भाजपा और कांग्रेस के बीच बेकाबू जंग, जमीन हड़पने के मामले में रोज नया खुलासा
बिजली नगरी कोरबा में बाहुबली राज चल रहा है. सत्ता किसी की हो, स्थिति में कोई अंतर नहीं आता. बाहुबलि चुनाव जीतते भी हैं और जितवाते भी हैं. उनके खिलाफ आरोपों की एक लंबी सूची है. दर्जनों मामलों में एफआईआर भी हैं. यह बात और है कि उनके खिलाफ कभी कोई दोष सिद्ध नहीं हो सका. उनका दावा है कि उनकी मर्जी के खिलाफ जा कर न तो कोई कलेक्टर यहां टिक सकता है और न ही कोई मंत्री-संत्री यहां अपनी चला सकता है. पिछले चुनाव के दौरान नामांकन पत्र में उन्होंने स्वयं ऐसे अपराधों की सूची संलग्न की थी जिसमें उन्हें आरोपित किया गया है. जी हां! हम बात कर रहे हैं छत्तीसगढ़ के राजस्व मंत्री और कोरबा विधायक जयसिंग अग्रवाल की. फिलहाल उनका नाम कोरबा में बसाए जा रहे ट्रांसपोर्ट नगर पर छिड़े विवाद में सामने आ रहा है.

राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल फिलहाल बरबसपुर में प्रस्तावित ट्रांसपोर्ट नगर को झगरहा शिफ्ट करने के नए प्रस्ताव पर भड़के हुए हैं. बरसपुर दौरे में जब उनका सामना तहसीलदार और उप-तहसीलदार से हुआ तो उन्होंने वहीं पर दोनों को फटकार लगा दी. इसके साथ ही सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी वायरल हो गया. इस वीडियो में अग्रवाल कोरबा कलेक्टर को हटाने की धमकी देते नजर आ रहे हैं. वीडियो में वो कहते नजर आ रहे हैं, “कलेक्टरी करने आया है या घूसखोरी करने”. उन्होंने अधिकारियों के सामने ही कलेक्टर को खुली चुनौती दे डाली. उन्होंने कहा, “ये ट्रांसपोर्ट नगर कहीं शिफ्ट नहीं होगा, अगर कोई शिफ्ट होगा तो वो है कलेक्टर.” दरअसल मंत्री के बुलावे पर कलेक्टर संजीव झा मौके पर नहीं पहुंचे थे. मंत्री ने कहा कि उन्होंने मुख्य सचिव से पता किया है कलेक्टर ने कोई छुट्टी नहीं ली है और ना ही उसकी तबीयत खराब है. मौके पर एडीएम विजेंद्र पाटले, एसडीएम सीमा पात्रे और तहसीलदार मुकेश देवांगन मौजूद थे.
वैसे कलेक्टरों के साथ उनकी ‘नूरा कुश्ती’ का यह कोई पहला मौका नहीं है. इससे पहले भी कलेक्टर रजत कुमार से इनका विवाद हो चुका है. यह विवाद सड़क निर्माण ठेका को लेकर हुआ था. इसके बाद कलेक्टर पी दयानंद से एजुकेशनल हब स्याही मुंडी के ठेका को लेकर विवाद हुआ, कलेक्टर किरण कौशल से डीएमएफ व निर्माण कार्यों को लेकर, कलेक्टर रानू साहू से कुसमुंडा सड़क निर्माण का भुगतान व डीएमएफ को लेकर और अब वर्तमान कलेक्टर संजीव कुमार झा से बांधाखार हरदी बाजार सड़क निर्माण भुगतान और ट्रांसपोर्ट नगर के नए प्रस्ताव को लेकर मनमुटाव सामने आया है.
