कलेक्टर जनदर्शन: BSP से संबंधित विभिन्न समस्याएं को लेकर भिलाई लोक सृजन समिति ने की शिकायत

दुर्ग- भिलाई लोक सृजन समिति द्वारा 18 नवंबर को कलेक्टर जनदर्शन में पहुंचकर कलेक्टर ऋचा प्रकाश चौधरी से बीएसपी से संबंधित विभिन्न समस्याओं को लेकर शिकायत की. जैसे बी.एस.पी. प्रबंधन द्वारा आवास रिटेंशनधारियों को आवास खाली करने संबंधी दिये गये नोटिस पर रोक लगाने एवं उनके लिये दुर्गापुर स्टील प्लांट के तर्ज पर आवास लाइसेंस योजना लागू करने संबंधी पहल करने की बात कही. साथ ही शिकायत में कहा गया है कि पूर्व कार्मिक आज आवास से संबंधित ज्वलंत समस्या के कारण अत्यिधक व्यथित है, जिसका समुचित निकारण अति आवश्यक है. संगठन ने विभिन्न बिंदुओं पर मांग की है.
- बी.एस.पी. में लगातार नियमित कर्मियों की संख्या घटते क्रम में होने के कारण वर्ष 2001 से 2003 के मध्य सेल हाउसलीज योजना को 5 चरणों में लागू की गई थी, जिसमें 4352 आवासों को 30 वर्षीय पट्टे पर कार्मिकों को आवंटित की गई थी.
- भिलाई के भूतपूर्व एवं वर्तमान कार्मिकों की जरुरत को देखते हुए भिलाई के सभी यूनियनों तथा अधिकारी संगठन की लगातार मांग पर एवं भिलाई के उत्कृष्ट कार्य संस्कृति तथा सेल के प्रॉफिट में बी.एस.पी. के महत्वपूर्ण योगदान को देखते हुए बी.एस.पी. के स्वर्ण जयंती के शुभ अवसर पर भारत सरकार के पूर्व केन्द्रीय केबिनेट इस्पात मंत्री स्व. रामविलास पासवान ने 9 फरवरी 2008 को हाउसलीज योजना को पुनः लागू करने के लिये भिलाई के सार्वजनिक सभा में, घोषणा की थी जिसका 25 जुलाई 2008 को सेल बोर्ड की 340वीं बैठक में अनुमोदन भी किया जा चुका है, जिसमें विशेष प्राथमिकता के आधार पर भिलाई में इसे तुरंत लागू करने की बात कही गई थी.
- भिलाई इस्पात संयंत्र के कार्मिक उपरोक्त लीज की घोषणा एवं सेल बोर्ड से उसका अनुमोदन होने के कारण हाउसलीज शीघ्र लागू होने की आशा में निवासरत आवास को रिटेंशन स्कीम के तहत 2, 3 और 4 लाख और बाद में इसे 8,9 और 10 लाख रु. अमानत राशि जमा करने के बाद भी सामान्य किराये से 32 गुना किराये देकरबी.एस.पी. आवास में रहने के लिये विवश हैं, चूंकि ये आवास 60 से 65 वर्ष पुराना होने के कारण तथा मरम्मत के घोर अभाव में निवासरत आवास अत्यंत जर्जर हो चुके हैं, जिसके मरम्मत में आवास रिटेंशनधारी स्वयं का 4 से 5 लाख रु. आवास में खर्च कर उसमें निवासरत हैं तथा आर्थिक एवं मानसिक परेशानी भी झेल रहे हैं.
- बी.एस.पी. के पूर्व कार्मिकों के आवास रिटेंशन अवधि पूरा होने पर प्रबंधन उरो खाली करने के लिये उनके जमातदारों एवं स्वयं के पास 10 दिन अंदर आवास खाली नहीं करने पर विधिक कार्यवाही करने का नोटिस दिया गया है, जबकि निवासरत आवास में रिटेंशन अवधि समाप्त होने के बाद भी उसमें आगे और रहने के लिये 32 गुना दांडिक किराया देकर रहने का प्रावधान है, जिसका वे पालन कर अभी 32 गुना किराया जमा कर रहे हैं.
- बी.एस.पी. ने अक्टूबर 2021 में प्रथम चरण में लाइसेंस योजना के तहत एन.क्यू.-1, एन. क्यू.-2 श्रेणी के 400 वर्गफीट प्लिंथ एरिया तक के लिये आवास लाइसेंस में आबंटित किया है, जिसमें पी.पी. एक्ट के तहत स्टेट कोर्ट से आवास खाली करने का डिक्री होने वाले रिटेंशनधारियों को भी लाइसेंस में आवास आवंटित किया है.
