प्रदेश कांग्रेस की सचिव डॉ. निवेदिता चटर्जी ने दिया इस्तीफा, बैज को लिखा पत्र
रायपुर- छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी की सचिव डॉ. निवेदिता चटर्जी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज को पत्र लिखा है.
डॉ. चटर्जी ने अपने पत्र में लिखा है कि विगत एक साल समय बहुत कठिन गया. पर मैं अकेले अपने परिवार के पास खड़ी रही कोई कांग्रेसी पूछ-ताछ नही किये कॉल आया करता था, कार्यक्रमो के लिए, प्रचार के लिए पर एक जवाब देती रही मेरे मम्मी अत्यंत गंभीर टाइप के कैंसर से पीड़ित थी. पर समय इस विश्लेषण का भी मिला कि आखिर जो पद मुझे पिछले 2014 से मिला हुआ है इस पद की गरिमा क्या है और जिम्मेदारी क्या क्या मिली.
एन.एस.यू.आई., यूथ कांग्रेस, महिला कांग्रेस और प्रदेश कांग्रेस में अच्छा जिम्मेदारी मिली पर 2023 तक फिर धीरे धीरे पद स्थिर हो गया. परंतु मेरे से छोटे और उतना अनुभवी नही बोलूंगी वो आगे बढ़ते गए. मैं तो आज भी पार्टी के लिए हूँ पर पार्टी मेरे आस पास नही दिखती. कारण क्या ये तो पार्टी ही जाने . कोई भी पद की दावेदारी की, नही मिला क्या कारण ये तो पार्टी जाने. पर एक डिप्रेशन से लगता है. इस पद में 11 साल निकाला. कोई भी जिम्मेदारी मिली अच्छे से निभाया, योगदान दिया पर मैं सचिव ही रह गयी.
यहाँ तक वार्ड पार्षद की टिकिट भी मेरे कोलोनी में एक परिवार के बहु को दिया गया जो टिकिट लेने के बाद सदस्य बनी, हारने के लिए मुझे ये भी नही पूछा गया कि जीतेंगे की नही. जीते हुए सीटों को हारते देखा. खैर पार्टी ऐसे गलत लोगो को टिकिट दे सकती है, पर पार्टी के पद अधिकारियों को नहीं देती. खासकर मुझे. दक्षिण रायपुर हार गए क्यों? पंकज विक्रम वार्ड हार गए क्यों? दक्षिण रायपुर के जितने वार्ड जीते थे जब 2014 में सचिव पद मिला आज लगभग सब हार गए क्यों ?
ए.आई.सी.सी. में सचिव पद का मूल्य बहुत है, जिम्मेदारी भी वैसी दी जाती है. पर प्रदेश में सचिव बहुत हैं पर जिम्मेदारी कुछ को क्यों ? हां मैं एस.सी., एस. टी., ओ.बी.सी. कुछ नही जनरल हूँ तो क्या मुझे पद उनती मिलने का अधिकार नही ? जिम्मेदारी मांग रहे हैं जो मेरे अनुभव अभिज्ञता के अनुकूल हो कोई कंपनी प्रोमोशन नही मांगते पद अधिकारी. अब लिखना तो बहुत है पर पार्टी को समझना चाहिए जिसने पार्टी के लिए बहुत कुछ जीवन मे सहा वो भी पद से इस्तीफा दे रही है. आप स्वयं मेरे सामने ब्लाक अध्यक्ष, विधायक, संसद और अब प्रदेश अध्यक्ष 2014 से अब तक पर मैं सचिव ही रह गयी. इससे तो मैं साधारण कार्यकर्ता रहूं वो ही अच्छा है. मेरे इस सचिव पद से इस्तीफे को मंजूर करें.