क्या है विवाद की नई वजह
कोरबा में नया ट्रांसपोर्ट नगर बसाया जाना है. इसके लिए पहले बरबसपुर के डंप यार्ड को चिन्हित किया गया था. तीन साल पहले विधानसभा अध्यक्ष डॉ चरणदास महंत ने यहां टीपी नगर के लिए भूमिपूजन किया था. इसके लिए 72 एकड़ भूमि नगर निगम को आवंटित कर दी गई थी. नगर निगम ने इसके एवज में शुल्क भी जमा करा दिया है. राजपत्र में इसका प्रकाशन हो चुका है. मास्टर प्लान में भी भूमि प्रस्तावित हो चुकी है. हाल ही में कोरबा तहसीलदार ने शासन को एक पत्र लिखा है. पत्र में कहा गया है कि बरबसपुर के जिस भूमि को प्रस्तावित किया गया है, वह मसाहती गांव है. निजी भूमि को लेकर यहां दिक्कत आ सकती है. पत्र में टीपी नगर का स्थान बदल कर उसे झगरहा करने का प्रस्ताव दिया गया है.
विभिन्न स्रोतों से मिली जानकारी के अनुसार बरबसपुर में उपलब्ध लगभग 80 एकड़ भूमि में से 25 एकड़ भूमि राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल के करीबियों एवं परिजनों के पास है. 20 खसरों में बंटी इस जमीन का कुल रकबा 9.102 हेक्टेयर यानी 25 एकड़ से भी ज्यादा है. यदि ट्रांसपोर्ट नगर यहां बनता है तो इन जमीनों का करोड़ों रुपए मुआवजा मिलेगा. यदि टीपी नगर यहां नहीं आता तो इन भूस्वामियों को करोड़ों का नुकसान हो जाएगा.
दरअसल बरबसपुर का इलाका, जहां टीपीनगर प्रस्तावित है, वो डंपिंग यार्ड के रुप में उपयोग किया जाता रहा है. इस इलाके में शहर भर का कचरा डंप किया जाता है. यहां उपलब्ध लगभग 80 एकड़ भूमि में से लगभग 40 एकड़ जमीन पर ट्रांसपोर्ट नगर बसाने का प्रस्तावित था. इसकी अनुमति कांग्रेस की महापौर रेणु अग्रवाल ने टाउन एंड कंट्री प्लानिंग से भी ले ली थी. रेणुका राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल की पत्नी हैं. ट्रांसपोर्ट नगर बसने से पहले ही शहर के प्रभावशली लोगों ने जमीन अपने नाम करा ली है. लगभग 25 एकड़ भूमि मंत्री पुत्र, बहू, उनके रिश्तेदार और मंत्री पुत्र के पार्टनर महेश भावनानी व उनकी फर्म के नाम है.
बरबसपुर के हमाम में दोनों….
बरबसपुर के हमाम में भाजपा और कांग्रेस दोनों के दबंग नंगे हैं. राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल और उनके करीबियों पर आरोप है कि उन्होंने मुआवजे के लालच में बरबसपुर में जमीनें खरीदी थीं. पर वास्तविकता यही है कि बरबसपुर में भाजपा और कांग्रेस दोनों के नेताओं और उनके करीबियों की जमीनें हैं. जिला कांग्रेस कमेटी कोरबा ग्रामीण के अध्यक्ष सुरेन्द्र प्रताप जायसवाल ने एक विज्ञप्ति जारी कर खलबली मचा दी है. उन्होंने बताया कि कोरबा शहर को भारी यातायात के दबाव और प्रदूषण से मुक्ति दिलाने के लिए ट्रांसपोर्ट नगर अन्यत्र शिफ्ट करने पर चर्चा हुई थी. इस बैठक में तत्कालीन सांसद स्व. डॉ बंशीलाल महतो एवं कोरबा नगर विधायक जयसिंह अग्रवाल भी उपस्थित थे. तब विधायक अग्रवाल ने ट्रांसपोर्ट नगर को रूमगरा में शिफ्ट करने का प्रस्ताव दिया था. पर सांसद महतो ने इसका विरोध करते हुए बरबसपुर का प्रस्ताव दिया था. इसकी जो वजह उस समय सामने आई थी वह बताती है कि डॉ बंशी लाल महतो के सुपुत्र विकास रंजन महतो, भाजपा के वरिष्ठ नेता गोपाल मोदी सहित अनेक भाजपाइयों ने बरबसपुर में जमीन खरीद रखी थी. जिन लोगों के पास जमीनें थीं उनमें गोपाल मोदी, कौशिल्या, दिनेश मोदी, नवीन पटेल, नीरज पटेल, शंकर लाल पटेल, भावेश पटेल, विकास रंजन महतो, विकास अग्रवाल, पवन अग्रवाल, पायल अग्रवाल आदि के नाम प्रमुख हैं.