- हाउसलीज योजना के छठवें चरण में अवरोध होने के कारण इसके लिये 14 वर्षों से आंदोलन करने वाली हमारी समिति के साथ-साथ बी.एस.पी. की सभी यूनियनों ने भी 650 वर्गफीट क्षेत्रफल तक के आवासों को सभी सेवानिवृत्त कर्मियों को आवास लाइसेंस योजना पर उपलब्ध करवाने की मांग लगातार की जा रही है एवं उसके लिये प्रबंधन के साथ कई बार बैठक भी किया जा चुका है. इसके अलावा दिल्ली में एन. जे.सी.एस. यूनियन के साथ बैठक में इस्पात मंत्री महोदय ने भी रिटायर्ड कर्मचारियों को आवास देने हेतु सकारात्मक पहल किये थे.
- यह ध्यान देने योग्य बात है कि दुर्गापुर स्टील प्लांट ने 15 अप्रेल 2023 को 618 वर्गफीट क्षेत्रफल वाले आवासों तक सेवानिवृत्त कार्मिकों के लिये लाइसेंस योजना लागू भी कर दिया लेकिन बहुत ही खेद की बात है कि सेल के सिरमौर भिलाई जहां हाउसलीज के छठवे चरण लागू होने की घोषणा एवं सेल बोर्ड के अनुमोदन के बाद भी वैकल्पिक रूप से लाइसेंस योजना को यहां पहले लागू करना चाहिये था, इसके विपरीत प्रबंधन उल्टे रिटेंशनधारियों को परेशान करने के लिये उनके जमानतदारों एवं स्वयं को आवास खाली करने के लिये नोटिस भेज रहे हैं, ये कैसा न्याय है.
- लोक परिसर अधिनियम 1971 (पी.पी. एक्ट) में उन सभी तमाम अवैध कब्जाधारी अनाधिकृत अधिभोगियों के लिये बेदखली की कार्यवाही करने के लिये बना है, लेकिन इसका अधिकांश उपयोग सेवानिवृत्त आवास रिटेंशनधारियों को परेशान करने के लिये उनके विरुद्ध किया गया है. वहीं दूसरी और बी.एस.पी. की करीब 465 एकड़ जमीन अभी भी अवैध कब्जे में है, जिसमें नेवई, मरोदा, रुआबांधा और उमरपोटी के जमीन में तो पूरा शहर ही बस गया है, जहां होटल, ढाबे, शॉपिंग काम्पलेक्स से लेकर सभी तरह के कारोबार बी.एस.पी. की जमीन पर हो रहा है. वहां पर पी.पी. एक्ट के तहत अभी तक बेदखली की कार्यवाही क्यों नहीं की जा रही है, वे कई सालों से फ्री में रह रहे हैं, व्यापार कर रहे हैं, इससे बी.एस.पी. को भारी आर्थिक क्षति हो रही है. इसके लिये जिम्मेदार कौन है? क्या इसके लिये कोई कायदा कानून नहीं है? खुली छूट मिली है.
- जब बी.एस.पी. के आवास रिटेंशनधारी भारी भरकम अमानत राशि जमा किये हैं और नियमानुसार 32 गुना आवास किराया, बिजली और पानी आदि शुल्कों का भुगतान कर रहे हैं और इन लोगों से वी.एस.पी. को कोई आर्थिक नुकसान नहीं हो रहा है, तो आवास खाली करने के लिये नोटिस देने के बजाय आवास को लाइसेंस में देना चाहिये. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत सभी नागरिकों को समानता का अधिकार प्रदान करता है, जब बी.एस.पी. के जमीन में बसे नेवई, मरोदा, उमरपोटी और रुआबांधा एरिया में बसे लोगों को जो कि मुफ्त में रह रहे हैं उन्हें खाली करने के लिये नोटिस एवं कार्यवाही क्यों नहीं किया जा रहा है ? ऐसी स्थिति में रिटेंशनधारियों को दिया जाने वाले नोटिस से समानता के अधिकार का हनन हो रहा है.
संगठन ने कहा कि अब प्रबंधन को पी.पी.एक्ट के तहत कार्यवाही शीघ्र स्थगित कर राज्य शासन एवं नगर निगम भिलाई से चर्चा करनी चाहिए.
