संस्कारधानी के मूर्धन्य साहित्यकार सामाजिक चेतना और मानवीय मूल्यों के जीवंत दस्तावेज – प्रभात मिश्रा

राजनांदगांव- नगर निगम के राजा बलराम दास सभागार में आयोजित शताब्दी समारोह साहित्यिक आयोजन में रायपुर से पधारे छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के पूर्व अध्यक्ष व बख़्शी सृजन पीठ के- अध्यक्ष, वरिष्ठ इतिहासकार डॉ रमेंद्रनाथ मिश्र ने राजनांदगांव के दानवीर राजाओं की भूरि- भूरि प्रशंसा एवं गुनगान करते हुए कहा कि यहां के बैरागी राजाओं ने न केवल राजनांदगांव को सजाया संवारा रायपुर के लोगों को पीने का पानी के लिए शेर छाप नल, प्रकाश के लिए बिजली दी. यही नहीं रायपुर में महन्त घासीदास संग्रहालय, सर्वैश्वरदास आडिटोरियम शहीद स्मारक मे महंत राजा बलराम दास ग्रंथालय आदि इन्ही राजाओं की देन है. इसी तरह यहां के मूर्धन्य साहित्यकारों ने जो विश्वस्तरीय साहित्य की सर्जना की है जिसमें इंदु भूषण ठाकुर भी आते हैं इनकी साहित्यिक धरोहरों को सहेज कर रखना हम सब की जिम्मेदारी है.
सामाजिक चेतना व मानवीय मूल्यों के जीवंत दस्तावेज
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के अध्यक्ष प्रभात मिश्रा ने साहित्य मनीषी इंदु भूषण ठाकुर को नमन करते हुए कहा कि राजनांदगांव की साहित्यिक धरा साहित्य त्रिवेणी पदुमलाल पुन्नालाल बख़्शी, गजानन माधव मुक्तिबोध, बल्देव प्रसाद मिश्र और नंदूलाल चोटिया, कुंजबिहारी चौबे की धरा है. इस कला / साहित्य की उर्वरा ज़मीन में द्विवेदी युगीन बख़्शी जी के सरस्वती पत्रिका संपादन साथ देने वाले कवि साहित्यकार इंदु जी जैसे मनीषी हुए हैं जो सामाजिक चेतना और मानवीय मूल्यों के जीवंत दस्तावेज है. विशेष अतिथि महेंद्र ठाकुर ने इंदु जी की कविताओं के काव्य – संग्रह प्रकाशन की बात कही.
महापौर मधुसूदन यादव ने नगर के मूर्धन्य साहित्यकारों को चिन्हित व प्रतिष्ठा देने वाले इस आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि राजनांदगांव के दानवीर राजाओं ने नगर की जनता के लिए रानी सागर जैसे विशाल तालाब का निर्माण कराया गोंड राजाओं के कहने पर उनके आराध्य बूढा देव के नाम पर बूढ़ा सागर तालाब भी अस्तित्व में आया. उन्होंने बताया कि इसकी खुदाई करने वाले आदिवासियो में प्रमुख व्यक्ति रेवा के नाम पर नगर में आदिवासी वार्ड रेवाडीह बसा हुआ है
छत्तीसगढ़ी कहावतें व मुहावरो के धनी
विशेष अतिथि कथाकारा सुभदा मिश्र ने इंदु को प्राध्यापक व गुणी साहित्य साधक बताया इसी तरह छत्तीसगढ़ साहित्य समिति की संरक्षक व समाज सेवी शारदा तिवारी ने कहा कि श्रद्धेय इंदु उनके पिता रज्जूलाल पांडे के गुरु थे. वे उनके पिता व विद्या चरण शुक्ल जी के साथ जनमोर्चा में रहे. उनका पांडे बुक डिपो में सदैव आना-जाना रहा. छत्तीसगढ़ी प्रेमी इंदू जी का उन्हें बहुत प्यार व संस्कार मिलता था. उनके पास छत्तीसगढ़ी कहावतें मुहावरो का भंडार था जिसका वह अपनी बातों में उपयोग करते थे. संरक्षक अशोक चौधरी ने इंदू जी की जन्म शताब्दी वर्ष पर नमन करते हुए उन्हें बहुत ही गुनी व सज्जन व्यक्ति बताया.
इंदू जी ने दिया शरद कोठारी का नाम
सबेरा-संकेत के शैलेंद्र कोठारी (मुन्ना भैया) ने बताया कि इंदु जी उनके पिता के गुरु थे जिन्होंने उनके साहित्यिक झुकाव को देखते हुए उनका नाम पुखराज से बदल कर “शरद ” कोठारी करवाया. इसी तरह समाज सेवी साधना तिवारी ने अपने पति एवं पूर्व जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष विनोद तिवारी का गुरु व महिलाओं को बहुरिया कह कर सम्मान देने वाला सज्जन व्यक्ति बताया. समिति के संरक्षक आत्माराम कोशा “अमात्य” ने इंदु जी की साहित्य साधना को आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणा स्रोत बताया
नारी के प्रति उदात्त प्रेम का पवित्र उद्गार
कवि/ कथाकार मानसिंह मौलिक ने इंदू जी की कविताओं का वाचन करते हुए उनकी कविताओं में नारी के प्रति प्रेम की आसक्ति नहीं पवित्र भाव बताया . कवि एवं लोक कलाकार पप्पू “पौर्वात्य’ कलिहारी ने जहां इंदू जी की कविताओं को जीवन में विश्वास जगाने वाला व पाठक को भीतर तक स्पर्श करने वाला कहा वहीं साहित्य सुधि एवं समिति के समन्वयक राकेश इंदु भूषण ठाकुर ने अपने पिता को कृतज्ञता पूर्वक याद करते हुए उनकी साहित्यिक अवदान को न केवल मैथिली ठाकुर परिवार की धरोहर व साहित्य जगत के लिए भी अमूल्य निधि बताया. इस दौरान साहित्यकार इंदु जी के परिवार से जुड़े लोगों ने अपने अनुभव साझा किए .कार्यक्रम का कुशल संचालन थंगेश्वर साहू “मीत” व सुषमा शुक्ला “अंशुमन” ने किया जिनका शाल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया. इस दौरान वरिष्ठ कवि -शशिकांत द्विवेदी छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के केसीजी समन्वयक सियाराम साहू, बालोद के डा अशोक आकाश,नेता प्रति पक्ष संतोष पिल्ले, राजेश गुप्ता अग्रहरि, शिव वर्मा, कवि गिरीश ठक्कर “स्वर्गीय’, शत्रुघ्न सिंह राजपूत, चंद्रशेखर शर्मा,वीरेंद्र कुमार रंगारी, कवयित्री डॉ पद्मा साहू “पर्वणी”,रेशमी “रश्मि” साहू,हर्षा देवांगन,करिश्मा श्रीवास्तव ,अमलेंदु हाजरा सहित बड़ी संख्या में कवि साहित्यकार एवं साहित्य सुधि उपस्थित थे.
कार्यक्रम के अंत में आगत अतिथियों व सभी साहित्य सुधियो का आभार व्यक्त करते हुए संरक्षक अशोक चौधरी ने कहा कि इंदुभूषण ठाकुर की साहित्य साधना आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी और यह जन्म शताब्दी समारोह राजनांदगांव की साहित्यिक यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध होगा. उक्ताशय जानकारी मीडिया प्रभारी पप्पू पौर्वात्य’ कलिहारी ने दी.