पार्टी से भी ऊपर उठ गए जयसिंह
जयसिंह ने अपना कद इतना बड़ा कर लिया है कि कलेक्टर तो कलेक्टर, अगर उनकी मर्जी के खिलाफ गए तो वे पार्टी के वरिष्ठ नेताओं तक को फूंक मारकर उड़ा देते हैं. पिछले महीने जब कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी पीएल पुनिया ने विधायकों की परफार्मेंस रिपोर्ट की चर्चा छेड़ी थी तो जयसिंह ने साफ कह दिया था कि उन्हें नहीं पता कि विधायकों के परफार्मेंस की कोई सर्वे हुई है. उन्हें ऐसी किसी रिपोर्ट की जरूरत नहीं है. वो ऐसी रिपोर्ट को नहीं मानते. बताया जाता है कि उन्होंने यहां तक कह दिया कि पुनिया को उन्होंने हटावाया था और शैलजा भी उनके इशारे पर ही छत्तीसगढ़ प्रभारी बनाई गई हैं. यह और बात है कि पुनिया अपना कार्यकाल पूरा करने के बाद यहां से गए हैं.
ननकी-जयसिंह और डीएमएफ
छत्तीसगढ़ के पूर्व गृह मंत्री ननकीराम कंवर ने राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. उन्होंने कहा कि कलेक्टर पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाने से पहले जयसिंह अग्रवाल खुद के अंदर झांक कर देखें. उनके खिलाफ दर्जनों मामले दर्ज हैं. दरअसल, जरी तहसील के उद्घाटन समारोह में विधानसभा अध्यक्ष चरणदास महंत, कोरबा सांसद ज्योत्सना महंत की उपस्थिति में राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने कलेक्टर को भ्रष्टाचारी घोषित कर दिया था जिसका वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हुआ था. इसके बाद ननकीराम कंवर ने कहा कि मंत्री जयसिंह अग्रवाल पर सड़क, डामर घोटाले और अन्य कई घोटाले के आरोपों में अलग-अलग थाना में उनके खिलाफ केस दर्ज हैं. लेकिन राजस्व मंत्री आईना ना देखकर कोरबा कलेक्टर पर आरोप लगा रहे हैं. मंत्री बनने के बाद जयसिंह अग्रवाल और उनके रिश्तेदारों के द्वारा जमीन घोटाले का एक इतिहास लिखा गया है.
दोनों के बीच डीएमएफ को लेकर भी तलवारें खिंची हुई हैं. ननकीराम कंवर ने जयसिंह अग्रवाल पर डीएमएफ राशि के दुरुपयोग का आरोप लगाया है. हालांकि, जयसिंह अग्रवाल ने इसे कोई तवज्जो नहीं दी है. भाजपा शासनकाल में जयसिंह अग्रवाल खुद भी डीएमएफ की भारी भरकम राशि पर सवाल उठाते रहे हैं. कंवर ने आरोप लगाया है कि डीएमएफ राशि का जमकर दुरुपयोग किया जा रहा है. क्षेत्र चाहे शिक्षा का हो या निर्माण कार्य का, पंचायत सचिव एकल हस्ताक्षर से नियम के विरुद्ध राशि निकाल रहे हैं. जिन मदों पर शासन पहले से ही राशि आवंटित कर रहा है उन पर भी मनमाने तरीके से खर्च किया जा रहा है. 2015-16 से लेकर 2019-20 तक प्रतिवर्ष इस निधि में क्रमशः 59.18 करोड़, 182.20 करोड़, 454.23 करोड़, 160.44 करोड़ और 354.55 करोड़ रुपए आए थे. इस राशि का प्रपोजल जिले में ही तैयार होता है. कई कार्य जिला स्तर पर ही पास किये जाते हैं. पक्ष हो या विपक्ष, सभी पार्टियों में ऐसे नेता हैं जो ठेकेदारी करते हैं. जब जिसकी सरकार होती है, उसका पलड़ा भारी रहता है. इन्हीं ठेका कार्यों को लेकर स्थानीय विधायकों, सांसदों और मंत्रियों की प्रशासन से ठनी रहती है.
