केन्द्र सरकार चुनिन्दा उद्योगपतियों के हाथों की कठपुतली

जगदलपुर- छत्तीसगढ़ आदिवासी विकास परिषद के प्रदेश अध्यक्ष केआर शाह ने शनिवार को कहा कि भारत का संविधान और लोकतंत्र खतरे में है. इसे बचाने के लिए सभी सामाजिक संगठनों को मुखर होकर आगे आना होगा.
केन्द्र सरकार वास्तव में कार्पोरेट सरकार है, जो कुछ चुनिन्दा उद्योगपतियों के हाथों की कठपुतली है. इस सरकार से सबसे बड़ा खतरा देश के आदिवासियों और उनके जल, जंगल, जमीन को है.
उन्होंने कहा कि वर्ष 2023 में मोदी सरकार ने वन भूमि अधिकार अधिनियम में संशोधन कर पांचवी व छठवी अनुसूची वाले आदिवासी क्षेत्रों की भूमि को बिना ग्रामसभा अनुमति के अधिग्रहित करने का कानून संसद में पास करा लिया है. मोदी सरकार पुनः सत्ता में आयेगी तो बस्तर और सरगुजा की जमीनें उद्योगपतियों को दे दी जाएंगी.
देश तेजी से अधिनायकवाद की ओर बढ़ रहा है. स्वायत्त संस्थाओं पर शासन का पूर्णतया नियंत्रण है. देश में एक प्रकार से अघोषित आपातकाल की स्थिति है. मध्य भारत की इकलौती आदिवासी झारखण्डी सरकार के मुख्यमंत्री को जमीन घोटाले में ईडी ने गिरफ्तार कर जेल में डाल रखा है. शाह ने बताया कि मामला राजस्व से संबंधित है लेकिन करवाई ईडी कर रही है. इससे स्पष्ट है कि केन्द्र सरकार अपने अधिकारों का दुरूपयोग कर राजनैतिक विद्वेष फैला रही है.
छल रहे आदिवासियों को
देश की आजादी के बाद सुरक्षित क्षेत्रों में आदिवासी ही सरपंच से लेकर संसद बनते आ रहे हैं फिर इन इलाकों में विकास नहीं होने की बात कह वहीं आदिवासी नेता अलग पार्टी बनाकर चुनाव क्यों लड़ रहे हैं? इस प्रश्न पर छत्तीसगढ़ आदिवासी विकास परिषद के प्रांतीय अध्यक्ष ने स्पष्ट कहा कि आदिवासी ही आदिवासियों के सबसे बड़े दुश्मन हैं. तथाकथित आदिवासी नेता अपनी अक्रमन्यता छुपाने के लिए आदिवासियों के नाम पर नई पार्टी बनाकर आदिवासियों को भ्रमित कर रहे हैं. ऐसे लोगों के कृत्य छत्तीसगढ़ आदिवासी विकास परिषद बेनकाब करेगी. पत्रवार्ता के दौरान आदिवासी विकास परिषद के प्रदेश कोषध्यक्ष शांतनु मरकाम, गोंड समाज के जेआर ध्रुव तथा भतरा समाज से दुर्जन कश्यप, मनसाय मौर्य आदि मौजूद रहे.
