राजनांदगांव : राजनांदगांव जिले के सीमांत इलाकों में जल्दी ही महाराष्ट्र के बाघों की दहाड़ सुनाई देगी. राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) के निर्देश पर करीब 12 बाघों को चंद्रपुर स्थित ताड़ोबा टाइगर रिजर्व से राज्य की सीमा से सटे हुए महाराष्ट्र के गोदिंया और भंडारा जिले के नवेगांव-नागझिरा टाइगर रिजर्व में शिफ्ट करने की तैयारी चल रही है.

इसके पूरा होते ही बाघों की कमी से जूझ रहे छत्तीसगढ़ को राहत मिलेगी. साथ ही सीमांत इलाके में विचरण करने और कुनबे के डेरा डालने से उनकी संख्या में इजाफा होगा. बताया जाता है कि महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले में मानव-पशु संघर्ष के चलते 2022 के दौरान 53 लोगों की मौत हुई थी.
इसमें से अकेले 20 से अधिक व्यक्तियों की मौत ब्रह्मपुरी वन मंडल में हुई. इसे देखते हुए स्थानीय अधिकारियों और एनटीसीए के अधिकारियों की बैठक हुई थी. इस दौरान जिले में मानव-पशु संघर्ष को रोकने और कार्य योजना बनाने के साथ ही बाघों को दूसरे क्षेत्र में शिफ्ट करने पर सहमति बनी थी. चंद्रपुर क्षेत्र के मुख्य वन संरक्षक, प्रकाश लोनकर का कहना है कि स्थानांतरित करने के लिए नर और मादा बाघों को चिन्हांकित कर लिया गया है. एनटीसीए से नवेगांव-नागझिरा टाइगर रिजर्व में इन्हे स्थानांतरित करने एवं उनका पुनर्वास सहित अन्य उपायों के लिए नागपुर के प्रधान मुख्य वन संरक्षक को एक प्रस्ताव भेजा.
छत्तीसगढ़ में बचे मात्र 19 बाघ
छत्तीसगढ़ में 2014 को हुई गणना के अनुसार राज्य में 19 बाघ ही बचे हुए है, जबकि 2014 में इनकी संख्या 46 थी. वहीं 2022 में कराई गई गणना के आकड़े अब तक सार्वजनिक नहीं किए गए हैं. हालांकि वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि कोरोनाकाल के दौरान अभयारण्य, टाइगर रिजर्व और राष्ट्रीय उद्यान को पर्यटकों के लिए बंद करने से वन्य प्राणियों को सुरक्षित रहवास क्षेत्र मिला है. इसके चलते उनकी संख्या में इजाफा होने की संभावना जताई है.
बता दें कि 2018 की गणना के अनुसार बाघों की संख्या सबसे ज्यादा मध्यप्रदेश में बढ़ी है. यहां 2014 में 308 बाघ थे, जो बढकऱ 526 हो गए. 524 बाघों के साथ कर्नाटक दूसरे और 442 बाघों के साथ उत्तराखंड तीसरे स्थान पर रहा. महाराष्ट्र में भी बाघों की संख्या 190 से बढकऱ 312 हुई. लेकिन, छत्तीसगढ़ में इसकी संख्या कम हो गई.
