दुर्ग : मौसम में लगातार बदलाव हो रहे हैं जिसका असर टमाटर की फसल पर पड़ा है. हालत यह हो गई है कि टमाटर को अब किसानों ने फेंकना शुरू कर दिया है. इतना ही नहीं फसल को उखाड़कर फेंका जा रहा है. वजह यह है कि इसे तोड़कर बाजार तक पहुंचाने तक का खर्च भी नहीं मिल पा रहा है. 1 रुपए किलो के भाव से भी कोई लेवाल नहीं मिल पा रहा है. कलेक्टर पुष्पेंद्र मीणा ने बताया कि प्रोसेसिंग यूनिट जल्द शुरू होनी है. इसके लिए स्थल का चयन किया जा चुका है, फिर दिक्कत नहीं होगी.

धमधा क्षेत्र में सब्जी और फल की अत्यधिक उपज होती है. किसानों को उनके उत्पादन का वाजिब दाम मिल सके, इसके लिए शासन ने फूड पार्क बनाने की योजना बनाई थी. किसानों को सपना दिखाया गया कि अब उन्हें नुकसान उठाना नहीं पड़ेगा. खेत में टमाटर तोड़ने का काम करने वाले मजदूर 15 रुपए कैरेट के हिसाब से तोड़ते हैं. एक कैरेट में 25 किलो टमाटर आता है. लेकिन इस टमाटर को 25 रुपए में खरीदने वाला भी कोई नहीं है.
कुछ किसान प्राइवेट जूस बनाने वाली कंपनी को मात्र 20 रुपए कैरेट के हिसाब से टमाटर बेच रहे हैं. ताकि कम से कम मजदूरों का खर्च निकल जाए. लेकिन अब वह प्राइवेट कंपनी भी लेने से मना कर रही है. इसके चलते टमाटर की फसल खराब होने लगी है. टमाटर की खेती को लेकर हर साल ठंड के समय ऐसे हालात बन रहे हैं, लेकिन समस्या का निराकरण नहीं हो पा रहा है.
