237 गांवों का मसाहती सर्वे, 50 हजार किसानों को मिलेगा पट्टा
हेमंत कश्यप
छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद भी बीस साल तक अबूझमाड़ आदिम पिछड़ेपन के साथ संसाधनों की बंदरबांट और नक्सली आतंक का पर्याय बना रहा, नारायणपुर, बीजापुर, दंतेवाड़ा का इलाका वनों और पहाड़ों से घिरे होने से यहां निवासरत जनजाति के लोग विकास के मामले में देश के बाकी विकासशील हिस्से से कटे रहे. अल्प संसाधनों व मात्रा में खेती करने वाले आदिवासी किसानों को कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था लेकिन विकास के तमाम दावों के बीच पूर्ववर्ती सरकारों ने कोई खास सुध नहीं ली. वनवासियों के जीवन में बदलाव तो तब आया जब भाजपा शासन के 15 साल बाद आई कांग्रेस सरकार के मुखिया भूपेश बघेल ने उनकी दिक्कतों को समझते हुए उनकी जमीन का सर्वे कराया. इसके चलते उन्हें वे सारी सुविधाएं मिलने लगीं जो प्रदेश के अन्य क्षेत्र के किसानों को मिल रही है.

पहाड़ों और जंगलों से घिरा बस्तर का अबूझमाड़ वर्षों तक देश दुनिया के लिए एक अबूझ पहेली की तरह रहा. कंदमूल और मड़िया पेज से गुजारा करने वाले वनवासियों के लिए प्रदेश के मैदानी क्षेत्र के किसानों की तरह खेती किसान अपने जीवन में बदलाव नामुमकिन तो नहीं मगर मुश्किल जरूर था. लेकिन अपनी जमीनी किसानी सोच से इसे मुमकिन खाया भूपेश सरकार ने आजादी के 75 साल बाद प्रदेश सरकार द्वारा 4 हजार वर्ग किमी में फैले अबूझमाड़ की कृषि भूमि का करवाया गया सर्वे आदिवासी किसानों के लिए वरदान साबित हो रहा है. सर्वे के बाद उन्हें अपनी जमीन का मालिकाना हक मिलने से न सिर्फ सरकारी योजनाओ का लाभ मिल रहा है बल्कि वे नक्सली धमक के बीच मुख्यधारा में भी जुड़ रहे हैं. जमीन के अंतरण की प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद अबूझमाड़ के करीबन 10 हजार आदिवासी किसानों को 50 हजार हेक्टेयर से अधिक भूमि का स्वामित्व प्राप्त होगा.
अबूझमाड़ में सर्वे से बदलाव
सरकार द्वारा करवाए जा रहे सर्वे से आदिवासियों के जीवन में बदलाव की नई उम्मीद जगी है. नक्सली इलाका अबूझमाड़ के तहत बस्तर संभाग के जिला नारायपुर, बीजापुर और दंतेवाड़ा के 275 से अधिक असर्वेक्षित ग्राम स्थित है. इन गांवों का कोई भी शासकीय अभिलेख तैयार नहीं है. मंत्री परिषद के निर्णय के अनुरुप सभी असर्वेक्षित गांवों के 50 हजार से अधिक लोगों को उनके कब्जे में धारित भूमि का मसाहती खसरा और नक्शा उपलब्ध कराया जाएगा. इससे किसान परिवारों के पास उनके कब्जे की भूमि का शासकीय रिकार्ड उपलब्ध हो जाने से व अपनी काबिज भूमि का अंतरण कर सकेंगे. इस तरह अबूझमाड़ क्षेत्र के तहत 10 हजार किसानों को 50 हजार हेक्टेयर से अधिक भूमि का स्वामित्व प्राप्त होगा.
