलिस की सहायता से सघन आबादी वाले क्षेत्र में आरोपी के हुलिए एवं तकनीकी इनपुट के आधार पर लगातार 05 दिनों तक पतासाजी की गई. अंततः पुलिस टीम द्वारा आरोपी मोहम्मद जैद खान को हिरासत में लिया गया तथा विधिवत गिरफ्तार किया गया.
गिरफ्तार आरोपी मोहम्मद जैद खान पिता जियाउद्दीन खान, उम्र 37 वर्ष, निवासी जामिया नगर, दिल्ली, लाइफ इंश्योरेंस कंपनी में कार्यरत है. विवेचना एवं पूछताछ में सामने आया कि आरोपी अपने पूर्व परिचित एवं लाइफ इंश्योरेंस कंपनी में कार्यरत अन्य सहयोगी के साथ मिलकर बंद पड़ी बीमा पॉलिसियों की राशि वापस दिलाने एवं पॉलिसी को पुनः चालू कराने के नाम पर लोगों से संपर्क करता था. आरोपियों द्वारा स्वयं को राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग एवं भारतीय रिजर्व बैंक का अधिकारी बताकर लोगों का विश्वास जीतते हुए उन्हें बड़ी रकम वापस मिलने का प्रलोभन दिया जाता था. इसके बाद विभिन्न संस्थाओं से एनओसी प्राप्त करने, न्यायालयीन प्रक्रिया एवं अन्य औपचारिकताओं के नाम पर अलग-अलग किस्तों में रकम जमा कराई जाती थी. इस प्रकार आरोपियों द्वारा फर्जी बैंक खातों एवं मोबाइल नंबरों का उपयोग कर सुनियोजित तरीके से साइबर ठगी की वारदात को अंजाम दिया जाता था.
पूछताछ के दौरान आरोपी मोहम्मद जैद खान ने अपने सहयोगी के साथ मिलकर उक्त घटना को अंजाम देना स्वीकार किया है. प्रकरण में संलिप्त अन्य आरोपी की पतासाजी एवं गिरफ्तारी के लिए विवेचना जारी है.
उक्त कार्रवाई में निरीक्षक उमाशंकर राठौर के नेतृत्व में सउनि चंद्रकांत तिवारी, प्रधान आरक्षक चुम्मन साहू, प्रधान आरक्षक अभिनव तिवारी, आरक्षक आकाश राजपूत, आरक्षक मोहम्मद इरफान, आरक्षक मनीष कुमार एवं अन्य पुलिस स्टाफ का सराहनीय योगदान रहा.
