बस्तर की फिजाओं में अंकित है भगवान श्री राम के पद चिन्ह- शशिकांत द्विवेदी

हिंदी दिवस पर सम्मानित हुए कवि / साहित्यकार कोशा, मुंहफट व थंगेश्वर
राजनांदगांव- लायन्स क्लब द्वारा शहर के लायन डेन में हिंदी दिवस का गरिमामय आयोजन किया गया. कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कला/ साहित्य सुधि दीपक बुद्धदेव थे. अध्यक्षता डोंगरगढ़ से छत्तीसगढ़ सरकार से सहकारिता राज्य अलंकरण प्राप्त कवि/ साहित्यकार शशिकांत द्विवेदी थे. वहीं विशेष अतिथि के रुप में वरिष्ठ चिंतक अशोक चौधरी दिग्विजय कालेज के प्रोफेसर शंकरमुनि राय कमला कालेज के प्रोफेसर ओंकार लाल श्रीवास्तव, डीसी जैन ,व पार्षद शैकी बग्गा थे. बड़ी संख्या में कवि साहित्यकारों व बुद्धिजीवियों की उपस्थिति में आयोजित इस गरिमामय हिंदी दिवस कार्यक्रम में साहित्य की सतत सेवा के लिए संस्कार धानी के वरिष्ठ कवि /साहित्यकार व राजभाषा आयोग के जिला समन्वयक आत्माराम कोशा “अमात्य” ,हास्य -व्यंग्य के कवि पद्म लोचन शर्मा “मुंहफट” व राज्यपाल पुरस्कार के लिये नामांकित व्याख्याता थंगेश्वर साहू को अतिथियों द्वारा शाल ओढ़ाकर व श्री फल प्रदान कर सम्मानित किया गया.

हिंदी दिवस भावनात्मक उत्सव का पर्व
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बुद्धदेव ने हिंदी दिवस को एक भाषाई पर्व नहीं अपितु भावनात्मक उत्स बताया. उन्होंने अपनी काव्य पंक्तियां में हिंदी भाषा को दिल की पुकार,व शब्दों का सुंदर विचार कहा. हिंदी दिवस के इस कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे श्री द्विवेदी ने भगवान श्री राम को राष्ट्रीय अस्मिता का प्रतीक बताते हुए कहा कि उनकी पदचापो की गूंज आज भी बस्तर में सुनाई देती है. उन्होंने कश्मीर से संबंधित ओजपूर्ण कविता पढ़ते हुए हिंदी को हिंद की शान और भारतीयों को महान कहते हुए तालियां बटोरी. किसान नेता व चिंतक अशोक चौधरी ने हिंदी पर सारगर्भित बातें कही और बताया कि मैथिली भाषा को आठवीं अनुसूची में दर्ज कराने के लिए व्याकरण से लेकर लिपी तक के लिए पापड़ बेलने पड़े. उन्होंने छत्तीसगढ़ी को आठवीं अनुसूची में दर्ज कराने के लिए व्याकरण व लिपी का होना आवश्यक बताया. इस पर श्री कोशा ने कहा कि छत्तीसगढ़ी का व्याकरण धमतरी के हीरालाल काव्योपाध्याय द्वारा सन 1885 में लिखी जा चुकी है जिसे जार्ज ग्रियर्सन द्वारा पुनर्लेखन किया गया.
हिंदी की स्वीकार्यता बढ़ाने ठोस पहल आवश्यक
लायंस क्लब अध्यक्ष प्रमोद बागड़ी ने हिंदी को जन- जन तक पहुंचाने व इसकी स्वीकार्यता बढ़ाने के लिए ठोस पहल का होना आवश्यक बताया. कार्यक्रम का बौद्धिक संचालन करते हुए अधिवक्ता अमलेंदु हाजरा ने हिंदी भाषा की गरिमा बनाए रखने के लिए हिंदी का अधिकाधिक रुप से उपयोग किए जाने तथा डा. चंद्रशेखर शर्मा ने हिंदी सीखने के लिए अखबारों का बहुत बड़ा हाथ बताया.
हिंदी दिवस अवसर पर आयोजित लायंस क्लब के कार्यक्रम को वरिष्ठ साहित्यकार शंकर मुनि राय, व ओंकार प्रसाद श्रीवास्तव प्रभात बख्शी ने भी संबोधित किया. इस अवसर पर रंगकर्मी हिमांशु याज्ञिक, अधिवक्ता राजकुमार शर्मा, आनंद वर्गिस, राकेश ठाकुर, गजेंद्र बख्शी, व्यंग्यकार गिरीश ठक्कर “स्वर्गीय”, शैलैष गुप्ता , अनिमेष, मीना यादव, मोना गोसाईं, कांति मोर्य, जकुमारी मरकाम, संजय साहू, पंकज गुप्ता,आदि सहित बड़ी संख्या में साहित्य सुधि एवं हिंदी प्रेमियों की उपस्थिति रही.