नारायणपुर की भी बदलेगी तस्वीर
सरकार के सर्वे से नारायणपुर जिले के वनवासियों की भी तस्वीर बदल जाएगी. 27 अगस्त 2019 मंत्री परिषद के फैसले के पालन में छत्तीसगढ़ के राजस्व विभाग द्वारा नारायणपुर जिला में मसाहती सर्वे के लिए 246 गांवों को अधिसूचित किया गया है. इन ग्रामों में ओरछा ब्लाक के 237 ग्राम का मसाहती सर्वे किया जा चुका है. इसमें से नारायणपुर ब्लाक के असर्वेक्षित 9 गांवों का और ओरछा ब्लाक के 101 ग्रामों का सर्वे किया जा चुका है. अब तक 7 हजार 7 सौ से अधिक लोगों को मसाहती खसरा वितरण किया जा चुका है.
दो हजार किसान पहली बार बेचे धान
अबूझमाड़ में सर्वे के बाद पहली बार कई किसानों के चेहरे पर धानी चमक दिखाई दे रही है. चालू खरीफ सीजन में जिला प्रशासन द्वारा 2 हजार 193 किसानों ने मसाहती खसरा वितरित किया है. इनमें अधिकतर किसान पहली बार समर्थन मूल्य में सोसायटियों में धान बेच रहे हैं. नारायणपुर के ग्राम कंदाड़ी के किसान पप्पू पोटाई बताते हैं कि 3 एकड़ जमीन का मसाहती पट्टा मिलने से किस्मत बदल गई है. पहली बार 32 क्विंटल धान समर्थन मूल्य पर बेचने से पूरा परिवार खुश है. पहले जमीन के दस्तावेज नहीं होने से बिचौलिया डकार जाते थे.
पंजीकृत मसाहती किसानों की संख्या 2542 पहुंच चुकी है. 91 केन्द्रों में 3150 क्विं. धान की खरीदी इस खरीफ मौसम में की है. धान के अलावा किसानों को शासकीय योजनाओं के साथ कई अन्य लाभ मिलना भी शुरु हो गया है. इसके तहत 35 किसानों को 112.35 लाख रुपए के सोलर ड्यूल पंप दिए गए. इससे 87 एकड़ भूमि में लाभ मिलेगा. साथ ही 493 प्रकरणों में केसीसी ऋण के माध्यम से 127.97 किसानों लाख रुपए और 1700 उद्यानिकी टूल किट, बीज मिनी किट भी वितरित किए गए. इसी तरह इनमें 2731 हितग्राहियों को जाति प्रमाणपत्र, 1573 को निवासी प्रमाणपत्र प्रदान किए गए. मसाहती किसानों के तहत 249 किसानों के भूमि समतलीकरण किया जा रहा है. इससे सिंचाई के साथ पशुओं के लिये शेड बना सकेंगे। इन किसानों को 11370 किलो धान के, 536 किलोग्राम मसूर व 470 सरसों के बीज भी वितरित किए गए.
किसानों को मिल रहा मालिकाना हक
अबूझमाड़ के वन क्षेत्रों के किसानों के लिए सर्वे एक बड़ा बदलाव साबित हो रहा है. सालों से सैकड़ों किसान वन इलाकों के भीतर काबिज भूमि पर खेती करते आ रहे थे. लेकिन इस क्षेत्र में भूमि का सर्वे नहीं होने से उनके पास भूमि संबंधी कोई दस्तावेज नहीं थे. इस कारण न तो कोई शासकीय योजना का लाभ ले पाते थे और न ही उन्हें खेती किसानी के लिए बैंकों से ऋण ही मिल पाता था. कांग्रेस सरकार ने ऐसे किसानों की तकलीफ को समझते हुए नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ अंचल में सर्वे का काम शुरु कराया. किसानों को मसाहती पट्टे दिए जाने से उन्हें मालिकाना हक मिल रहा है. अब वे आम किसानों की तरह सरकारी सुविधाओं के लाभ से स्वावलंबी बनने का सपना देख रहे हैं.
