सेंटपाल्स स्कूल के 1973 बैच के छात्रों का गोल्डन जुबली मिलन समारोह
रायपुर : यह आवाज तो सुनी-सुनी लग रही है, अरे यार तू तो छोटा हो गया, पहले तो अमिताभ बच्चन जैसे लंबा था, जैसी हंसी-ठिठोली की गूंज राजधानी के एक होटल में आयोजित कार्यक्रम से आ रही थी. मौका था सेंटपाल्स स्कूल के 1973 बैच के छात्रों के गोल्डन जुबली मिलन समारोह का. जीवन के 60 वर्ष से ज्यादा उम्र पूरे कर चुके वरिष्ठ नागरिकों के ग्रुप ने बचपन को फिर से जीया.

माहौल ऐसा था कि 50 वर्ष बाद मिलने की वजह से एक-दूसरे को पहचानने में ही काफी वक्त लग गया. फिर क्या था हंसी-ठिठोली का दौर शुरू हो गया. साइकिल से स्कूल पहुंचना, कक्षा में बैठकर कामेडी करना, शिक्षक के पूछने पर बात को घूमाकर डांट से बचने का प्रयास करना जैसी यादों में खोए रहे.
देश-विदेश में रह रहे लोग स्कूल से निकलने के बाद पहली बार मिले. नाम और पहचान बताने पर गले मिलकर पुराने दिनों को याद किया. स्कूल को संवारने के बारे में चर्चा भी हुई. संयोजक निरंजन सिंह यादव ने बताया कि गोल्डन जुबली के लिए चार महीने से तैयारी चल रही है. परिवार के साथ आए लोगों ने अपना परिचय दिया. साथ ही सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हुआ.
लंदन में रह रहे सरोजेंदु मजुमदार गोल्डन जुबली में शामिल हुए. उन्होंने बताया कि राजा तालाब की बंगाली कालोनी में हमारा घर था. कक्षा में हमेशा प्रथम आता था. यहां से पढ़ने के बाद आइआइटी खड़गपुर से कंप्यूटर साइंस में इंजीनियरिंग की. इसके बाद कोलकाता में नौकरी की. फिर लंदन चला गया. वहीं पर पत्नी की भी नौकरी थी. जब कभी निराशा हुई तो दोस्त विनोद परगनिहा को काल करता हूं. विनोद बचपन से ही कामेडी करता था. जब भी बात होती है तो एक घंटे से भी ज्यादा बात करते हैं.
दो हजार करोड़ की कंपनी, शेयर बाजार में प्रसिद्ध और मोतीलाल ओसवाल समूह के सह-संस्थापक रामदेव अग्रवाल ने बताया कि बचपन में जेब में पैसे नहीं होते थे, लेकिन जिंदगी बहुत बिंदास थी. गोल बाजार में घर था. स्कूल की छुट्टी होने के बाद घर जाकर कुछ खाते थे, सीधे साइकिल उठाकर दोस्तों के घर निकल जाते थे.
उस समय रायपुर में गिनती की कारें थीं, कार की नंबर प्लेट से हम लोग जान जाते थे कि कौन है. नागपुर से बीकाम करने के बाद चार्टर्ड अकाउंटेंट बन गया. शेयर बाजार में रुचि थी, लेकिन जेब में पैसा नहीं था. पढ़ाई के दौरान ही मोतीलाल ओसवाल से मुलाकात हुई. इन्हीं के साथ मिलकर 1987 में शेयर बाजार में निवेश शुरू कर दिया. प्रतिदिन 100-200 रुपये कमा लेते थे. कभी फायदा-कभी घाटा होता गया. इस तरह शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव भरे दिन गुजरते गए. आज हमारी कंपनी की बाजार वैल्यू दो हजार करोड़ रुपये है.
