विकास के नाम पर बड़ा खेल, 2 ट्रैक्टर मुरम डालकर बना दिया 800 ट्रैक्टर का बिल, पहली बारिश में ही खुल गई भ्रष्टाचार की पोल

नितेश श्रीवास्तव, बलरामपुर- बरसात के मौसम में ग्रामीणों को कीचड़ और जलभराव से राहत देने के लिए ग्राम पंचायत चंद्रनगर में सड़क मुरमीकरण का काम स्वीकृत किया गया था. मंशा साफ थी कि बारिश के दिनों में राहगीरों और स्थानीय लोगों को आवाजाही में कोई परेशानी न हो. लेकिन धरातल पर राहत की जगह ग्रामीणों को भ्रष्टाचार और घोटाला परोस दिया गया है ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि सड़क पर नाममात्र के लिए सिर्फ 1 से 2 ट्रैक्टर मुरम नहीं बल्कि मिट्टी छिड़ककर काम की इतिश्री कर ली गई. वहीं, कागजों में लगभग 800 ट्रैक्टर मुरम का भारी-भरकम बिल तैयार कर राशि निकालने का खेल रचा जा चुका है.

पहली बारिश में बिला उठी मिट्टी मुसीबत बनी सड़क हाल ही में हुई हल्की बारिश ने ही पंचायत के निर्माण कार्यों की कलाई खोलकर रख दी है. सड़क पर बिछाई गई मिट्टी अब कीचड़ और दलदल का रूप ले चुकी है जिससे राहगीरों और ग्रामीणों का इस मुख्य रास्ते पर चलना मुश्किल ही नहीं बल्कि दूभर हो चुका है ग्रामीणों का कहना है कि काम राहत देने के लिए हुआ था लेकिन पंचायत प्रतिनिधियों की कारस्तानी ने इसे बड़ी मुसीबत में बदल दिया है. जिले के बड़े साहबों का रुख कभी इस ओर नहीं हुआ गाँव के युवाओं और ग्रामीणों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है. उनका कहना है कि जिला प्रशासन के आला अधिकारी जिले भर का दौरा करते हैं, लेकिन इतनी बड़ी आबादी वाले चंद्रनगर ग्राम पंचायत की सुध लेने आज तक कोई बड़ा अधिकारी या कलेक्टर नहीं पहुंचे. यह गांव का मुख्य रास्ता है और बारिश के दिनों में इस पर चलना किसी खतरे से कम नहीं है.
अगर रात के वक्त गांव में किसी की तबीयत बिगड़ जाए या कोई मेडिकल इमरजेंसी आ जाए, तो उसे मुख्य सड़क तक पहुंचाकर अस्पताल ले जाना किसी चमत्कार से कम नहीं है. हमारी जान भगवान भरोसे है सरपंच पुत्र और सचिव की तानाशाही, ग्रामीणों को पूछने वाला कोई नहीं ग्रामीणों का गंभीर आरोप है कि पंचायत में लोकतंत्र नहीं, बल्कि तानाशाही चल रही है. गाँव में आम सभा हो या ग्राम सभा, आम ग्रामीणों से न तो कोई सलाह ली जाती है और न ही बैठक की जानकारी दी जाती है. पंचायत के सचिव, सरपंच पुत्र और गाँव के 3-4 दलाल मिलकर सारे फैसले बंद कमरे में ले लेते हैं और सरकारी बजट को आपस में ठिकाने लगा देते हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है. इससे पहले भी जब-जब मीडिया में भ्रष्टाचार की खबरें उजागर हुई हैं, तब-तब जांच के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की गई और अंततः फाइलें ठंडे बस्ते में डाल दी गईं. जिम्मेदार अधिकारियों की अनदेखी के चलते भ्रष्टाचारियों के हौसले बुलंद हैं.
अब देखना यह होगा कि इस बार कीचड़ में तब्दील हुई इस सड़क और कागजी मुरमीकरण के घोटाले पर जिला प्रशासन कोई सख्त कदम उठाता है या फिर चंद्रनगर की जनता को यूं ही बदहाली के आंसू रोने के लिए छोड़ दिया जाता है
