डाॅ.खूबचंद बघेल स्वास्थ्य योजना का नाम यथावत रखें, वरना पूरे राज्य में उग्र आंदोलन की तैयारी

दुर्ग- छत्तीसगढ़ मनवा कूर्मी क्षत्रीय समाज एवं छत्तीसगढ़ भातृसंघ के संयुक्त तत्वधान में आज एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन का आयोजन हिंदी भवन दुर्ग के सामने किया गया, जिसमें “डाॅ.खूबचंद बघेल स्वास्थ्य सहायता योजना” का नाम बदलकर “शहीद वीर नारायण सिंह आयुष्मान स्वास्थ योजना” किए जाने का छत्तीसगढ़ के सर्व समाज ने कड़ी निंदा की है. समाज प्रमुखों का मानना है कि छत्तीसगढ़ के दो महापुरूषों के नाम को लेकर दो समाजों के बीच आपसी मतभेद पैदा किया जा रहा है. सर्व समाज के अनुसार डॉ. खूबचंद बघेल और शहीद वीर नारायण सिंह के बीच बराबरी का सम्मान है, और वे दोनों समाज के लिए पूज्यनीय है. इस तरह समाज को खंडित करने का प्रयास सरकार न करें. समाज के बुद्धिजीवियों ने कहा कि सामाजिक समरसता एवं सौहार्द्र को बनाए रखना सरकार की नैतिक जवाबदेही है. कार्यक्रम में दुर्ग, भिलाई, भिलाई-3, जामुल, कुम्हारी नगर ईकाई के अध्यक्ष एवं पदाधिकारीगण बड़ी संख्या में उपस्थित थे. इस अवसर पर समाज द्वारा मुख्यमंत्री और राज्यपाल के नाम कार्यपालिक मजिस्ट्रेट को ज्ञापन सौंपा गया.
आदिवासी विकास परिषद के अध्यक्ष के.आर.शाह ने अपने संबोधन में कहा कि 15 साल से भाजपा सरकार को नई राजधानी का नाम शहीद वीर नारायण सिंह के नाम पर रखने के लिए सभी समाज द्वारा प्रस्ताव दिया गया था. बावजूद, पूर्ववर्ती भाजपा सरकार द्वारा नई राजधानी का नाम अटल नगर रखा गया. वैसे ही जयस्तंभ चौक रायपुर में शहीद वीर नारायण सिंह को अंग्रेजों द्वारा बम से उड़ाया गया था उस स्थान का नाम शहीद वीर नारायण सिंह रखकर उनके आदमकद प्रतिमा लगाने की मांग की गई थी. उसे भी तत्कालीन भाजपा सरकार द्वारा स्वीकार नहीं किया गया. आज उन्हें शहीद वीर नारायण सिंह की याद कैसे आ गई? इससे स्पष्ट होता है कि सरकार दो समाजों के बीच आपसी भाई-चारा और सौहार्द्र को बिगाड़ने का षडयंत्र रच रही है.
दुर्ग राज के राज प्रधान दुलारी वर्मा ने कहा कि अगर यह सरकार नाम परिर्वतन को वापस नहीं लेती है तो छत्तीसगढ़ के सर्व समाज राजधानी रायपुर में लाखों की संख्या में उपस्थित होकर उग्र आंदोलन करने की चेतावनी दी है.
आदिवासियों के हितैषी थे डॉ.खूबचंद बघेल
बस्तर के राजा भंजदेव की जब हत्या हुई तब मध्यप्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ.डीपी मिश्र थे. मुख्यमंत्री ने इस गंभीर घटना की जांच कर रिपोर्ट तैयार करने के लिए डॉ.खूबचंद बघेल को जिम्मा सौंपा था. डॉ.बघेल ने जांच रिपोर्ट तैयार कर डीपी. मिश्र से कहा कि आदिवासी राजा की हत्या सरकार की पुलिस द्वारा जानबूझ कर की गई है. इस बात से डीपी. मिश्र तिलमिला गये और उन्होंने जवाब में डॉ बघेल से कहा कि “मैं तुम्हारें राजनीति को खत्म कर दूंगा” तब डॉ. बघेल ने प्रति उत्तर में कहा कि मिश्र जी मेरी राजनीति तो छीन सकते हो पर मेरी गरीबी नहीं छीन सकते और उन्होंने राज्यसभा की सदस्यता के साथ-साथ पार्टी से इस्तीफा दे दिया. आज इन्हीं महापुरूषों में डॉ. खूबचंद बघेल और शहीद वीर नारायण सिंह को सामने रखकर दोनों समाज को आपस में लड़ाया जा रहा है.
कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ मनवा कूर्मी क्षत्रीय समाज के पूर्व केंद्रीय अध्यक्ष मन्नूलाल परगनिहा और दुर्ग के पूर्व महापौर आर.एन वर्मा, आदिवासी विकास परिषद के अध्यक्ष के.आर.शाह, गणेश नायक, रिसाली नगर निगम के एमआईसी सदस्य चंद्रभानसिंह ठाकुर, ईश्वरी वर्मा, राजेंद्र परगनिहा, दुर्ग राज के राज प्रधान दुलारी वर्मा, रोशन वर्मा, इंद्र कुमार वर्मा, प्रकाश गीते, प्रहलाद वर्मा, कांती चंद्रवंशी, रमाशंकर वर्मा, धरम वर्मा, सत्यवती वर्मा, लवकुश बघेल, तेजबहादुर बंछोर, राजेश वर्मा, बीके वर्मा,गोपालकृष्ण वर्मा, रमाशंकर वर्मा, पीलाराम वर्मा, काशी राम मढरिया, बिसौहा राम मढरिया आदिवासी समाज से चंद्रकला तारम, अखिलेश मरावी, उमासिंह, मुकुंद बंसोड़ सहित समाज के अनेक पदाधिकारीगण उपस्थित थे. कार्यक्रम का संचालन कौशल कुमार वर्मा और अभार व्यक्त प्रहलाद वर्मा ने किया.
