रायपुर : छत्तीसगढ़ का पहला एथेनाल प्लांट इसी वर्ष अप्रैल से शुरू होने वाला है. कवर्धा के भोरमदेव कारखाने के पास इसे शुरू करने की तैयारी है. फिलहाल यह प्लांट धान से नहीं गन्ने से शुरू होगा. इससे रोजाना 80 किलोलीटर एथेनाल निकालने की तैयारी है. प्रदेश में धान से एथेनाल निकालने के लिए तैयारी है मगर अभी तक भारत सरकार से अनुमति नहीं मिल पाई है.

11 जनवरी को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपने प्रदेशव्यापी भेंट-मुलाकात कार्यक्रम के तहत सिहावा विधानसभा के ग्राम खिसोरा पहुंचे थे. कार्यक्रम के दौरान किसान विमल नेताम ने मुख्यमंत्री से निवेदन किया कि एक एकड़ में 15 क्विंटल की जगह 20 क्विंटल लिया जाए. इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी मंशा है कि वे किसानों से एक-एक दाना धान खरीदें और रबी फसल का भी धान खरीदें. उन्होंने कहा कि सरप्लस धान का एथेनाल बनाने की अनुमति भारत सरकार से मिलने पर दोनों सीजन में धान का एक-एक दाना खरीदेंगे.
अधिकारियों ने बताया कि गन्ना से एथेनाल निकालने के लिए सरकार पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) माडल पर काम करेगी. ग्लोबल निविदा के बाद भोरमदेव सहकारी शक्कर कारखाने और एनकेजे बायोफ्यूल के बीच समझौता हुआ है. सीजन में गन्ने के रस से और आफ सीजन में मोलासिस से एथेनाल बनेगा.
बताया जा रहा है कि कारखाने से लगे 35 एकड़ में बन रहे एथेनाल प्लांट के आसपास भी गन्ना लगाया जाएगा. प्लांट के लिए यह 80 प्रतिशत काम हो चुका है. यहां 450 छोटी गुड़ फैक्ट्रियां हैं, जिनमें 250 चालू हैं.
पूरे देश में यह पहला राज्य जहां एथेनाल प्लांट की होगी स्थापना
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के कृषि पर आधारित एथेनाल प्लांट प्राथमिकता वाली योजनाओं में शामिल है. पीपीपी माडल से स्थापित होने वाले देश के पहले प्लांट की स्थापना से क्षेत्र में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर उत्पन्न होंगे और क्षेत्र में आर्थिक समृद्धि का आधार मजबूत होगा. किसानों को गन्ना मूल्य का समय पर भुगतान सुनिश्चित होगा.
