छत्तीसगढ़ महतारी परिसर सेक्टर-2 में रजत जयंती मनाया गया, गौरवशाली इतिहास को किया याद

भिलाई- छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना के 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में रजत जयंती वर्ष व छत्तीसगढ़ मातृशक्ति संगठन की स्थापना के अवसर पर 1 नवंबर को छत्तीसगढ़ महतारी परिसर सेक्टर-2 भिलाई में भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम का शुभारंभ सर्वसमाज के लोगों द्वारा राजकीय गीत व छत्तीसगढ़ महतारी की शैलचित्र पर माल्यार्पण एवं पूजा-अर्चना कर किया. कार्यक्रम को उद्बोधन करते हुए समाजसेवी राजेन्द्र परगनिया ने छत्तीसगढ़ के विकास में अहम योगदान देने वाले हस्तियों का स्मरण किया. उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के प्रथम स्वप्नदृष्ट डॉ.खूबचंद बघेल थे उन्होंने अलग छत्तीसगढ़ राज्य की परिकल्पना को आकार दिया, छत्तीसगढ़ी भाषा और संस्कृति के संरक्षण के लिए काम किया और छत्तीसगढ़ भ्रातृसंघ की स्थापना की. उन्होंने नमक सत्याग्रह, पंक्ति तोड़ो आंदोलन जैसे कई आंदोलनों में भाग लिया.
राजेन्द्र परगनिया ने कहा कि पूर्व सांसद चंदूलाल चंद्राकर का योगदान भरपूर रहा है. भिलाई स्टील प्लांट में पोल मिल्टन वाले सात जिलों में जो भर्ती प्रक्रिया प्रारंभ हुई थी लेकिन अब वह भर्ती पूरी तरह से बंद हो गया है. उन्होंने कहा कि चंदूलाल चंद्राकर जी ने सन् 1990 के दशक में छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना के लिए प्रयास किया और 1993 में गांधी के रास्ते पर शांतिपूर्ण ढंग से आंदोलन चलता रहा और 1995 में उनकी अंति यात्रा हुई.
बता दें कि वर्ष 1970 में दुर्ग लोकसभा क्षेत्र से उपचुनाव जीतकर चंदूलाल चंद्राकर पहली बार सांसद बने. वे लोकसभा हेतु पाँच बार निर्वाचित हुए. नागरिक उड्डयन, पर्यटन, कृषि एवं ग्रामीण विकास जैसे महत्वपूर्ण विभागों के मंत्री का दायित्व संभालते हुए उन्होंने छत्तीसगढ़ और देश की सेवा की. वे अखिल भारतीय कांग्रेस समिति के अध्यक्ष रहे.
वर्ष 1992 में चंदूलाल चंद्राकर ने छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण सर्वदलीय मंच का गठन किया.

श्री परगनिया ने छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा के संस्थापक कॉमरेड शंकर गुहा नियोगी के बारे मे कहा कि छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा भारत में मज़दूरों और राजनीतिक संघर्षों के लिए प्रेरणा रहा है. छत्तीसगढ़ के भिलाई-दुर्ग क्षेत्र में काम करते हुए, सीएमएम ने दल्ली-राजहरा खदानों के मज़दूरों के संघ, छत्तीसगढ़ माइंस श्रमिक संघ (सीएमएसएस) और खेतिहर मज़दूरों के संघ, छत्तीसगढ़ ग्रामीण श्रमिक संघ के साथ मिलकर, क्षेत्र के औद्योगिक और खदान मज़दूरों, खेतिहर मज़दूरों और आदिवासियों को उनकी आर्थिक माँगों के लिए संघर्ष करने और एक परिवर्तनकारी राजनीति के आधार पर संगठित किया. उन्होंने सामाजिक मुद्दों पर विभिन्न अभियान चलाया. उन्होंने बताया कि 1961 से लेकर 1967 तक भिलाई स्टील प्लांट के कोको वन (“एडजस्ट हाउस”) में काम करते थे उनके अंदर इतनी ज्वाला थी कि खासकर गरीब तबको नवजवान, मजदूरों के लिए सोचतें रहते थे. उन्होंने कोको वन ब्लास्ट कमेटी भी बना लिया था साथ ही जीवन-यापन के गांव से बकरा लाकर व्यवसाय करते थे. उन्होंने जब छत्तीसगढ़ के लोगों के साथ हो रहे शोषण को देखा तो उन्होंने राजहरा में मजदूरों का आंदोलन किया और आंदोलन को शंकरगुहा नियोगी ने लीड किया.
इस अवसर पर अश्लेष मरावी, माधुरी अहिरवार, ममता वर्मा, भुनेश्वरी नायक, डालिया ढाले, पल्लवी ठाकुर, लोकेश्वरी ध्रुव, अन्नू जागंड़े, कनकलता नाग, गोमती वर्मा, एच.पी. तिवारी, जनकलाल साहू, एन.आर.बंजारे, दीपक अधिकारी, डी.टी. रेड्डी, पी. जग्गा राव,जी.एस.देवदास, शिशुपाल सिंह, शुभम कुमार यादव, तुलसी राम साहू, चंद्रभान सिंह ठाकुर, शिखर परगनिया, कार्यक्रम का संचालन चंद्रकला तारम ने किया. आभार व्यक्त बी.पी चौरसिया ने किया.
