10 हज़ार नग प्रतिबंधित नशीली कैप्सूल जप्त.

दुर्ग- ऑपरेशन विश्वास के तहत दुर्ग पुलिस ने बड़ी की कार्यवाही है. प्रतिबंधित नशीली दवाईयां (कैप्सूल) की ब्रिकी करने वाले पांच आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है. गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से लगभग 10 हज़ार नग प्रतिबंधित नशीली कैप्सूल जब्त की गई. यह कार्रवाई वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक विजय अग्रवाल के निर्देशन में की गई.
पुलिस के अनुसार, दुर्ग जिले में प्रतिबंधित नशीली दवाइयों की बिक्री की सूचना लगातार मिल रही थी. इसी क्रम में पुलिस को एक मुखबिर से सूचना मिली कि जिला अस्पताल दुर्ग मर्चुरी के पास तीन व्यक्ति प्रतिबंधित नशीली दवाइयों के कैप्सूल रखकर बिक्री के लिए ग्राहक तलाश रहे हैं. सूचना मिलते ही दुर्ग कोतवाली पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए टीम गठित की और बताए गए स्थान पर घेराबंदी कर तीनों को पकड़ा गया.
गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान प्रेम सिंह (36 वर्ष) निवासी कैम्प 01 थाना छावनी, रवि कुमार शर्मा (35 वर्ष) निवासी न्यू खुर्सीपार, और उमेश कुमार कश्यप (38 वर्ष) निवासी कैम्प 02 भिलाई के रूप में हुई. तलाशी के दौरान पुलिस ने उनके कब्जे से 160 पत्ते ट्रामाडोल कैप्सूल (प्रत्येक पत्ते में 24 कैप्सूल) कुल 3,840 नग कैप्सूल और दो मोबाइल फोन बरामद किए. इन तीनों आरोपियों से पूछताछ में पुलिस को नशे के कारोबार में अन्य साथियों के बारे में जानकारी मिली. आरोपियों के निशानदेही पर पुलिस ने आसिफ मोहम्मद (33 वर्ष) निवासी जोन 01 खुर्सीपार और शाहिद कुरैशी (36 वर्ष) निवासी दुर्गापारा न्यू खुर्सीपार को जामुल सब्जी बाजार के पास से गिरफ्तार किया. तलाशी में इन दोनों के पास से 250 पत्ते ट्रामाडोल कैप्सूल, प्रत्येक पत्ते में 24 नग कैप्सूल यानी कुल 6,000 नग नशीली कैप्सूल और दो मोबाइल फोन बरामद किए गए.

सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ NDPS एक्ट की धारा 21 (सी) और 27 (क) के तहत अपराध दर्ज किया गया है. पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे लंबे समय से नशे की दवाइयों का व्यापार कर रहे थे और उनका संपर्क उत्तर प्रदेश से जुड़ा हुआ है, जहां से ये दवाइयां अवैध रूप से खरीदी जाती थीं. जांच में सामने आया कि आरोपी इन कैप्सूल को युवाओं को सस्ते दामों में बेचकर भारी मुनाफा कमाते थे. पुलिस का मानना है कि यह एक संगठित नशा तस्करी गिरोह है जो राज्य के कई हिस्सों में सक्रिय है. आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है.
कार्रवाई में उनि प्रताप सिंह ठाकुर, उनि उदय शंकर झा, सउनि चंद्रशेखर सोनी, आरक्षक गजेन्द्र यादव, हिमांशु जंघेल और खिलेश कुर्रे की महत्वपूर्ण भूमिका रही.
