रायपुर- राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी सौम्या चौरसिया को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है. मनी लॉन्ड्रिंग मामले में उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी गई है. एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है. बता दें कि सौम्या चौरसिया कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में पूर्व सीएम भूपेश बघेल की उपसचिव थीं.

जानकारी के अनुसार, सौम्या चौरसिया के अधिवक्ताओं ने कोर्ट में ईडी की कार्यवाही के विधिक अधिकारों को चुनौती देते हुए शीर्ष अदालत में पेश याचिका में कहा है कि याचिकाकर्ता महिला है और उसके छोटे बच्चे हैं. मामले की सुनवाई में लंबा समय लगना है, इसलिए उसे ज़मानत दी जाए. इसके पहले हाईकोर्ट सौम्या चौरसिया की ज़मानत याचिका ख़ारिज कर चुका है.
ED कोयले घोटाले की जांच कर रही है जिसमें वरिष्ठ नौकरशाहों, व्यापारियों, राजनेताओं और बिचौलियों के एक ‘कार्टेल’ द्वारा छत्तीसगढ़ में परिवहन किए गए प्रत्येक टन कोयले के लिए 25 रुपये प्रति टन की अवैध लेवी वसूली जा रही थी. ईडी ने अपने दूसरे पूरक आरोपपत्र में आरोप लगाया कि घोटाले की अवधि के दौरान कोरबा जिले के कलेक्टर के रूप में कार्यरत रहे साहू ने सूर्यकांत तिवारी और उनके सहयोगियों द्वारा कोयला ट्रांसपोर्टर और जिला खनिज निधि (डीएमएफ) अनुबंधों से अवैध लेवी राशि के संग्रह में सुविधा प्रदान की और उनसे भारी रिश्वत प्राप्त की.
