भिलाई- पुन्नूलाल मोहले भाजपा के वह नेता हैं जिन्होंने कभी कोई चुनाव नहीं हारा. सीधे सपाट दिल की बात कहने वाले मोहले को उनके चुनाव क्षेत्र मुंगेली में खूब पसंद किया जाता है. नेताओं में से हैं जो अपने दीर्घ राजनीतिक जीवन में जनता से कभी दूर नहीं रहे. यही कारण रहा कि जब 2018 के चुनाव में भाजपा ने अब तक का सबसे खराब प्रदर्शन किया, तब भी वे अपनी सीट बचाने में सफल रहे.

भाजपा में ऐसे भी उम्मीदवारे उतारे है, जिनकी उम्र 70+ साल से अधिक थी. इस बार बुजुर्ग विधायक मुंगेली विधानसभा सीट से पुन्नु लाल मोहले उम्र (72) और बैकुंठपुर से भैयाालाल राजवाड़े(74), अहिवारा विधानसभा सीट से डोमन लाल कोर्सेवाड़ा उम्र (75), तखतपुर विधानसभा से धर्मजीत सिंह उम्र (70)जीते, वहीं कांग्रेस से 70+ दिगग्ज नेताओं को इस चुनाव में हार का सामना करना पड़ा. जबकि कांग्रेस की ओर से युवा विधायक प्रत्याशी धमतरी से ओंकार साहू(32) और बिलाईगढ़ से कविता प्राणलहरे उम्र (31) जीतने में कामयाब हुए.
मोहले ने 11वीं बार लगातार रचा किर्तिमान
पूर्व मंत्री व मुंगेली विधानसभा क्षेत्र के विधायक पुन्नूलाल मोहले ने लगातार 11वीं बार चुनाव जीतकर फिर कीर्तिमान रचा है. राजनीति के ऐसे योद्धा हैं जिन्हें आजतक- विरोधी दल का कोई भी नेता हरा नहीं पाया है. सरपंच से राजनीतिक सफर की शुरुआत करने वाले मोहले ने राज्य और केंद्र की बराबर की राजनीति की है. मौजूदा विधानसभा चुनाव में उन्होंने 11781 वोट की अंतर से जीत दर्ज की है.
पुन्नुलाल मोहले की राजनीति में शुरूआत
1980 के दशक में राजनीति की शुरुआत करने वाले मोहले अपने गृहग्राम दशरंगपुर से ग्राम पंचायत की राजनीति शुरू की. सरपंच पद के लिए वे चुनाव लड़े. यह उनका पहला राजनीतिक अनुभव था. पहले ही प्रयास में चुनाव जीत गए. सरपंच के पद पर काबिज होने के बाद धीरे-धीरे अनुसूचित जाति वर्ग के नेता के रूप में प्रतिष्ठित होने लगे.
श्री मोहले का जन्म 2 जनवरी, 1952 को बिलासपुर जिले के ग्राम दशरंगपुर में हुआ. पांच बार विधायक और चार बार लोकसभा का चुनाव जीतने वाले श्री मोहले ने 2018 के चुनाव में अपनी दसवीं जीत दर्ज की. वे सात हजार 876 मतों की लीड से छठवीं बार विधायक चुने गए. यह जीत इसलिए भी महत्वपूर्ण थी कि भाजपा इस चुनाव में 48 सीट से गिरकर 15 सीटों पर सिमट गई थी. एक और सीट भाजपा ने इसके बाद उपचुनाव में गंवा दी. लेकिन भाजपा ने इस बार के विधानसभा चुनाव में 55-35 से बहुमत हासिल कर सत्ता पर काबिज हो गया है.
करियर ग्राफ
पुन्नूलाल मोहले का सार्वजनिक जीवन 1966 से प्रारंभ हुआ जब उन्हें गुरु घासीदास विश्वविद्यालय की कोर्ट का सदस्य बनाया गया. इसके अलावा उन्हें हिन्दी सलाहकार समिति में भी लिया गया. सक्रियता में उनका प्रवेश 1977-78 में हुआ जब उन्हें ग्राम पंचायत का सरपंच चुन लिया गया. इसी दौरान वे दशरंगपुर शाला समिति के अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ सतनामी कल्याण समिति तखतपुर के उपसचिव भी चुने गए. 1983-84 में ग्राम पंचायत दशरंगपुर के सरपंच तथा जनपद पंचायत के सदस्य चुने गए.
1985 में मोहले पहली बार विधानसभा चुनाव जीतकर मध्यप्रदेश विधानसभा में पहुंचे. इसके बाद 1990, 1994, 2008, 2013 एवं 2018 में भी उन्होंने विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज की. 1996 से 2008 के बीच वे लोकसभा के लिए लगातार चुने जाते रहे..1996 में पहली बार लोकसभा पहुंचे मोहले को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पर्यावरण और वन संबंधी समिति का सदस्य बनाया गया. 1997 में भाजपा प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य बने. 1998 में उन्होंने लोकसभा की उद्योग संबंधी समिति, कोयला मंत्रालय की परामर्शदाली समिति, हिन्दी सलाहकार समिति एवं जल भूतल परिवहन मंत्रालय का सदस्य बनाया गया. यह उनकी जिजीविषा एवं कर्मठता का ही प्रतिफल था कि उन्हें इतने विस्तृत क्षेत्र में काम करने का अवसर दिया गया. 1999 में उन्हें पेट्रोलियम एवं रसायन संबंधी समिति का सदस्य बनाया गया. 2000 में वे खान एवं खनिज मंत्रालय परामर्शदात्री समिति के सदस्य बनाए गए. 2004 में उन्हें लोकसभा की रसायन एवं उर्वरकों संबंधी समिति,संसद सदस्य स्थानीय क्षेत्र विकास योजना संबंधी समिति एवं कोयला मंत्रालय की परामर्शदात्री समिति का सदस्य बनाया गया. पार्टी संगठन में भी उन्हें बड़ी जिम्मेदारियां दी गईं. उन्हें भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा का प्रमुख तथा छत्तीसगढ़ भाजपा का उपाध्यक्ष बनाया गया.
2008 में विधानसभा चुनाव जीतने के बाद उन्हें खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण, ग्रामोद्योग एवं बीस सूलीय कार्यक्रम का मंत्री बनाया गया. 2013 में चुनी गई सरकार में भी उनके पास ये विभाग बने रहे. 2015 में इसके साथ ही योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी के विभागों को और जोड़ दिया गया.
पुन्नूलाल मोहले का यह सफर कठिन चुनौतियों से भरा रहा है. वे जिस क्षेन से आते हैं वह प्रदेश का एक अत्यंत पिछड़ा इलाका है. यह वही क्षेत्र है जहां से सर्वाधिक कृषि मजदूरों का पलायन होता रहा है. मोहले अनुसूचित जाति से आते हैं. इस जाति के लोग ही सर्वाधिक पिछड़े व गरीब है. उनसे बातचीत के संपादित अंश यहां प्रस्तुत किये जा रहे हैं जिससे उनके तेवरों और साफगोई की झलक मिलती हैं.
