शरद पूर्णिमा पर कविताओं में बिखरी श्री कृष्ण के महारास की छटा

राजनांदगांव- छत्तीसगढ़ साहित्य समिति द्वारा शरद पूर्णिमा अवसर पर विश्व के आदि कवि महर्षि बाल्मीकि को याद करने साहित्यिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया. शहर के पुराने विश्राम गृह में आयोजित इस साहित्यक आयोजन में वरिष्ठ चिंतक/बुद्धजीवी अशोक चौधरी, समाज सेवी महिला एवं अधिवक्ता शारदा तिवारी, साहित्यकार प्रभात तिवारी, दिग्विजय कालेज हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ शंकर मुनि राय, कला/ साहित्य सुधि राकेश इंदूभूषण ठाकुर आदि की उपस्थिति में मां सरस्वती शारदे की पूजन कर विश्व के आदि कवि वाल्मीकि को उनकी महाकाव्य रामायण के लिए कृतज्ञता पूर्वक याद किया गया और
आदि कवि की जीवनी पर चर्चा करते हुए कवियों ने भगवान श्री कृष्ण के महारास की छटा बिखेरी.

इस दौरान श्री चौधरी ने बताया कि शिशु अवस्था में कैसे एक भीलनी ने बाल्मीकि को उठाकर ले गई और उसे रत्नाकर नाम का डाकू बना दिया जिसे नारद जी ने ज्ञान देकर रामायण का रचयिता महर्षि बाल्मीकि बना दिया.
शरद पूर्णिमा व बाल्मीकि श्रद्धा और आस्था का विषय
वरिष्ठ साहित्यकार कुबेर साहू ने शरद पूर्णिमा व महर्षि बाल्मीकि पर अपनी बात कहते हुए इसे श्रद्धा व आस्था का विषय बताया और कहा कि ईसा के आसपास के काल खंड में संस्कृत के व्याकरणाचार्य पाणिनी हुए हैं. अतः रामायण की रचना उसी काल खंड का माना जा सकता है. वरिष्ठ कवि साहित्यकार आत्माराम कोशा “अमात्य” ने 4 वेद व पंचम वेद महाभारत सहित अन्यान्य ग्रंथो की रचना करने वाले महर्षि वेद व्यास को एक पदवी बताया तथा कहा कि है समय-समय पर सनातन वांग्मय का संकलन व संहिता लिखने वाले ऋषि -महर्षि वाल्मीकि,नारद ,इंद्र ,मनु ,व्यास आदि के रुप में जाने गए. उन्होंने जस्ट लाइक भारत के प्रधान मंत्रियो की तरह विक्रमादित्य , इंद्र ,व्यास, बाल्मीकि नारद, मनु आदि को एक व्यक्ति ने होकर अलग-अलग व्यक्ति बताया.
चिंतक प्रभात तिवारी ने बताया कि पहले के ऋषि मुनि, सिद्ध पुरुष की तरह होते थे. जिनके सिर में हाथ रख दे उनकी ज्ञान चक्षु खुल जाती थी. कवि / कथाकार मानसिंह मौलिक ने महर्षि बाल्मीकि को नमन करते हुए शरद पूर्णिमा की पूर्ण ज्योत्सना वाली रात भगवान श्री कृष्ण के गोपियों के साथ वृंदावन में महारास रचाए जाने की चर्चा की वहीं राकेश इंदूभूषण ठाकुर ने भारत की ज्ञान राशि के अथाह भंडार की चर्चा की और युवा कवयित्री पूजा मार्जिवे की कविता का पाठ करते हुए माहौल को काव्य मय बनाया. इसी तरह दिग्विजय कालेज के हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ शंकर मुनि राय ने भोजपुरी में सोनवा के पिंजरा गीत गाकर वातावरण में सरसता बिखेरी.
श्री कृष्ण के महारास की छटा
कार्यक्रम में उपस्थित कवि तारिक साहिल ने भगवान श्री कृष्ण और राधा के प्रेम में पगी सवाल- जवाब वाली रचना का पाठ कर श्री कृष्ण के महारास की छटा बिखेरी. वहीं वरिष्ठ कवि साहित्यकार अखिलेश्वर प्रसाद मिश्रा ने उल्टा नाम जपे जा जाना बाल्मीकि भय ब्रह्म समाना की बात कहते हुए कहा कि आज महर्षि बाल्मीकि का नाम लोग भूल गए हैं और रामायण के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास जी को बताते हैं. कवयित्री सुषमा शुक्ला “अंशुमन” ने माहौल को ग्रामीण परिवेश का टच देते हुए शहर का गांव आना नामक रचना पढ़कर वाह- वाही बटोरी. इसके बाद ग्राम्य कवि आनंद राम सार्वा “अनंत”, पवन यादव “पहुना” ने भी गांव को स्वर्ग की तरह बताते हुए रचना पढ़ी. कवि / पत्रकार प्रकाश साहू “वेद” ने पहलगाम की घटना पर जो पूर्ण कविता पढ़ी वहीं कवि श्री कोशा ने छत्तीसगढ़ी में यों कहा- जब कट्टर धर्मांधता में आके,मनखे क्रूर हो जथे,,/ तो होथे पहलगाम हमला ,अउ आपरेशन सिंदूर हो जथे,,. कार्यक्रम का विभिन्न क्षणिकाओ से रसमय संचालन कर रहे जो के कवि शैलेश गुप्ता ने अतिथियों द्वारा सम्मानित हुए कवि साहित्यकार शरद पूर्णिमा पर आयोजित इस साहित्यक आयोजन में जहां सभी कवि /साहित्यकारों की उपस्थिति में छत्तीसगढ़ सहित समिति का पुनर्गठन किया गया.
वहीं कला साहित्य के क्षेत्र में संस्कारधानी नगरी व जिले का नाम रौशन करने वाले कवि/ साहित्यकार मदन मंडावी सहित अपनी कविता में ग्रामीण परिवेश की खुबियां बिखेरने वाली कवयित्री सुषमा शुक्ला “अंशुमन” व ग्राम्य कवि आनंद राम सार्वा “अनंत” का पुष्प गुच्छ श्रीफल व दुपट्टा दें कर सम्मानित किया गया. कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रही समाजवादी व अधिवक्ता शारदा तिवारी ने सभी कवि / साहित्यकारो व पत्रकारों को अपनी व एसडीएम श्री पटेल व सीएसपी वैशाली जैन की ओर से शरद पूर्णिमा व महर्षि बाल्मीकि जयंती की बधाई एवं शुभकामनाएं दी. कार्यक्रम के अंत में शरद पूर्णिमा की चंद्र ज्योत्स्यना में पगी स्वादिष्ट खीर का आनंद लिया गया. सभी उपस्थितों का आभार प्रदर्शन कवि पवन यादव पहुना ने किया.
इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार रविंद्र मुदिराज, ईश्वर साहू दीपक साहू आदि सहित कवि बलराम सिंन्हा,कला धर्मी महावीर साहू व अन्य जन उपस्थित थे. उक्ताशय की जानकारी सचिव मानसिंह मौलिक ने दी.