इस दबंगई की मंशा क्या?
राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल का दावा है कि पूर्व कलेक्टर किरण कौशल, रानू साहू और प्रभावशाली राज्य प्रशासनिक सेवा अधिकारी सौम्या चौरसिया को उन्होंने ही निपटाया है. राजस्व मंत्री अपनी ही सरकार के मुख्यमंत्री की सहायक सचिव सौम्या चौरसिया को ईडी जांच में उलझाकर क्या संदेश देना चाह रहे हैं? क्या यह भी पावर पालीटिक्स का ही एक हिस्सा है जिसमें वे सभी को अपने अंगूठे के नीचे रखना चाहते हैं. वैसे जयसिंह अग्रवाल सांसद चरणदास महंत के करीबी बताए जाते हैं. यह भी कहा जाता है कि स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव से भी उनके नजदीकी संबंध हैं. क्या छत्तीसगढ़ में बाहुबली पालिटिक्स का आगाज हो रहा है? क्या कोरबा इसका केन्द्र होगा.
मेरे शहर में गुंडई नहीं चलेगी
“एक बात आप लोग जान लाजिए, कोई भी अधिकारी, कितना भी पावरफुल क्यों न हो, मेरे शहर में मैं मनमानी, गुंडागर्दी नहीं चलने दूंगा. बहुत हो गया. ट्रांसपोर्ट नगर तो शिफ्ट नहीं होगा, कलेक्टर यहां से शिफ्ट होगा. बता देता हूं मैं. अभी एक सप्ताह का वक्त देकर जा रहा हूँ. अगर सप्ताह में नहीं हुआ तो फिर बताता हूँ।”
- जयसिंह अग्रवाल, स्थानीय विधायक एवं राजस्व मंत्री
जमीन हड़पने के तोड़े रिकार्ड
“राजस्व मंत्री ने जमीन हड़पने के सारे रिकार्ड तोड़ दिये हैं. जमीनों का खसरा नंबर बदल जाता है, पीछे के प्लाट रोड किनारे पहुंच जाते हैं. राजस्व विभाग की जमीन से लेकर वन विभाग तक की जमीन पर मंत्री के लोगों ने कब्जा कर लिया है. निजी जमीन को भी इन लोगों ने नहीं बख्शा है. भलपहरी गांव में अनुसूचित जाति के पंचराम की जमीन को ठंडाराम के नाम पर चढ़ा दिया गया. विरोध के बाद तहसीलदार ने इसे किसी और के नाम पर चढ़ा दिया है. कुआंभट्ठा रोड में रघुवीर की सड़क किनारे की जमीन पीछे चली गई. जिस भूखण्ड पर वह पिछले 20 वर्ष से काबिज है, उसे अब मंत्रीजी के करीबियों के नाम पर बताया जा रहा है. मुख्यमंत्री मामले का संज्ञान नहीं ले रहे हैं. इसे क्या समझा जाए? मंत्री का खौफ इतना है कि अधिकारी भी चुप ही रहते हैं, जो विरोध करता है, उसे सार्वजनिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है. इस मामले की ईडी से जांच की मांग की गई है.”
- ननकी राम कंवर, पूर्व गृहमंत्री
