जांजगीर-चांपा : जांजगीर शहर के वार्ड 6 नहरिया बाबा मंदिर मार्ग में रहने वाले 56 वर्षीय राजीव ठाकुर के घर की बगिया अनोखी व दुर्लभ है. उनकी बगिया में अमरनाथ क्षेत्र में मिलने वाला नागमणी फूल, कुरुक्षेत्र की पहाड़ियों में मिलने वाला भीमफल, पीले रंग का कमल, रुद्राक्ष, मधुमेह में बनने वाली इंसुलिन का पौधा भी शामिल है. इन फल-फूलों को उन्होंने देश के अलग-अलग हिस्सों से लाकर अपने घर में लगाया है. पूरा घर ही बगिया की तरह नजर आ रहा है.

घर की छत में भी गमलों में अगल-अलग प्रजातियों के फल-फूलों की भरमार है जिसे देखने के लिए काफी लोग आते हैं. उन्होंने अपने बाग को सुंदरवन का नाम दिया है. राजीव बताते हैं कई पौधों को केवल लेने के लिए वे 18 से 20 दिन तक उन इलाकों में जाकर रुके भी है. कई लोगों की मदद ली तब जाकर सफलता मिली.
राजीव बताते हैं कि उनके बाबूजी सुंदर सिंह ठाकुर लोहर्सी में सैनिक स्कूल के लिए बच्चों को मुफ्त में पढ़ाते थे. जिसमें कई बच्चे सलेक्ट होकर निकल जाते हैं. ऐसे में बाबूजी कहते थे कि हर बच्चा एक पौधा लगाकर जाए ताकि उन्हें वे सब याद रहे. इस तरह बचपन से ही उन्हें पेड़-पौधे लगाने की इच्छा जागी. 2014 से पहले तक वे किराए के घर में रहते थे जहां जगह नहीं होने पर ही गमलों में बागवानी करते थे. इसके बाद जांजगीर में नहरिया बाबा मंदिर मार्ग में घर बनाया और बगल वाली जमीन में बगिया. जिसके बाद से उन्होंने इस तरह विभिन्न प्रजाति के पेड़-पौधे लगाने की शुरुआत की और सैकड़ों किस्म के फल-फूलों से बगिया भर गई है.
इसके अलावा चायनीज चेरी का भी पेड़ हैं जिसमें काफी मीठे फल लगे हैं. जो लाल रंग का है. इसी तरह डोरियन नामक का चायनीज फ्रूट भी है. शुगर की दवा बनने वाला इंसुलिन और गुड़मार जैसे औषधि पौधे भी है. दोनों के पत्ते खाने से भी मधुमेह के रोगियों को लाभ मिलता है. चायनीज एगफ्रूट भी है जिसे अंडे की तरह उबाल कर खाया जाता है. सिन्दूर, सेव, लीची, कपूर, रुद्राक्ष और तोता-मैना फूल भी घर में लगा हुआ है. तेज पत्ता का पेड़ भी है जो मसाले रूप में प्रयोग होता है. हींग, अंजवाइन, जायफल के भी पेड़-पौधे लगे हैं. सुपारी भी है जिससे हर माह तीन से चार किलो सुपारी निकलती है. इसी तरह तोता-मैना फूल भी है जो खिलने पर बिल्कुल तोता-मैना की तरह दिखता है.
बगिया में रक्तचंदन और मलयागिरी चंदन का पेड़ भी है. इसके अलावा ब्रह्म कमल, कृष्ण वट, लक्ष्मी तरु, हिंगलाज माता, सूर्यकिरण, लौंग-इलायची, पुरतंजीवी, नागकेसर, रामपतेरा, अंजीर, कचनार, पानकूपर, संवरी वट जिसके पत्ते दोने जैसे होते हैं, अक्षय वट, सर्पगंधा, स्वर्णचंपा, मीठी तुलसी, जैसे विभिन्न प्रजाति के फल-फूल लगे हुए हैं.
