स्वाधीनता दिवस प्रसंग पर शाल श्रीफल पुष्प गुच्छ व तिरंगा भेंट कर किया गया अभिनंदन

राजनांदगांव- साहित्य के क्षेत्र में देश के सबसे बड़ा सम्मान ज्ञानपीठ पुरस्कार से पुरस्कृत वरिष्ठ कवि, साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल का संस्कार धानी के कवि / साहित्यकारों ने उनके निवास स्थान जाकर उनका भाव-भीना सम्मान किया. इससे श्री शुक्ल अत्यधिक अभिभूत हुए.
छत्तीसगढ़ साहित्य समिति के जिला अध्यक्ष आत्माराम कोशा “अमात्य” के नेतृत्व में रायपुर के राजेंद्र नगर स्थित श्री शुक्ल के निवास स्थान पर जाकर संस्कार धानी के कवि / साहित्यकार कोशा सहित, कथाकार कुबेर साहू, मानसिंह मौलिक, कवयित्री सुषमा शुक्ला “अंशुमन” कवि लखन लाल “लहर” ,पवन यादव “पहुना” ,कुलेश्वर साहू, महावीर साहू, आनंद राम सार्वा “अनंत” फकीर साहू “फक्कड़” किशोर लोमेश, आदि द्वारा श्री शुक्ल जी को शाल पहना कर तथा श्री फल व पुष्प गुच्छ देते हुए स्वाधीनता दिवस की पूर्व संध्या उन्हें तिरंगा भेंट कर सम्मान किया गया.
साहित्यिक सर्वोच्चता में जुड़ा एक और अध्याय
बता दें कि राजनांदगांव जिले के निर्माता पं. किशोरी लाल शुक्ल के भतीजे विनोद कुमार शुक्ल की शिक्षा – दीक्षा व ज्यादातर लेखन कार्य संस्कार धानी में ही हुआ है. नौकरी के सिलसिले में वे रायपुर चलें गए. लेकिन उनका जुड़ाव इस साहित्यिक धरा के साथ सदैव बना रहा.
श्री कोशा ने कहा कि साहित्य त्रिवेणी पदुमलाल पुन्नालाल बख़्शी, गजानन माधव “मुक्तिबोध” व बल्देव प्रसाद मिश्र की इस नगरी के साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल को साहित्य के क्षेत्र का सर्वोच्च सम्मान ज्ञानपीठ पुरस्कार मिलने से साहित्यिक धरा की साहित्य सर्वोच्चता की श्रृंखला में एक और अध्याय जुड़ गया है.
समाज को श्रेष्ठ देने का होना चाहिए प्रयास
श्री शुक्ल ने अपने शहर संस्कार धानी नगरी के कवि साहित्यकारों द्वारा किए गए सम्मान से अभिभूत हो कर उन्हें ढेर सारा आशीर्वाद दिया और कहा कि समाज में व्याप्त विसंगतियो पर कवि/ साहित्यकार , लेखकों का पैनी नजर होनी चाहिए और अपनी रचनाओं के माध्यम से समाज को श्रेष्ठ देने का प्रयास किया जाना चाहिए. उन्होंने उपस्थित सभी कवि/ साहित्यकारो को अच्छा साहित्य सृजन की प्रेरणा दी. इस अवसर पर कथाकार कुबेर साहू ने अपनी पुस्तकें श्री शुक्ल जी को भेंट किया वहीं स्वाधीनता दिवस की पूर्व संध्या आयोजित इस अभिनंदन मौके पर श्री कोशा ने उन्हें राष्ट्रध्वज तिरंगा भेंट कर उनसे आशीर्वाद लिया. श्री शुक्ल ने संस्कार धानी के कवि साहित्यकारों को पुनः उनसे मिलने आते रहने की बात कही. इस अवसर पर श्री शुक्ल जी के नाते- रिश्तेदार शाश्वत शुक्ल सहित अन्य परिजन उपस्थित थे. उक्ताशय की जानकारी कवि/ कथाकार मानसिंह मौलिक ने दी.
