परेशान आदिवासी किसान ने कीटनाशक पीकर की आत्महत्या करने की कोशिश

कोरबा- जिले में धान बिक्री नहीं होने से परेशान एक आदिवासी किसान ने तहसील परिसर में कीटनाशक पीकर आत्महत्या करने की कोशिश की. यह घटना हरदी बाजार थाना क्षेत्र की है. किसान की पहचान कसियाडीह झांझ गांव के 55 वर्षीय किसान बैसाखु राम मरकाम के रूप में हुई है. जिन्हें गंभीर हालत में कोरबा के मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया है जहां उनका इलाज चल रहा है. खबरों के अनुसार परिजनों और ग्रामीणों ने बताया है कि किसान पिछले डेढ़ महीने से धान बेचने की कोशिश कर रहा था. वह पटवारी से लेकर तहसील कार्यालय तक गया लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ.
वहीं इस मामले को लेकर भिलाई नगर विधायक देवेंद्र यादव ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि सरकारी षडयंत्र के चलते प्रदेश के किसान आत्महत्या को मजबूर हैं. पहले खाद के लिए रुलाया, फिर किसानों का रकबा काटा, फिर धान तौलाई में गड़बड़ी की, अब टोकन के नाम पर किसानों को खून के आंसू रुलाया जा रहा है.
कोरबा जिले के किसान बैसाखू मरकाम के पास 3 एकड़ 27 डिसमिल खेत है याने करीबन 70 क्विंटल धान बेचने पात्र हैं. लेकिन सरकारी षडयंत्र कर ऑनलाइन रिकॉर्ड में जमीन रकबा कम कर दिया गया, जिसके कारण बैसाखू मात्र 15 क्विंटल धान ही बेच पाए हैं. सुधार कार्य कराने के लिए वह तहसील कार्यालय के चक्कर काट रहे थे लगातार बेरंग लौटने और हताशा से उन्होंने तहसील ऑफिस में खुदकुशी करने जहर पी लिया. कोरबा में पिछले 24 घंटों में दो किसानों ने आत्महत्या की कोशिश की, धान खरीदी प्रारंभ होने के बाद प्रदेशभर में दर्जनों ऐसे मामले सामने आ रहे हैं.
